खुशखबरी! सर्वे के अनुसार आईटी सेक्टर में आएगी जॉब की बहार

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आईटी सेक्टर में जॉब की तलाश कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है। देश में एक्सपेरिस आईटी मैनपावरग्रुप इंडिया द्वारा किये सर्वे के मुताबिक भारतीय आईटी नियोक्ता अगले दो तिमाहियों तक बड़े पैमाने पर हायरिंग करेंगे। आईटी सेक्टर में ये जॉब ओपनिंग अच्छे प्रोफेशनल्स के लिए की जा रही है क्योंकि कंपनियां अपने संसाधन ऐसे स्नातकों पर व्यर्थ नहीं करना चाहती जिनमें कौशल की कमी है। अधिकतर आईटी कंपनियों ने सर्वे में कहा है कि वो नए आईटी स्नातकों को हायर करना चाहती हैं। हालांकि, 1 से 2 साल के अनुभवी लोगों के लिए नौकरियां हैं। इसलिए, आईटी सेक्टर में नए स्नातकों के साथ-साथ अनुभवी लोगों के लिए ये साल बेहतर होने की उम्मीद की है।

पिछले दो सालों से भारत का आईटी सेक्टर मंदी का सामना कर रहा है; ऐसा इसलिए क्योंकि इस सेक्टर में कॉम्पटिशन बढ़ा है जिससे भारत दक्षिण पूर्व एशिया के देशों जैसे फिलीपींस की तरह कम कुशल आईटी जॉब्स का सामना कर रहा है। फिलीपींस अपनी इंग्लिश बोलने वाली जनसंख्या के साथ भारतीय आईटी और बीपीओ सेक्टर को कड़ी टक्कर दे रहा है लेकिन कर्मचारियों को उनकी नौकरी से हटाने के पीछे का कारण तो कुछ और है।

भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों को जब कर्मचारियों की आवश्यकता नहीं थी तब भी उन्होंने पिछले दशक में अपने काम को बखूबी बनाये रखा। निम्नलिखित कारणों की वजह से ऐसा किया गया:

– सरकार इन कंपनियों को हायरिंग के लिए टैक्स ब्रेक दे रही थी।

– बेंच की ताकत ने उन्हें देश और विदेश में आकर्षक परियोजनाओं को लेने में मदद किया।

– भविष्य की परियोजनाओं के लिए तैयार रहने के लिए।

ऑफिशियली कंपनी द्वारा नियोजित इन लोगों को कुछ नहीं करना था बस इन्हें ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा था, जबकि उनमें से कुछ लोग अभी मास्टर्स कर रहे थे। बड़े पैमाने पर हायरिंग के पीछे की दूसरी वजह ये थी कि अधिकतर भर्ती किये गये स्नातक अकुशल थे और कंपनियों ने इन स्नातकों की भर्ती सिर्फ सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच कर टैक्स ब्रेक प्राप्त करने के लिए की थी।

जबकि भारत पश्चिम में संरक्षणवादी पर्यावरण से लगातार प्रभावित हो रहा था, भारतीय आईटी सेक्टर में जॉब की समस्या और कमी सिर्फ अल्पकालिक प्रकृति है। अर्थशास्त्री मनीष सभरवाल ने कहा, “किसी भी स्थान पर उद्योग एक इकोसिस्टम बना देता है जिसे हटाना मुश्किल होता है। इसलिए चीन के मैन्युफैक्चरिंग हब को हटा पाना मुश्किल है, इसी तरह भारत के आईटी हब को हटाना भी मुश्किल है क्योंकि बैंगलोर को छोड़कर आप दुनिया में एक घंटे की अवधि में 100 प्रोग्रामर हायर नहीं कर सकते।“

पीएम मोदी की सरकार द्वारा जीएसटी और (आईबीसी) जैसे आर्थिक सुधारों के कारण ही भारत का ‘व्यवसाय करने में आसानी’  के रैंक में सुधार आया है। कारोबारी माहौल में सुधार की वजह से कंपनियों को एआई, रोबोटिक्स, ब्लॉक चेन आदि जैसे बहुत ही विशिष्ट क्षेत्रों में स्थानांतरित करने में मदद मिल रही है। मैनपावरग्रुप इंडिया के अध्यक्ष मनमीत सिंह ने कहा, “हमारे शोध के मुताबिक हजारों की संख्या में होने वाली इस भर्ती का मुख्य उद्देश्य विश्व में नई टेक्नॉलजी के साथ तालमेल बनाए रखने का है। इस तेजी से बदलती टेक्नॉलजी को अपनाने के लिए संस्थानों को प्रशिक्षित लोगों की जरूरत है जो पहले ही दिन से काम करने में सक्षम हो। वांछित व वास्तविक आईटी प्रोफेशनल्स के बीच अभी भी काफी अंतर है जिस वजह से कौशल की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।”

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