तीस्ता सीतलवाड़ और यूपीए सरकार ने NCERT के जरिये देश के भविष्य में सांप्रदायिक जहर फ़ैलाने की रची साजिश

एनसीईआरटी तीस्ता सीतलवाड़

एनसीईआरटी किताबों पर सांप्रदायिक जहर फ़ैलाने और पक्षपाती होने का आरोप लगाया गया है। एनसीईआरटी की किताबों में करोड़ो हिन्दुओं की हत्या, लूटपाट और मंदिरों को नष्ट करने वाले मुस्लिम आक्रमणकारियों और दरिंदों को नायक के रूप में पेश किया गया है। मुस्लिम आक्रमणकारियों को हराने वाले भारतीय नायकों को या तो अनदेखा कर दिया गया है या फिर उनके बारे में सिर्फ एक अनुच्छेद दिया गया है। इस किताब को जरुर ही प्रोपेगेंडे को फ़ैलाने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे वो युवाओं को गुमराह कर सकें। एनसीईआरटी किताबें हिंदुओं के खिलाफ हैं हिन्दुओं के साथ पक्षपात करती है और इस्लामी संस्कृति का गुणगान करती हैं । कई गैर सरकारी कलाकारों ने भी एनसीईआरटी पुस्तक लेखन में हस्तक्षेप किया है और उनमें से एक तीस्ता सीतलवाड़  हैं।

तीस्ता सीतलवाड़  को विशेष अनुलाभ मिले हैं और वो सांप्रदायिक पाठ्यक्रम तैयार करती हैं। सीतलवाड़ को 2002 के गुजरात दंगों के बाद प्रधानमंत्री मोदी की छवि को धूमिल करने के लिए जानी जाती हैं। अहमदाबाद पुलिस ने 21 मई, 2018 को तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ हलफनामा दायर किया है। हलफनामे में तीस्ता सीतलवाड़ और यूपीए सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगाये गये हैं। रिपब्लिक टीवी द्वारा दिए गए हलफनामे के मुताबिक, तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति पर बतौर सीएबीई के सदस्य रहते हुए ‘पद का दुरुपयोग’ का आरोप है जिन्होंने अपने संगठन सब्रंग ट्रस्ट के लाभ के लिए छात्रों के लिए उत्तेजक सामग्री प्रकाशित किया। वो साहित्य और किताबों के द्वारा विभन्न समुदायों के बीच शत्रुता फ़ैलाने के मकसद से ऐसा कर रहे थे। एनसीईआरटी के अधिकारियों ने कहा था कि ‘सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए खतरे’ वाले इस साहित्य में न्यायिक प्रणाली, संविधान, भगवाकरण और राजनीति, 2002 के दंगों का जिक्र और बाबरी मस्जिद की आलोचना भी शामिल थी। इन सामग्रियों को 6 वीं से 12 वीं कक्षा के छात्रों को पढ़ाया गया था। एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम को “जहरीला” करार देकर खारिज कर दिया था जिसका उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द्र को चोट पहुंचना था। हलफनामे के मुताबिक एनसीईआरटी द्वारा पाठ्यक्रम को ख़ारिज किये जाने के बाद भी उस समय कपिल सिब्बल की अध्यक्षता वाली एचआरडी मंत्रालय के द्वारा इस पाठ्यक्रम को मंजूरी दे दी गई थी। एनसीईआरटी के अधिकारियों ने इसे एक ‘राजनीतिक निर्णय’ करार दिया था।

ये स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी के सबसे बड़े विरोधी जो एनजीओ कार्यकर्ता के रूप में न्याय के लिए लड़ रहे हैं उन्हें कांग्रेस द्वारा संरक्षण प्रदान किया जा रहा था। इस जहरीले प्रोपेगेंडा के लिए तीस्ता सीतलवाड़ के सबरंग ट्रस्ट के खोज प्रोजेक्ट के लिए एचआरडी मंत्रालय की तरफ से 1.40 करोड़ रुपये जारी किये गये थे। इससे कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं कि किस योग्यता के आधार पर उन्हें सीएबीई का हिस्सा बनाया गया?  क्या जो हम टैक्स का भुगतान करते हैं वो उनके सांप्रदायिक प्रोजेक्ट का वित्तपोषण करता है? किस आधार पर कपिल सिब्बल ने इसे मंजूरी दी? इससे पहले तीस्ता पर धन की घपलेबाजी के आरोप भी उजागर हुए हैं। 2002 के दंगों को लेकर मीडिया ने जो तीस्ता की छवि दिखाई थी क्या ये वही महिला है? यदि हां तो इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि मीडिया ने विकृत संस्करणों को फैलाया है जिसका उद्देश्य एक विशेष व्यक्ति और पार्टी के प्रति सांप्रदायिक जहर और घृणा पैदा करना था।

ये स्पष्ट है कि साहित्य का उपयोग मासूम बच्चों को किसी विशेष दल, व्यक्ति या विशेष विचारधारा के तहत गुमराह करने और उनके जहन में नफरत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा था। उन्होंने भारत के इतिहास को खराब कर दिया है, स्कूल के बच्चों को इतिहास के सच से अनजान रखने और फर्जी कहानियों द्वारा बच्चों को गुमराह करने की कोशिश की गयी है।

कांग्रेस और उसके प्रोपेगेंडे से बच्चों को अब भगवान ही बचाएं। आज कांग्रेस और गैर सरकारी संगठनों ने बीजेपी पर किताबों को भगवा करने का आरोप लगाया लेकिन वे स्वयं इसे सांप्रदायिक बनाने के व्यवसाय में शामिल थे। अब जब बीजेपी पाठ्यक्रम में सुधार कर रही है तो वे इसे भगवाकरण का नाम दे रहे हैं।

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