2019 लोकसभा चुनाव: हार्वर्ड प्रोफेसर स्टीव जार्डिंग होंगे राहुल गांधी के चुनावी रणनीतिकार

स्टीव जार्डिंग राहुल गांधी

वर्ष 2014 के आम चुनावों में महज 44 सीटों पर सिमटने वाली कांग्रेस इस बार चुनाव की तैयारियों में कोई भी लापरवाही नहीं बरतना चाहती है। यही वजह है कि अब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार स्टीव जार्डिंग 2019 लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और राहुल गांधी के प्रचार में मुख्य भूमिका निभाने के लिए जल्द ही भारत आ सकते हैं। वो आम जनता को कांग्रेस के साथ भावनात्मक तत्वों से जोड़ने की कोशिश करेंगे। स्टीव जार्डिंग अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन के चुनावी रणनीतिका भी रहे हैं जिसमें हिलेरी को हार मिली थी। अब राहुल गांधी के लिए स्टीव जार्डिंग की भूमिका चुनावी आकांक्षाओं पर कैसा असर डालेगी?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी ने अपने यूपोपियन देशों के दौरे के दौरान हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार स्टीव जार्डिंग से मुलकात की थी। इस मुलाकात में दोनों में ये सहमति बनी कि स्टीव आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के लिए रणनीतिकार की भूमिका निभाएंगे और वो सितंबर महीने से ही अपनी टीम के साथ काम शुरू कर सकते हैं। लंदन के सूत्रों का ये भी कहना है कि ये मुलाकात इतनी गुप्त थी कि इसमें शीर्ष कांग्रेसी नेता और मीडिया दोनों को ही इस दूर रखा गया था। हालांकि, अभी इस अनुबंध को लेकर दोनों के बीच अधिकारिक तौर पर हस्ताक्षकर नहीं हुए हैं लेकिन आने वाले दिनों में जल्द ही ये प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी।

स्टीव जार्डिंग हार्वर्ड केनेडी स्‍कूल में पब्लिक पॉलिसी पढ़ाते हैं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीव जार्डिंग 1980 के दशक से ही प्रचारक, प्रबंधक, राजनैतिक सलाहकार और रणनीतिकार रहे हैं। उनके पास राजनीतिक रणनीति बनाने का लगभग चार दशक का अनुभव है। वो अमेरिका में डेमोक्रेट्स के लिए चुनाव प्रबंधन और राजनीतिक सलाहकार रहे हैं। वो अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन के चुनावी कैंपेन के सलाहकार भी रहे हैं। इसके अलावा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने के लिए चुनावी रणनीतिकार स्टीव जार्डिंग की सेवाएं ली थी।

राहुल गांधी के लिए स्टीव को अपना राजनीतिक सलाहकार बनाने से कितना लाभ होगा ? गौरतलब है कि स्टीव ने जिन्हें भी अपनी सेवाएं दी हैं उन्होंने चुनाव में बुरी हार का सामना किया है। अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में वो हिलेरी क्लिंटन के चुनावी सलाहकार थे। इस चुनाव में हिलेरी को हार का मुंह देखना पड़ा था। भारत में उन्होंने समाजवादी पार्टी को 2017 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के में अपनी सेवाएं दी थी और इस चुनाव में अखिलेश यादव को हार का मुंह देखना पड़ा था। जहां पिछले विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने 403 सीटें जीतीं थी वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सिर्फ 54 सीटों से संतोष करना पड़ा था। ऐसे में जब राहुल गांधी ने आगामी लोकसभा चुनाव में स्टीव की सेवाएं लेने का फैसला किया है तो उनके लिए ये घाटे का सौदा हो सकता है। अमेरिका के विपरीत भारत में स्टीव के लिए कांग्रेस को आम जनता से जोड़ना इतना आसान नहीं होगा जैसा कि कांग्रेस पार्टी समझ रही है।

भारत की राजनीति में जातिवाद, धर्म और कई ऐसे कई मुद्दे हैं ऐसे में स्टीव के लिए यहां के राजनीतिक समीकरण को समझना इतना आसान नहीं होगा। यहां अपने जाति के नेता के प्रति वफादारी भी एक बड़ी चुनौती है। भारत में बहुदलीय प्रणाली बहु-दलीय पार्टी व्यवस्था है जिसमें छोटे क्षेत्रीय दल अधिक प्रबल हैं। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति, भ्रष्टाचार, घोटाले सामने आये हैं और हर चुनाव के साथ कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई है। कांग्रेस और राहुल गांधी की जो छवि बनी है वो समय के साथ और गहराती गयी है ऐसे में स्टीव के सामने मुश्किलें कम नहीं है। विधानसभा चुनाव में सपा की हार से स्पष्ट है कि वो उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझना और उसके मुताबिक चुनावी रणनीतियां तैयार करना बहुत मुश्किल होगा क्योंकि इस बार उन्हें कांग्रेस के लिए सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी रणनीतियां तैयार करनी होगी।

भारत अभी भी पूरी तरह से डिजिटल नहीं हुआ है यहां की आबादी का कुछ हिस्सा आज भी इंटरनेट से दूर है ऐसे में कांग्रेस के लिए इस मशहूर रणनीतिकार को नियुक्त करना फायदे का सौदा सबित नहीं होने वाला है। वैसे भी देश में राहुल गांधी की छवि उतनी मजबूत नहीं है अक्सर ही वो अपने भाषणों और झूठ की वजह से ट्रोल होते हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए संभावनाएं मजबूत करने की कोशिश में जिस तरह से रणनीतिकार के तौर पर प्रशांत किशोर नाकाम रहे थे उसी तरह वर्ष 2019 के आम चुनाव में भी प्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार स्टीव जार्डिंग भी नाकाम होने वाले हैं।

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