बागपत में 13 मुस्लिम लोगों ने अपनाया हिंदू धर्म

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एक मुस्लिम परिवार इंसाफ के लिए बार-बार न्याय का दरवाजा खटखटाता रहा न ही पुलिस ने और न ही उनके समुदाय के लोगों ने उनका साथ दिया। इस मुश्किल घड़ी में हिंदू युवा वाहिनी संगठन ने उनकी मदद की। ये संस्था हिंदुओं के कल्याण के लिए काम करता है और उनका भी स्वगत करता है जो हिंदू धर्म को अपनाना चाहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुस्लिम समाज से मिले धुत्कार के बाद उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के निवाड़ा गांव में रहने वाले इस मुस्लिम परिवार के 13 सदस्यों ने हिंदू धर्म अपना लिया।

हालांकि, पूर्व एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने धर्म परिवर्तन करने पर परिवार को पुन: विचार करने को कहा, लेकिन परिवार के सदस्य नहीं माने और कहा कि उन्होंने अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया है। उनके इस फैसले के बाद इन सभी ने हिंदू धर्म अपनाते हुए एसडीएम बड़ौत को शपथ पत्र सौंपे थे इसके बाद मंगलवार को 13 लोगों ने हवन पूजन में शामिल होकर अपना नामकरण संस्कार कराया।

ये मुस्लिम परिवार मुख्य रूप से बदरखा गांव से है जो कुछ महीने पहले बागपत के निवाड़ा गांव में रह रहा था और यहीं अख्तर अली और अब धर्म सिंह के 28 वर्षीय बेटे गुलहसन की 27 जुलाई को हत्या हो गई और शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था। इसकी तहरीर धर्म सिंह ने पुलिस में दी लेकिन पुलिस ने इस मामले को आत्महत्या का रूप दे दिया जिसके बाद इस परिवार ने ग्राम पंचायत से भी मदद की गुहार की वहां भी इन्हें निराशा मिली। उन्हीं के समुदाय के लोगों ने उनका साथ नहीं दिया। धर्म सिंह ने अपने बयान में कहा कि, “मेरे 28 वर्षीय बेटे की बागपत के निवाड़ा गांव में हत्या कर दी गयी थी और उसके शव को फंदे से लटका दिया गया जिससे ये आत्म हत्या नजर आये। मैंने कई बार पुलिस से मदद की गुहार की और कई बार अपने समुदाय के लोगों से अनुरोध किया कि हमारी इस मामले में मदद करें लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।” उन्होंने आगे कहा कि “निवाड़ा गांव में हमारे एक 22 साल के भाई की हत्या कर उसे लटका दिया गया था। इसके बाद सुबह कुछ लोग आए और कहने लगे कि इसकी हत्या तुमने ही की है। बचना है तो जल्दी से इसे दफनाओ। इसके बाद कब्र खोदकर दफनाने की तैयारी कर दी गयी थी। वहां करीब 3000 मुसलमान होंगे लेकिन किसी ने हमारा साथ नहीं दिया। जब किसी मुसलमान ने हमारा साथ ही नहीं दिया तो फिर हम इस समाज में रह कर क्या करें?” अपने साथ हुए अन्याय के बाद अख्तर अली ने हिंदू धर्म को अपनाने का फैसला किया जिसके बाद अख्तर अली का नाम बदलकर धर्म सिंह हो गया और उनके बेटे दिलशाद से दिलेर सिंह, नौशाद से नरेंद्र और इरशाद से कवि बन गए। इसके अलावा धर्म परिवर्तन करने वालों में इन इनकी पत्नियां, दो पोते और चार पोतियां भी शामिल है।

वो यही नहीं रुके उन्होंने अपने बयान में बताया कि कैसे एक हिंदू धर्म के लोग उनकी इस मामले में सहायता करने के लिए आगे आये। उन्होंने बताया, “हिंदू धर्म के लोग हमारी मदद कर रहे हैं। कोर्ट-कचहरी में भी ये सहायता कर रहे हैं। हमें कोई न्याय नहीं मिला। पोस्टमार्टम भी उल्टा सीधा करवाया गया। हत्या के मामले को अत्महत्या के रूप में चित्रित किया गया।” ये हिंदू संगठन हिंदू युवा वाहिनी है जिसके सदस्यों ने बिना कोई धर्म का अंतर देखे एक मुस्लिम परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे आये। वहीं, इस संगठन ने भी स्पष्ट किया कि,“किसी के साथ यदि मुस्लिम समाज में उत्पीड़न होता है तो हम अपने भाईयों को गले लगाने को तैयार हैं। पूरा साथ देने को तैयार हैं।”

ये घटना बताती है कि वास्तव में हिंदू धर्म क्या है। हिंदू धर्म वो है जो न्याय के लिए लड़ता है और व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म को हो वो आगे आकर उनकी मदद करता है क्योंकि उनके लिए देश भक्ति और नैतिक मूल्य अहम है। यही नहीं ये किसी पर हिंदू धर्म अपनाने के लिए दबाव नहीं डालता बल्कि कोई भी अपनी स्वेच्छा से इस धर्म को गले लगा सकता है। वास्तव में ये सराहनीय है कि कैसे एक हिंदू संगठन गुलसन के परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे आये लेकिन ये निंदनीय है कि इस धर्म परिवर्तन को भी कुछ लोग आम जनता को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। वो इसके जरिये ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी सरकार की कानून व्यवस्था सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करती है।

 

 

 

 

 

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