द वायर ने किया कादर खान को बदनाम करने का काम, एक बार फिर दिखी वायर की चीप पत्रकारिता

द वायर कादर खान

बॉलीवुड में ऐक्टिंग की चलती फिरती यूनिवर्सिटी कहे जाने वाले कादर खान का 1 जनवरी को कनाडा के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 81 साल के थे। पुराने जमाने के ऐक्टर्स से लेकर उन्हें जानने वाले नए जमाने के ऐक्टर्स तक उनके जाने से दुखी हैं। उनके निधन से पूरे बॉलीवुड और सिने प्रेमियों में शोक की लहर है। लोगों का कहना है कि, कादर खान खुद में ऐक्टिंग की यूनिवर्सिटी थे, इन्स्टीट्यूट थे। इस सब के बीच ‘द वायर’ ने एक बार फिर ऐसी रिपोर्ट छापी, जो सबको आहत कर गई। द वायर ने कादर खान जैसे शानदार ऐक्टर को ‘चीप’ ऐक्टर बताया है। द वायर की इस स्टोरी ने खान को पसंद करने वाले ढेरों प्रशंसकों को आहत किया है।

द वायर की मानें की मानें, तो कादर खान एक ‘चीप’ कलाकार थे, जिन्होंने 90 के दशक में गोविंदा और शक्ति कपूर के साथ दोयम दर्जे के टपोरी वाले रोल किये थे जिन्हें अब लोग भुला चूके है। अब ऐसे में द वायर से यह सवाल करते तो बनता ही है कि, अगर जनता खान को सच में भूल ही चुकी है, तो फिर The Wire जैसे ओछी मानसिकता के न्यूज़ पोर्टल को उनके बारे में लिखने की जरूरत ही क्यों आन पड़ी। दूसरी बात यह कि, अगर कोई कलाकार एक खलनायक का रोल अदा करता है तो ये उस कलाकार के अभिनय की काबिलियत ही होती है कि, लोग उसे विलन समझे। उसके किरदार से नफरत करे। लोग बताते हैं कि, 70 के दशक में दर्शक प्राण, प्रेम चोपड़ा और उसके बाद अमरीश पुरी के किरदारों से लोग इस कदर घृणा करते थे कि उस दौर में लोगो ने अपने बच्चों के नाम प्राण, प्रेम और अमरीश रखना तक बन्द कर दिया था। सही मायनों में एक असली कलाकार की काबिलियत की यह सबसे बड़ी पहचान और प्रमाण है।

बता दें कि, कादर खान एक बेहतरीन कलाकार थे। वो जिस भी किरदार को निभाते थे, उसे खुद में उतार लेते थे। वो करीब 3 दशक तक फिल्मों से जुड़े रहे। उन्होंने संवाद लेखन, खलनायक, कमेडियन, चरित्र अभिनेता जैसे तमाम तरह के रोल निभा लोगों का मनोरंजन किया। कादर खान ने ढेरों साक्षात्कार दिए। लेकिन द वायर को खान का केवल 2012 में दिया गया एक इंटरव्यू याद है।

दरअसल 2012 के एक इंटरव्यू में कादर खान ने कहा था कि, उन्हें अफसोस है कि, उन्होंने अमर अकबर अन्थोनी में अमिताभ बच्चन के कैरेक्टर अन्थोनी गोंजालविज़ के लिए टपोरी वाले डायलॉग लिखे। उन्हें इस बात का दुख था कि, वे बॉलीवुड में टपोरी वाली सड़कछाप भाषा लाए। बस, द वायर को कादर खान का वही इंटरव्यू याद है।

द वायर का मानना है कि, जब गोविंदा टाइप की फिल्मों का क्रेज़ खत्म हो गया तो कादर खान दुबई में जाकर सेटल हो गए। वायर ने बताया कि, खान ने 2012 में भारत वापस लौटने पर कुरान पर एक किताब लिखकर लोगों को बताया कि क्यों islam – religion of peace है। अंत में आते-आते  द वायर ने लिखा है कि, खान मानते थे कि, देश में अब साम्प्रदायिक सौहार्द नहीं रहा। स्थिति बद से बदतर हो गयी है। जबकि कादर खान ने कभी भी ऐसा कुछ भी कहा ही नहीं। द वायर ने केवल कादर खान के नाम पर अपनी टीआरपी बढ़ाने की कोशिश की है। इस कोशिश में द वायर भूल बैठा कि उसने ऐसी चीज लिखी है, जिसका कोई प्रमाण ही नहीं है।

बता दें कि, इससे पहले शाहरुख, आमिर, जावेद अख्तर और नसीरुद्दीन शाह जैसे लोगों ने जरूर ऐसी बात कही थी लेकिन कादर खान ने कभी भी ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। लेकिन द वायर ने इस बात को घुमा फिराकर कादर खान के लिए भी लिख डाला। बड़ी ही चालाकी से द वायर ने खुद को बचाते हुए आखिरी में लिखा कि उन्होंने (कादर खान) ऐसा ‘खुल कर’ तो नहीं कहा कभी। यानी ‘द वायर’ को बात वो भी पता चल गई, जो कादर खान ने कभी कही ही नहीं थी।

अंतः में हम कादर खान जैसे बड़े दिल वाले और जाने-माने कलाकार को श्रद्धांजलि देते हुए यही कहना चाहेंगे कि, ‘खान की एक्टिंग चीप’ नहीं थी। हां, द वायर की पीत पत्रकारिता जरूर चीप है। बता दें कि, यह पहली बार नहीं है, जब द वायर ने ऐसी ओछी हरकत की है। इससे पहले अटल जी जैसे महात्माओं की मृत्यु पर, जब पूरा देश रो रहा था, उस समय भी द वायर ने अपने एक शो में उनके बारे में ओछी टिप्पणी की थी, जिसे लेकर उसकी काफी थू-थू हुई थी।

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