दिल्ली जीतने की धुन में यूपी-बिहार के छात्रों के खिलाफ हो गए केजरीवाल

केजरीवाल दिल्ली

PC: Aaj tak

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए जब मुद्दे नहीं मिल रहे तो उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के मुद्दे को उठाया। जब इस मुद्दे से भी उन्हें कोई खास फर्क नजर नहीं आया तो वो आरक्षण का राग अलाप रहे हैं। इसके जरिये वो दिल्लीवासियों को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि ‘बाहरी राज्यों के लोग उनका हक मार रहे हैं।’ दिल्ली के मुखिया और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली वालों को नौकरी और शिक्षा में 85 फीसदी आरक्षण देने की बात कही। इस दौरान उन्होंने जोर देते हुए ये भी कहा कि सभी दिल्लीवालों को मिलकर पूर्ण राज्य की लड़ाई लड़नी होगी।

केजरीवाल ने पटपड़गंज विधानसभा के खिचड़ीपुर गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलता है तो दिल्ली के कॉलेजों में दिल्ली के बच्चों के लिए 85 फीसदी आरक्षण दिलाएंगे, सरकारी नौकरियों में 85 फीसदी आरक्षण दिलाएंगे। साथ ही दिल्ली की कानून-व्यवस्था को ठीक करेंगे। पूर्ण राज्य बनने पर हर कच्चे कर्मचारी को पक्का कराएंगे और दिल्ली के हर परिवार को अपना घर दिलाएंगे।‘ ऐसा लग रहा है केजरीवाल भी उन राजनीतिक पार्टियों की राह पर चल पड़े रहे हैं जो देश को एकजुट नहीं देखना चाहते।

केजरीवाल दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं जबकि वो भी इस सच से वाकिफ हैं कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि दिल्ली केंद्र प्रशासित राज्यों व अन्य राज्यों से अलग है। कुछ समय पहले संविधान के अनुच्छेद 239 और 239AA की व्याख्या को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच मतभेद था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले से केजरीवाल को फटकार लगाई थी। बता दें कि 239 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है जिनमें उनके अधिकार एवं सीमाएं वर्णित हैं। 13 फरवरी 1931 को दिल्ली को आधिकारिक तौर पर राजधानी घोषित किया गया था। आजादी के बाद साल 1956 में दिल्ली को यूनियन टेरिटरी यानी केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था और 1991 में 69वे संविधान संशोधन से दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश (NCT) का दर्जा प्राप्त हुआ तब इसके लिए विशेष तौर पर 239AA जोड़ा गया था। इस अनुच्छेद के तहत यहां उपराज्यपाल की नियुक्ति होती है जो केंद्र सरकार करती है और उपराज्यपाल व मंत्रिमंडल के सामंजस्य से यह प्रदेश चलता है। इस राज्य के पास अपना उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद होने के कारण ही 1991 में अर्द्ध-राज्य का दर्जा दिया गया था।  दिल्ली देश की राजधानी है और व देश के अन्य राज्यों से अलग है। यहां डीयू, जेएनयू, इग्नू, जामिया जैसे देश के बड़े विद्यालय हैं जहां देश के सभी छात्रों को अपनी शिक्षा पूरा करने का अधिकार है। यही नहीं दिल्ली से ही भारत सरकार बड़े फैसले लेती है और देश का नियंत्रण करती है। इन तथ्यों को जानते हुए भी केजरीवाल का इस तरह से यूपी-बिहार के लोगों के खिलाफ यहां की जनता भड़काना उनकी गंदी राजनीति को दर्शाता। 

जैसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यूपी-बिहार के लोगों पर नौकरी छीनने का आरोप लगाया था उसी तरह से केजरीवाल भी यही संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि बाहरी राज्य के लोग उनका हक मार रहे हैं। ऐसा लगता है केजरीवाल जानबूझकर दिल्ली की राजधानी की जनता में अन्य राज्यों के लोगों के प्रति नफरत का बीज बोने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि सच तो ये है कि खुद केजरीवाल दिल्ली के नहीं हैं। उनका जन्म हरियाणा स्थित भिवानी में हुआ था। इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल में पढ़ाई की। इसके बाद झारखंड के जमशेदपुर में नौकरी की। राजनीति दिल्ली से कर रहे हैं। दिल्ली से न होने के बावजूद वो दिल्ली के मुख्यमंत्री का सुख भोग रहे हैं। ऐसे तो वो भी ‘बाहरी राज्यों के लोग उनका हक मार रहे हैं।’ फिर भी शर्मनाक तरीके से वो यहां की जनता को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।

वैसे केजरीवाल पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने देश के एक राज्य के लोगों को दूसरे राज्य के खिलाफ भड़काने का काम किया हो। इससे पहले भी कईं ऐसे बयान सामने आ चुके हैं।

असम में बिहारियों, झारखंडियों की हत्या, पंजाब या कश्मीर में बिहारियों के दुर्व्यवहार। हाल ही में गुजरात में कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर द्वारा यूपी-बिहार के खिलाफ भड़काऊ बयान देना भी इसमें शामिल है। महाराष्ट्र में भी यूपी-बिहार के लोगों के साथ किया गया भेदभाव कई बार सुर्खियों में रहा है। दक्षिण के राज्यों का उत्तर-भारत के राज्यों के प्रति नफरत की भावना जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। किस तरह से कुछ दल अपने राजनीतिक हित को साधने, सत्ता का सुख भोगने, पैसे कमाने और अपने परिवार को उतराधिकार बनाने के लिए जानबूझकर देश के राज्यों बीच नफरत पैदा करते हैं। ऐसा लगता है देशहित से ऊपर उठकर ये राजनीतिक दल चरित्र की राजनीति, जाति, धर्म, समुदाय, क्षेत्र की राजनीति करते हैं। वो अब मुद्दे जानबूझकर बना रहे हैं और नफरत को बढ़ावा दे रहे हैं। केजरीवाल भी यही कर रहे हैं। आम जनता की पार्टी का राग अलाप कर देश की राजनीति में अपनी पकड़ को मजबूत करने वाले केजरीवाल अब झूठ की राजनीति के बाद देश को बांटने की राजनीति, नफरत की राजनीति करने में व्यस्त हो गये हैं।

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