बजट 2019 में एविएशन सेक्टर के लिए बड़ी घोषणा, बढ़ी एफडीआई सीमा

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए एविएशन सेक्टर में शत प्रतिशत एफ़डीआई करने पर विचार करने की बात कही। वित्त मंत्री ने बताया कि एविएशन, मीडिया, बीमा और सिंगल ब्रांड रिटेल सेक्टर में एफ़डीआई सीमा बढ़ाने का फैसला कर सकती है। बता दें कि अभी अनुसूचित वायु यात्रा सेवा और अनुसूचित घरेलू और क्षेत्रीय यात्री एयरलाइन क्षेत्र को छोड़कर एविएशन सेक्टर के सभी क्षेत्रों में शत प्रतिशत एफ़डीआई को मंजूरी मिली हुई है। सरकार ने बताया है कि इस क्षेत्र में भी 100 प्रतिशत एफ़डीआई को मंजूरी देने का फैसला लिया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारतीय एविएशन बाज़ार में एयरलाइन कंपनी के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिसका सीधा फायदा भारतीय ग्राहकों को पहुंचेंगा। इसका मतलब ग्राहकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी और वो भी सस्ते दरों पर।

इसके अलावा सरकार एविएशन सेक्टर को और ज़्यादा स्वतंत्र बनाने के लिए एयरक्राफ्ट फ़ाइनेंस और लीज़िंग सेवा को भी प्रोमोट करेगी। फाइनेंस और लीज़िंग सेवा के तहत कोई भी कंपनी इक्विटि और ऋण के आधार पर नए एयरक्राफ्ट खरीदती है और फिर इन एयरक्राफ्ट्स को वह कंपनी लीज़ पर देती है। भारतीय एविएशन सेक्टर अभी महंगे टरबाइन फ्युल, खराब इनफ्रास्ट्रक्चर और छोटे शहरों के लिए फ्लाइट्स में कम ग्राहकों की समस्या से जूझ रहा है। इसी की वजह से जेट एयरवेज और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जेट एयरवेज की हालत को इतनी खराब है कि उसने अभी अपनी सभी ऑपरेशन को अस्थायी तौर पर रोक दिया है। अब अगर सरकार अनुसूचित घरेलू यात्री एयरलाइन क्षेत्र में भी शत प्रतिशत एफ़डीआई को मंजूरी देती है तो जेट एयरवेज को खरीददार मिलने में आसानी हो सकती है। इसके अलावा भारत सरकार एयर इंडिया में भी 100 प्रतिशत विनिवेशिकरण करने की योजना बना रही है।

भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन बाज़ार है और भविष्य में इस सेक्टर में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हालांकि, अभी यह सेक्टर अपने बुरे दौर से गुजर रहा है। भारत सरकार के इस कदम से इस सेक्टर की चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

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