मालदीव और श्रीलंका में फजीहत के बाद पाकिस्तान की यूगांडा में हुई घनघोर बेइज्जती

पाकिस्तान

PC: India Today

मंच  कोई भी हो, भारत ने पिछले कई महीनों से पाकिस्तान के कश्मीर पर भ्रामक प्रोपगैंडा को ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कई अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को अनावश्यक तूल देता आया है। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत ने एक बार फिर यूगांडा के राजधानी कंपाला में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के दुष्प्रचार की धज्जियां उड़ा दी, जहां  पाकिस्तान कश्मीर पर एक बार फिर दुष्प्रचार करने में लगा हुआ था।

लोक सभा सचिवालय द्वारा जारी किए आधिकारिक बयान के अनुसार इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के संसदीय डेलीगेशन ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उछालते हुये कहा कि ‘भारतीय सेना ने कश्मीर पर कब्जा कर लिया है” ये निस्संदेह काफी हास्यास्पद है, क्योंकि पाकिस्तान को स्वयं उसका सैन्य प्रशासन ही चलाता है, भले ही वो आधिकारिक तौर पर एक लोकतन्त्र होने का दावा करता हो।

परंतु यहाँ भी पाकिस्तान का झूठ ज़्यादा देर नहीं टिक सका। भारतीय डेलीगेशन की सदस्य और भाजपा  सांसद रूपा गांगुली ने पाकिस्तान का झूठ उजागर करते हुये बताया कि पाक तो स्वयं सैन्य प्रशासन की गिरफ्त में और 33 वर्षों तक सैन्य शासन की गिरफ्त में भी रहा है। उन्होने ये भी स्पष्ट कर दिया कि भारत में सैन्य शासन जैसी कोई चीज़ नहीं हुई है। 29 सितंबर को समाप्त हुये संसदीय कॉन्फ्रेंस में भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के नेतृत्व में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी, राज्य सभा सांसद रूपा गांगुली एवं एल हनुमंथैया, अपराजिता सारंगी और लोकसभा की सेक्रेटरी जनरल स्नेहलता श्रीवास्तव उपस्थित थी।

इससे पहले इसी महीने पाक की कुछ इसी तरह मालदीव में हुये चौथे दक्षिण एशियाई स्पीकर्स सम्मिट में फजीहत हुई थी। सम्मिट में इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी, इसके बावजूद पाक ने कश्मीर का मुद्दा उठाया। सम्मिट के दौरान पाकिस्तानी प्रतिनधि कासिम सूरी ने कहा ‘हम कश्मीरियों पर हो रहे अत्याचारों को अनदेखा नहीं कर सकते”। इसपर भारत और पाक के प्रतिनिधियों में झड़प तक हो गयी। राज्य सभा के उपाध्यक्ष हरिवंश नारायण सिंह [जो इस सम्मिट में ओम बिड़ला के साथ आए थे] ने कहा, “हम इस फॉरम के राजनीतिकरण का पुरजोर विरोध करते हैं”। उन्होने आगे यह भी कहा, “पाकिस्तान को आवश्यकता है कि वे सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करे और शांति और स्थिरता पर काम करे। आतंकवाद आज मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है ”।

मालदीव में हुई फजीहत कम थी कि पाकिस्तान ने यही मुद्दा एक बार फिर कन्वेंशन ऑफ द राइट्स ऑफ द चाइल्ड के 30वें वर्षगांठ पर भी उठाया। यहाँ भी भारतीय डेलीगेशन ने पाकिस्तान के दुष्प्रचार का पुरजोर जवाब दिया। जब पाक ने दुष्प्रचार बंद नहीं किया, तो भारतीय डेलीगेशन के हिस्सा रहे सांसद गौरव गोगोई ने जवाब दिया कि पाकिस्तान पहले अपने मानवाधिकार उल्लंघनों पर ध्यान दे, फिर भारत के बारे में कुछ बोले।

पाकिस्तान के कश्मीर मुद्दे को हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सामने लाने की नीति पूरी तरह फेल सिद्ध हुई है। इमरान खान की सरकार ने इसे हर मंच पर उठाया, पर किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके कारण पाक को कूटनीतिक स्तर पर काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। भारत के आंतरिक मामलों का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तानी सोच ने उनके अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों में बची खुची विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा दिये हैं।

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