पंजाब, नशा और मौत- युवाओं का बर्बाद होता भविष्य और खामोश अमरिंदर सरकार, कब तक?

पंजाब

भारत युवाओं का देश है और पूरी जनसंख्या में लगभग 65 प्रतिशत युवाओं की आबादी है। एक ओर जहां विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश होना हमारे लिए गर्व की बात है तो वहीं दूसरी ओर बहुसंख्यक युवा आबादी के एक बड़े तबके का नशे में डूब जाना चिंता का विषय है। इसकी चपेट में आने वाला हर युवा आज बर्बाद हो रहा है। व्यापक स्तर पर युवाओं में फैलती ड्रग और नशाखोरी देश की मुख्य समस्याओं में से एक है। लेकिन हमारे कुछ राज्य ऐसे हैं जहां यह समस्या हद पार कर चुकी है। पंजाब इन्हीं राज्यों में अव्वल नंबर पर आता है। वर्ष 2017 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने वादा किया था कि अगर वे चुनाव जीत जाते हैं तो राज्य में नशाखोरी पूरी तरह से समाप्त कर देंगे। स्थिति यह है कि कांग्रेस को सत्ता में आए आज तीन साल होने वाले हैं लेकिन पंजाब की हालत पहले से भी दयनीय होती जा रही है।

पंजाब में ड्रग्स की समस्या इतनी बढ़ चुकी है कि आए दिन अखबारों में ड्रग्स की खबरें कहीं न कहीं दिख ही जाती हैं। ड्रग समस्या और ड्रग माफिया न सिर्फ युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं बल्कि जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों की भी हत्या कर दे रहे हैं। नशा कारोबारी के खिलाफ की गयी कारवाई के कारण ही 29 मार्च को मोहाली में एक ड्रग इंस्पेक्टर नेहा शौरी को जान से हाथ धोना पड़ा था। पंजाब पुलिस का कहना है कि 2009 में प्रतिबंधित दवाएँ बेचने के कारण मेडिकल स्टोर का लाइसेंस नेहा शौरी ने कैंसल कर दिया था जिसके बाद कातिल बलविंदर ने उनकी हत्या की साजिश रची थी। 29 मार्च को जब नेहा खरड़ स्थित अपने दफ्तर में काम कर रही थीं तो आरोपी बलविंदर सिंह ने सुबह 11 बजकर 40 मिनट में उनके कार्यालय में घुसकर .32 बोर लाइसेंसी रिवॉल्वर से तीन गोलियां मारकर उनकी हत्या कर दी थी।

पंजाब में नकली दवाईयों और ड्रग इंडस्ट्री में जितना भ्रष्टाचार है, शायद उतना आज राजनीति में भी नहीं है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें ड्रग्स तस्कर के घर पर रेड मारने गई पुलिस की टीम पर लोगों ने हमला कर दिया था। इस दौरान घर पर मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस टीम के जवानों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

इसी तरह पंजाब के अमृतसर से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई थी।  यहां एक मां अपनी बेटी की नशे की आदत से इस कदर मजबूर हुई कि उसने उसे जंजीर से ही बांध दिया। महिला की मानें तो उसने बेटी के पैरों में जंजीर बांधने का फैसला तब किया जब उसे सरकार की तरफ से चलाए जा रहे नशा मुक्ति केंद्र से कोई मदद नहीं मिली।

वहीं दिल्ली की एम्स ने पंजाब में होने वाले नशाखोरी का अनुमान लगाने के लिए 2015 में पहला व्यापक अध्ययन किया और उस रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकला कि राज्य में 200,000 से अधिक युवा ड्रग्स और नशीले पदार्थों से ग्रसित थे। विभिन्न सरकारी विभागों के डेटा से पता चलता है कि हाल के कुछ वर्षों में समस्या ज्यादा बढ़ गई है। जिसका श्रेय सीमा पार से होने वाली लगातार तस्करी को जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2018 की शुरुआत से अक्टूबर तक 303 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। वहीं जनवरी से दिसंबर 2017 तक केवल 191 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। पिछले ही साल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 12 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की साढ़े तीन किलो हेरोइन के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा था की ड्रग्स की ये खेप पाकिस्तान से अफगानिस्तान होते हुए भारत आई थी। दिल्ली से ये ड्रग्स पंजाब में सप्लाई होनी थी। ड्रग्स की इस खेप के साथ पकड़े गए दोनो आरोपी रविशंकर और विकास ड्रग्स सिंडिकेट के बड़े नाम बताए जा रहे थे।

बीबीसी के आंकड़ों के अनुसार जनवरी और जून 2018 के बीच पंजाब में नशीली दवाओं के दुरुपयोग से 60 मौतें हुईं। जबकि 2017 में ड्रग संबंधित घटनाओं में कुल 30 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2016 और 2017 में एनडीपीएस अधिनियम (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances ) के तहत अपराधियों के खिलाफ कुल 18,215 प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अप्रैल 2017 से अब तक दर्ज की गई एफआईआर की संख्या 23,869 तक पहुंच गई है। सूबे के सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2016 के एक आंकड़े के अनुसार पंजाब के गांवो में करीब 67 फीसद घर ऐसे हैं, जहां कम से कम एक व्यक्ति नशे की चपेट में है। पंजाब का दुष्प्रभाव उसके पड़ोसी राज्य हरियाणा पर भी पड़ा है। नशारुपी चिड़िया पंजाब से उड़ती हुई अब हरियाणा और शेष भारत में भी अपना घोंसला बना रही है।

एक और मुद्दा राज्य में परेशानी का कारण बना है और वो है ड्रग मामलों में मिलने वाले बेल की उच्च संख्या। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग मामलों के तीन से अधिक आरोपी हर दिन जमानत पर बाहर निकलते हैं। इसी वजह से यह कानून ठीक ढंग से अपना काम नहीं कर पा रहा है। अब राज्य सरकार को इस गंभीर मुद्दे का हल ढूंढना होगा।

कांग्रेस ने सत्ता में आने के चार हफ्तों के भीतर राज्य में ड्रग्स समस्या का सफाया करने का वादा किया था। लेकिन अभी तक राज्य में कोई भी सुधार नजर नहीं आ रहा है। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 16 मार्च, 2017 को पदभार ग्रहण किया था और वे अपने कार्यकाल खत्म होने के आधे रास्ते पर हैं। अभी तक के सफर को देखें तो यही समझ में आता है कि राज्य में इन्होंने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जिससे युवाओं को नशे की चपेट से बचाया जा सके। फिलहाल उन्हें राज्य में नशाखोरी रोकने के लिए और बेहतर शासन व्यवस्था करने होंगे, ड्रग माफियाओं का साम्राज्य पूरी तरह से ध्वस्त करना होगा। तभी पंजाब से नशाखोरी का धब्बा हट पाएगा और युवाओं को भी नशाखोरी से बचाया जा सकेगा।

Exit mobile version