‘पांच ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ के सपने को पूरा करने में मदद करेगी महाराष्ट्र

महाराष्ट्र

PC: ngpnews

इस साल स्वतन्त्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी ने ऐलान किया था कि उनका लक्ष्य वर्ष 2024 तक देश को 5 ट्रिलियन इकॉनमी बनाना है। पीएम मोदी ने कहा था कि इसके लिए वे अपनी आर्थिक नीति में बड़े स्तर पर बदलाव लाएंगे और देश को एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में कदम उठाएंगे। हालांकि, जब वित्त वर्ष 2019-20 के पहले क्वार्टर के जीडीपी के आंकड़ों को जारी किया गया, तो विपक्ष पीएम मोदी पर हमलावर हो गया। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 5 प्रतिशत तक गिर गई जिसके बाद सरकार ने इस आंशिक मंदी से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार के कदमों का असर हमें मार्केट पर भी देखने को मिला और बीते शुक्रवार को दोपहर दो बजकर 20 मिनट पर BSE सेंसेक्स ने 2,280 अंकों तक की उछाल हासिल कर ली।

देश को 5 ट्रिलियन इकोनोमी बनाने का सपना कोई दूर की कौड़ी नहीं है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अकेले महाराष्ट्र ने वर्ष 2025 तक अपने आप को 1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है। अगर महराष्ट्र अपना लक्ष्य पूरा करने में सफल होता है और भारत के अन्य राज्य भी अच्छी-ख़ासी रफ्तार से विकास करते रहें, तो 5 ट्रिलियन इकोनोमी बनने का भारत का सपना सच हो सकता है।

अभी जीडीपी के आधार पर महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा राज्य है। महाराष्ट्र की जीडीपी अभी लगभग 30 लाख करोड़ रुपये है और वर्ष 2017-18 में राज्य की जीडीपी में 10.2 प्रतिशत की दर से विकास हुआ। 30 लाख करोड़ रुपये का मतलब है 430 बिलियन डॉलर। महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2025 तक इसे 1000 बिलियन डॉलर यानि 1 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। पिछले 5 वर्षों के दौरान महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने राज्य में जमकर विकास किया है और यही कारण है कि राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है, और अगर फडणवीस राज्य में दोबारा मुख्यमंत्री बनते हैं तो इस बात के अनुमान काफी बढ़ जाएंगे की राज्य अपने टार्गेट को पूरा करने में सफल हो जाएगा।

सबसे पहले बात हम राज्य में कृषि की करते हैं क्योंकि राज्य की लगभग 65 प्रतिशत वर्कफोर्स को कृषि क्षेत्र ही रोजगार प्रदान करता है। राज्य में अक्सर ही सूखे की समस्या देखने को मिलती है जिसका सबसे ज़्यादा बुरा असर किसानों पर ही पड़ता है। महाराष्ट्र लंबे समय से सूखे से पीड़ित राज्य रहा है और देश में सबसे सूखे राज्यों में से एक है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा शुरू किए गए जलयुक्त शिवार अभियान ने विदर्भ और मराठवाड़ा के सूखे-प्रभावित इलाकों के किसानों को काफी राहत पहुंचायी है। देवेन्द्र फडणवीस ने वर्ष 2015 में गणतन्त्र दिवस के मौके पर राज्य में जलयुक्त शिवार अभियान की शुरुआत की थी, जिसका मकसद साल 2019 तक राज्य को सूखा रहित बनाना था। अब चार वर्षों बाद इस अभियान ने जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी शुरू कर दिया है। उदाहरण के तौर पर पिछले वर्ष गर्मी के मौसम के चार महीनों में 12000 गांवों को पानी के लिए सिर्फ 152 टैंकरों की आवश्यकता पड़ी थी। आश्चर्य की बात यह है कि पहले यह सभी गांव पूरी तरह से टैंकर के पानी पर ही निर्भर रहते थे। जहां वर्ष 2011 में 379 टैंकरों की आवश्यकता पड़ती थी वहीं 2017 में ये संख्या 366 हो गई थी, और वर्ष 2018 आते-आते इस संख्या में बड़ी कमी देखने को मिली। जल संरक्षण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, “कुल 16521 गांवों में जलयुक्त शिवार का काम शुरू किया गया, और इन गांवों में कुल परियोजना की लागत 4.98 लाख की थीं।” संरक्षण योजना पर खर्च किया गया पैसा सरकार के अलावा लोगों से भी लिया गया है। पिछले तीन वर्षों से परियोजना में सार्वजनिक योगदान 630.62 करोड़ रुपये का था। यानि फड़णवीस सरकार ने राज्य को सबसे बड़ी मुसीबत से राहत दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई और आने वाले सालों में इस दिशा में और काम होने की आशा है। महाराष्ट्र की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान 15 प्रतिशत है, ऐसे में अपने जीडीपी के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए इस सेक्टर का विकास ज़रूरी है और फड़णवीस सरकार ने इस बात को समझा भी है।

किसी भी राज्य के विकास के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है निवेश। ज़ो राज्य सबसे ज़्यादा निवेश जुटाने में सफल हो पाता है, उसी राज्य में ज्यादा फैक्ट्रीज़ लगती हैं  और लोगों को रोजगार मिलता है। कमाल की बात यह है कि महाराष्ट्र इस मामले में भी उम्मीदों पर खरा उतरा है। अभी इसी वर्ष जुलाई में खबर आई थी कि रूस की कंपनी नोवोलिपस्टेक स्टील महाराष्ट्र में दो चरणों में वर्ष 2022 तक 6,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। राज्य सरकार ने यह जानकारी देते हुए तब कहा था कि रूस की कंपनी महाराष्ट्र में अपना पहला संयंत्र लगाना चाहती है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि राज्य सरकार रूस की कंपनी को अपना संयंत्र लगाने के लिए पूरा सहयोग उपलब्ध कराएगी। साफ है कि यदि सरकार विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देगी तो निवेशक अवश्य राज्य का रुख करेंगे और राज्य के विकास को बल मिलेगा।

राज्य को तेज विकास करने के लिए अच्छे इनफ्रास्ट्रक्चर की भी ज़रूरत होती है। बिना अच्छे इनफ्रास्ट्रक्चर के विकास की कल्पना करना बेतुका ही कहा जाएगा। अच्छी बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के इनफ्रास्ट्रक्चर को और ज़्यादा विकसित करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। फडणवीस सरकार ने इसी वर्ष जुलाई में मुंबई और पुणे के बीच परिवहन के लिए हाइपरलूप परिवहन परियोजना को हरी झंडी दिखाई थी। यह दुनिया में पहली बार है, जब किसी सरकार ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए हाइपरलूप टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के लिए स्वीकृति दी थी। हाइपरलूप तैयार होने के बाद मुंबई-पुणे का सफर महज 35 मिनट में तय हो सकेगा। अभी सड़कमार्ग से यह दूरी साढ़े तीन घंटे में पूरी होती है।

जैसा हमने आपको बताया कि महाराष्ट्र की GDP वर्ष 2018 में 430 बिलियन यूएस डॉलर थी, और इसी के साथ पिछले कुछ सालों में राज्य ने 10 प्रतिशत की दर से विकास किया है। ऐसे में अगर राज्य अगले 5-6 सालों में इसी दर से विकास करता रहा तो राज्य जीडीपी के अपने लक्ष्य को अवश्य ही प्राप्त कर लेगा। अगर महाराष्ट्र 1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनने का लक्ष्य पूरा करता है तो भारत के लिए 5 ट्रिलयन डॉलर का लक्ष्य प्राप्त करना इतना मुश्किल नहीं रह जाएगा। हालांकि, इसके लिए जहां केंद्र में पीएम मोदी जैसा सफल और काबिल नेतृत्व चाहिए तो वहीं राज्य में भी देवेन्द्र फडणवीस जैसे सक्षम नेता की ज़रूरत है। केंद्र की सत्ता पर तो पीएम मोदी विराजमान है लेकिन महाराष्ट्र में अभी चुनाव होने हैं। अब अगर फड़णवीस दोबारा मुख्यमंत्री बनने का मौका हासिल करते हैं तो भारत महाराष्ट्र के जरिये अवश्य ही अपने 5 ट्रिलियन इकॉनमी वाले सपने को साकार करेगा।

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