तेलंगाना में रोहिंग्याओं के कारण दुर्गम चेरुवु झील के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

रोहिंग्या

PC: The Hindu

रोहिंग्या देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए ही खतरा नहीं हैं बल्कि देश में मौजूद सीमित संसाधनों के लिए भी बड़ा खतरा हैं। इसका ताजा उदाहरण तेलंगाना में देखने को मिल रहा है जहां रोहिंग्या हैदराबाद में एक महत्वपूर्ण झील के लिए खतरे की घंटी बनकर उभरे हैं। हैदराबाद के दुर्गम चेरुवु झील के किनारे रोहिंग्याओं का अतिक्रमण बढ़ रहा है और जल्द ही इसे नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में इस झील के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगेगा।

इस मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रधान मंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने तेलंगाना सरकार से दुर्गम चेरुवु झील के किनारे बढ़ते रोहिंग्याओं के अतिक्रमण की जांच करने के लिए कहा है और ‘उचित कार्रवाई’ करने के निर्देश दिए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद शहर के बालापुर क्षेत्र में झील का 70 प्रतिशत भाग शहरी विकास परियोजना के तहत नीदरलैंड की सरकार को संरक्षण के लिए दिया गया है। परन्तु इस मामले में सोसायटी ऑफ सेव वाटर के एक कार्यकर्त्ता का कहना है कि इस क्षेत्र में रोहिंग्याओं का अतिक्रमण बढ़ रहा है और इसे जल्द ही नहीं रोका गया तो इस झील के अस्तित्व के लिए ये बड़ा खतरा साबित होने वाला है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, हैदराबाद शहर के बालापुर और सहीननगर में शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त (UNHCR) द्वारा लगाए गए दो अलग-अलग शिविरों में लगभग 5,000 रोहिंग्या मुसलमान रहते हैं। अब इनकी आबादी जैसे-जैसे बढ़ रही है वो इस क्षेत्र में फैलते जा रहे हैं और झील के किनारे अब झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। इसमें उनकी मदद स्थानीय राजनेता ही कर रहे हैं। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए उप्पल के निवासी के.श्रीकांत ने पीएमओ में शिकायत की थी। श्रीकांत ने शिकायत के साथ रोहिंग्या शरणार्थियों द्वारा अतिक्रमण के संबंध में दायर किये गये FIR की एक कॉपी संलग्न की थी। सोसायटी ऑफ सेव वाटर के कार्यकर्त्ता श्रीकांत ने बताया कि कैसे नीदरलैंड सरकार द्वारा झील संरक्षण का काम सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। श्रीकांत ने यह भी बताया कि अतिक्रमण करने वाले झोपड़ियों को किराये पर भी दे रहे है। 26 अप्रैल, 2019 को पुलिस में मामला दर्ज कराने वाले बालापुर मंडल के तहसीलदार के चंद्रशेखर गौड़ ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि रेवेन्यू इंस्पेक्टर ने जमीनी स्तर का निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा, “झील हैदराबाद राजस्व जिला क्षेत्राधिकार में आती है और झील में कथित अतिक्रमण हैं।”

उन्होंने बताया, “हमने अप्रैल 2019 में कुछ अतिक्रमण हटाए, लेकिन फिर से नए अतिक्रमण सामने आये हैं। FIR  में यह भी बताया गया है कि कैसे ये अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या शरणार्थी झील को पत्थर के टुकड़ों से भर रहे है”। स्थानीय राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों ने एक चारदीवारी का निर्माण किया है और रोहिंग्या शरणार्थियों को किराये के लिए क्षेत्र दिया है। अब राजस्व और पुलिस विभाग दोनों मामले की जांच कर रहे हैं। बालापुर पुलिस ने कहा कि वे राजस्व विभाग की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे है।

बता दें कि गुर्रम चेरुवु एक मीठे पानी की झील है। हैदराबाद शहर के पास स्थित यह झील 83 एकड़ यानि 34 हेक्टेयर में फैली हुई है। इस झील को ‘सीक्रेट लेक’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह जुबली हिल्स और माधापुर के इलाकों के बीच छिपी हुई है। ये वहां के निवासियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत भी है। कहा जाता है कि मूल रूप से 150 एकड़ में फैले दुर्गम चेरुव को कुतुब शाही राजाओं द्वारा 1518 से 1687 के बीच गोलकुंडा किले के निवासियों के लिए पानी की आपूर्ति के लिए बनाया गया था।

इसके बाद वर्ष 2002 में, यह टुरिस्ट स्पॉट बन गया तथा इसे विकसित किया जाने लगा। विभिन्न सौंदर्यीकरण चरणों के एक हिस्से के रूप में, झील के आसपास के क्षेत्र को रोशन किया गया था, कृत्रिम झरने, एक रॉक गार्डन और एक तैरता फव्वारा जोड़ा गया था। यह एक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है। इस झील के पानी को सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट से साफ कर कई पार्क में पानी सप्लाई की जाती है।

हालांकि, लगातार हुए अतिक्रमण से झील का आकार लगातार घट रहा है। अगर राज्य सरकार ने रोहिंग्या के बढ़ते अतिक्रमण को नहीं रोका तब वह दिन दूर नहीं जब पूरे झील पर सिर्फ इन रोहिंग्याओं का ही कब्जा होगा।

बता दें कि आंतरिक सुरक्षा के लिए पहले ही ये रोहिंग्या देश के लिए बड़ा खतरा है और यही कारण है कि केंद्र सरकार इन्हें देश से बाहर करने के लिए प्रयास कर रही है लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों के खिलाफ कोई भी सख्त कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।  कुछ नेता अपने राजनीतिक फायदे के लिए रोहिंग्या के समर्थन में अपनी आवाज उठाते रहे हैं और रोहिंग्याओं के समर्थन में उतरे हैं। तेलंगाना में भी यही हो रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी यही देखने को मिला था जब करीब 190 संदिग्ध रोहिंग्यओं के नाम तेलंगाना की वोटर लिस्ट में मिले थे। और अब हैदराबाद के दुर्गम चेरुवु झील के किनारे बढ़ता इनका अतिक्रमण भी यही दर्शा रहा है। हालांकि, अब जब प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उचित कारवाई करने का निर्देश दे दिया है तो राज्य सरकार को बिना देर किए ही कारवाई करनी चाहिए।

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