अबकी बार गीदड़ भभकी मत दिखाना चीन! वरना भारतीय सेना फुल मूड में है, तैयारी भी कर ली है

चीन

PC: dainikbhaskar

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आर्मी उत्तराखंड राज्य में चीन की सीमा से सटे क्षेत्रों में एयरफील्ड बना रही है, जिससे इन क्षेत्रों तक सेना की आवाजाही में कोई समस्या न हो। इस रिपोर्ट में आगे बताया गया है चीन से सटे इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने, इनफ्रास्ट्रक्चर और टेलिकॉम सेवाओं को मजबूत करने में सेना और वायु सेना उत्तराखंड सरकार को हर तरीके से मदद मुहैया कराएगी।

सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के अनुसार, ‘’हाल ही में मेरी मुलाकात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से हुई, उन्होंने कहा कि चीन सीमा से सटे इलाकों में एडवांस लैंडिंग ग्राउंड या एयरफील्ड बनाए जाने चाहिए। इस पर मैंने कहा कि सेना इस पर काम कर रही है।‘’

बता दें कि ये निर्णय तब आया है जब भारत चीन से अपने सीमा विवादों को निपटाने के लिए अनेक प्रयास कर रहा है। चूंकि चीन इस समस्या के निवारण में आनाकानी कर रहा है, इसलिए इन एयरफील्ड के निर्माण को भारत की ओर से इस समस्या के निवारण के तौर पर देखा जा रहा है।

एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स या एएलजी छोटे पर सामरिक कॉम्बैट एयरफील्ड हैं, जो फाइटर एयरक्राफ्ट की ऑपरेशनल रेंज को बढ़ाते हैं। एएलजी कई काम एक साथ करने में सक्षम है, जैसे- ईंधन, राशन, गोला बारूद की आपूर्ति कराना इसके साथ ही इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप्स प्रदान करना, फाइटर प्लेन्स के लिए रीफ़्यूलिंग एवं रीआर्मिंग की व्यवस्था देना इत्यादि। इल्यूशीन 78 मिड एयर की सुविधा के साथ फाइटर जेट को इन एएलजी पर अक्सर लैंड करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि उन्हें बीच हवा में ही रीफ़्यूल किया जा सकता है।

जबसे मोदी सरकार सत्ता में आई है, तभी से चीन की सीमा के पास एएलजी के निर्माण के लिए अपने प्रयासों में जोर दे रही है। वर्ष 2013 में चीन ने तिब्बत में कई एयर बेस का निर्माण किया था। इसके बाद ही तत्कालीन यूपीए सरकार को एएलजी बनाने की सुध आई। अरुणाचल प्रदेश में द्वितीय विश्व युद्ध के समय अंग्रेजों ने सात एएलजी का निर्माण किया था, परंतु कुशासन के चलते ये लगभग निष्क्रिय हो चुके थे। कुछ पर तो कब्जा होना प्रारम्भ हो गया था। ये एएलजी वालोंग, विजयनगर, तुटिंग, पासीघाट, ज़ीरो, आलो एवं मेचुका में स्थित थे। यूपीए को केवल इन्हें अपग्रेड कराना था, पर उनसे वो भी न हो सका।

पर मोदी सरकार के आते ही इन सातों एएलजी को सक्रिय करने में ज़रा भी समय नहीं लगा। इसके अलावा सात अन्य एएलजी का निर्माण अभी जारी है। विजयनगर का एएलजी अभी हाल ही में पुनः सक्रिय हुआ है, क्योंकि इस वर्ष सितंबर में एक एएन 32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की लैंडिंग हुई है

इसी वर्ष के प्रारम्भ आईएएफ़ ने सिक्किम के पाक्योंग हवाई अड्डे पर अपनी एएन 32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की लैंडिंग भी कराई थी। पाक्योंग एयरपोर्ट तिब्बत के सीमा क्षेत्र से केवल 60 किलोमीटर दूर है। इसे भारत द्वारा पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृष्टि से देखा जा रहा है।

मोदी सरकार चीन की सीमा पर अपनी रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एएलजी के निर्माण पर ज़ोर देता रहा है। ऐसे में एएलजी के अपग्रेडेशन एवं निर्माण से न सिर्फ भारतीय वायुसेना को बल मिलेगा, बल्कि युद्ध की स्थिति में ये फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एवं हेलिकॉप्टर्स की रक्षा करने में भी सक्षम है। यह एएलजी बार्डर पर त्वरित लामबंदी एवं घायलों के इवैक्यूएशन में भी सहायता करेगी। शायद यही कारण है कि मोदी सरकार भारत-चीन बॉर्डर पर एएलजी के निर्माण में तेजी को बढ़ावा दे रही है।

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