अयोध्या फैसले के साथ ही इतिहास में सबसे लोकप्रिय CJI के रूप में याद किए जाएंगे रंजन गोगोई

गोगोई

अयोध्या भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आज आ गया है। देश के सबसे पुराने और सबसे चर्चित मामले पर कोर्ट ने विवादित जमीन का हक रामजन्मभूमि न्यास को दिया है। वहीं मुस्लिम पक्ष यानि सुन्नी वक्फ बोर्ड को दूसरी जगह जमीन देने का आदेश दिया गया है। आइए जानते हैं कि जस्टिस गोगोई ने अयोध्या मामले में इतनी दिलचस्पी क्यों दिखाई? क्यों लगातार सुनवाई करके देश के एक अहम मुद्दे को सुलझा दिया जो लगभग कई सौ सालों से विवादों में पड़ा हुआ था-

बिना किसी बाधा के लगातार अयोध्या भूमि विवाद पर 40 दिनों तक सुनवाई चली। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देश के कई मामलों को दरकिनार करते हुए साफ-साफ कह दिया था कि अयोध्या मामले की सुनवाई ही मेन फोकस में होगी। बाकि मुद्दों को बाद में निपटाया जाएगा। अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई की, इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले की समीक्षा करने के लिए जस्टिस गोगोई ने अपने विदेश दौरों को भी रद्द कर दिया था। CJI गोगोई को 18 अक्टूबर को दुबई के लिए उड़ान भरनी थी जिसके बाद उन्हें कैरो, ब्राजील और न्यूयॉर्क में कुछ कार्यक्रमों में शामिल होना था। उन्हें 31 अक्टूबर को भारत लौटना था। नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले महीने उनकी इस यात्रा को मंजूरी दे दी थी। लेकिन उन्होंने अपना दौरा रद्द करने का फैसला किया। इससे जाना जा सकता है कि वे अयोध्या मामले को लेकर कितने संजीदा थे, वे किसी भी हालात में अपने हाथों ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाना चाहते थे। जोकि अंततः उन्होंने करके दिखा दिया।

ऐसा भी माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अपने कार्यकाल के दौरान एक लैंडमार्क जजमेंट देकर इतिहास रचना चाहते थे और इससे सुनहरा अवसर किसी सीजेआई के जीवनकाल में और क्या हो सकता है। यही कारण है कि पहले जहां अयोध्या राम मंदिर केस का ट्रायल 18 अक्टूबर को पूरा होना था, सीजेआई के निर्देश पर ट्रायल को 2 दिन पहले ही पूरा कर लिया गया जबकि सीजेआई ने ट्रायल को पूरा करने की पिछली तारीख 17 अक्टूबर निर्धारित की थी।

शायद यही कारण है कि रंजन गोगोई लगातार केस पर नजर रखे हुए थे और समय से पहले अयोध्या राम मंदिर केस के ट्रायल को पूरा करवाने में सफल हुए। माना जा रहा था कि ट्रायल पूरे होने के एक माह बाद यानी 16 नवंबर तक अयोध्या राम मंदिर केस का फैसला आ जाएगा, लेकिन रंजन गोगोई की संजीदगी से सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 9 अक्टूबर को सुना दिया। यह भी ध्यान रहना चाहिए कि फैसला शनिवार के दिन आया है और शनिवार को छुट्टी का दिन होता है।

किसी भी तरह का विवाद न हो इसलिए जस्टिस गोगोई ने राज्यों के सचिवों के साथ बैठक की थी। हालांकि देश में शांति का माहौल है, कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है। यह हमारे न्याय व्यवस्था और शासन व्यवस्था की जीत है। जिसमें गोगोई का अहम योगदान है।

जस्टिस गोगोई के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई के सभी सबूतों को वैध मानते हुए फैसला सुनाया है। फैसले का देश भर में स्वागत हो रहा है। इस फैसले को जय और पराजय के रूप में नहीं देखा जा रहा है। उन्होंने अयोध्या में ही मुस्लिम पक्ष को भी 5 एकड़ जमीन देने की बात कही है। हालांकि मुस्लिम पक्ष के वकील खुश नहीं हैं और वे इसके लिए रिव्यू पेटिशन फाइल करेंगे।

जस्टिस गोगोई सुप्रीम ने सुप्रीम कोर्ट की कुर्सी संभालने के बाद इन मुद्दों पर भी सुनवाई की-

सबरीमाला- इसी साल फरवरी माह में जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए दायर 45 रिव्यू पेटिशन्स पर सुनवाई किया इसके बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया। अब देखना है कि क्या गोगोई रिटायरमेंट से पहले इस पर फैसला सुनाते हैं या नहीं।

राफेल घोटाला: इसी साल मई महीने में गोगोई के नेतृत्व में राफेल घोटाला मामले में विमानों की खरीद पर जांच करते हुए दायर याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। हो सकता है कि अगले दस दिनों में इस पर भी फैसला सुनाकर जाएं।

असम एनआरसीः इसके बाद असम में एनआरसी को लेकर जस्टीस गोगोई ने अहम फैसला दिया। राज्य से घुसपैठियों को निकालने के लिए असम में एनआरसी लागू किया गया।

आरटीआई- जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली जिसमें जस्टिस एनवी रामन्ना, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल हैं, इस पर फैसला सुनाएंगे कि क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूचना के अधिकार के दायरे में आते हैं या नहीं।

जस्टिस रंजन गोगोई का संक्षिप्त परिचय:

जस्टिस रजंन गोगोई का जन्म 18 नवंबर सन 1954 के दिन असम में हुआ था। रंजन गोगोई पूर्वोत्तर के पहले सीजेआई हैं। इनके पिता का नाम केशव चंद्र गोगोई था वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री थे।

गोगोई साल 1978 में बार काउंसिल के सदस्य बने थे। इसके बाद वे करियर में लगातार आगे बढ़ते रहे। फिर आया साल 2001, जब उन्होंने पहली बार बतौर जज के रूप में कुर्सी संभाली, वे गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने। इसके बाद वे साल 2010 में पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। फिर आया साल 2012 जब वे देश के सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचे और जज की कुर्सी संभाली।

इसके बाद साल 2018 में जस्टिस दीपक मिश्रा के जाने के बाद जस्टिस गोगोई को देश का 46वां सीजेआई बनाया गया। सीजेआई गोगोई उन 11 जजों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी संपत्ति सार्वजनिक रूप से घोषित की हुई है।

17 नवंबर 2019 तक इस पद से सेवानिवृत्त होंगे। जस्टिस गोगोई को उनके कार्यकाल में कई अहम फैसले सुनाने के लिए याद किया जाएगा।

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