गौतम अडानी: इस दशक के सबसे सफल उद्योगपति

गौतम अडानी

TFI के विश्लेषण के अनुसार 1300 करोड़ रुपये राजस्व वाले अडानी समूह के अध्यक्ष और गुजरात के व्यापारी गौतम अडानी इस दशक के सबसे सफल उद्योगपति हैं। फोर्ब्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 15.7 बिलियन यूएस डॉलर्स है और इसी साल जून में उनकी कंपनी को ऑस्ट्रेलिया की एक खदान में काम करने की अनुमत मिली थी, वो भी पूरे 9 सालों के इंतज़ार के बाद। यह अडानी समूह की सफलताओं की सूची में सबसे नया पॉइंट जुड़ा है। इसी के साथ अडानी ऑस्ट्रेलिया के एबॉट बन्दरगाह को भी नियंत्रित करते हैं। आज उनका कारोबार पूरी दुनिया के कोयला व्यापार, खनन, तेल एवं गैस वितरण, बंदरगाह, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक, बिजली उत्पादन-पारेषण तक फैला हुआ है, और उनके पास देश की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कंपनी है।

1993 में गुजरात सरकार ने मुद्रा पोर्ट की देखरेख की व्यवस्था आउटोसोर्सिंग के जरिए कराने का ऐलान किया। इसका कंट्रैक्ट 1995 में Gautam Adani को मिला। इस तरह से अडाणी पोर्ट्स एंड सेज लिमिटेड की स्थापना हुई। जो आज की तारीख में कई बंदरगाहों का संचालन करती है। मुद्रा प्रोर्ट्स प्राइवेट कंपनी द्वारा संचालित भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है।

18 वर्ष की उम्र में अडानी ने अपने स्कूल को छोड़कर मुंबई के लिए ट्रेन पकड़ी, जहां उन्होंने हीरा व्यापारी के तौर पर अपनी यात्रा की शुरुआत की। इस उद्योग में उन्होंने कम समय में ही सफलता पा ली और तीन सालों के अंदर ही वे एक खुद से बने एक सफल स्थापित उद्योगपति बन गए।

हमारे देश में शीर्ष अंबानी साम्राज्य के जनक आज के उद्योगपति मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी नहीं, बल्कि उनके पिता धीरू भाई अंबानी रहे हैं। इसी तरह टाटा-बिड़ला का साम्राज्य भी उनके पुरखों का बनाया हुआ है, लेकिन गौतम अडानी अपने बल पर वहां पहुंचे हैं जहां वे आज खड़े हैं। पिछले चार वर्षों में ही उनकी संपत्ति में तीन गुना बढ़ोतरी देखने को मिली है। बुनियादी ढांचे के विकास की ज़रूरत को महसूस करते हुए उन्होंने इसे तरजीह दी। मुकेश अंबानी से हटकर अडानी ने देश से बाहर निवेश करने पर भी ज़ोर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में खदान प्रोजेक्ट पर वे 10 बिलियन डॉलर रुपए निवेश कर चुके हैं।

अडानी समूह की खासियत यह है कि यह समूह फर्स्ट मूवर एडवांटेज उठाने में यकीन रखता है। उदाहरण के तौर पर केंद्र सरकार लगातार डेटा क्षेत्रीयकरण को लेकर अपना कडा रुख दिखाये हुए है। यही कारण है कि अडानी ग्रुप ने यहां अपने लिए सुनहरा अवसर ढूंढा है और अगल दो दशकों में इस क्षेत्र में 700 बिलियन रुपये निवेश करने की योजना बनाई है। अगर अडानी समूह इस दिशा में सफलतापूर्वक कदम उठाता है तो उसे ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ मिलना तय है क्योंकि अभी भारत में डाटा स्टोरेज सेवा प्रदान करने के क्षेत्र में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है।

अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी के अनुसार अगर भारत सरकार जल्द ही डाटा क्षेत्रीयकरण को लेकर कोई कानून पास करती है, तो इससे देश में डेटा स्टोरेज की मांग काफी बढ़ जाएगी और भारत के डाटा स्टोरेज की क्षमता को बढ़ाना पड़ेगा। बता दें कि अडानी समूह सरकार की भावी नीतियों के आधार पर अपनी रणनीति बनाकर पहले भी कई बार ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ उठा चुकी है। जब सरकार ने डिफेंस मैनुफेक्चुरिंग को प्रोत्साहित करने की घोषणा की थी, तब भी सेना को सैन्य उपकरणों की सप्लाई के लिए अडानी समूह सबसे पहले आगे आया था। इसी तरह जब सरकार ने खाना बनाने और यातायात के लिए एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देने की घोषणा की थी, तब भी अडानी ग्रुप ने इसी रणनीति को अपनाया था।

डाटा स्टोरेज के व्यवसाय को सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर नियंत्रित किया जाता है, और इस क्षेत्र पर सरकार की नीतियों का सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में भारी निवेश की भी ज़रूरत होती है। ऐसे वातावरण में काम करने का अडानी समूह के पास पहले ही काफी अनुभव है। उदाहरण के तौर पर अडानी समूह अभी बन्दरगाह, बिजली और कोयला खदान के क्षेत्र में काफी एक्टिव है और इन सभी क्षेत्रों पर भी सरकार का अधिक नियंत्रण रहता है। ऐसे में डेटा स्टोरेज के बिजनेस में कदम रखने से अडानी समूह को फायदा होना तय मना जा रहा है।

पिछले एक दशक में जिस तरह गौतम अडानी ने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है, और अपने बूते अपना नाम कमाया है, वह इन्हें इस दशक का सबसे सफल उद्योगपति बनाता है।

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