लेफ्ट विंग न्यूज पोर्टल ‘द क्विंट’ बंद होने के कगार पर, माईकल ब्लूमबर्ग ने खींचा हाथ

क्विंट

खरबपति माईकल ब्लूमबर्ग वर्ष 2020 का राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहते हैं। ये उद्योगपति एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर वर्ष 2008 और वर्ष 2016 में भी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन तब चीज़ें उनके मुताबिक हुई नहीं। अब उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अपनी किस्मत आज़माने का निर्णय लिया है। ब्लूमबर्ग न्यूयॉर्क सिटी के 108वें मेयर के तौर पर वे अपनी सेवाएं दे चुके हैं और इसके साथ ही वे लगातार तीन बार इस पद के लिए चुने जा चुके हैं। बता दें कि ब्लूमबर्ग एलपी एक वित्तीय, सॉफ्टवेयर, डेटा और मीडिया कंपनी है जिसके सीईओ माईकल ब्लूमबर्ग हैं।

ब्लूमबर्ग एलपी भारत के राघव बहल की कंपनी क्विंटिलियन मीडिया के साथ एक जाइंट वेंचर में हैं। हालांकि, भारत में यह जोड़ी बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई है, मनीकंट्रोल की खबर के अनुसार अब यह साझेदारी अपना दम तोड़ सकती है। खबरों के मुताबिक वर्ष 2016 के बाद से कई कोशिशों के बाद क्विंट के द्वारा TV चैनल का लाइसेन्स प्राप्त करने में अक्षमता, क्विंट पर टैक्स चोरी करने और घूसख़ोरी के आरोपों के बाद ब्लूमबर्ग एलपी के फाउंडर का क्विंट पर से विश्वास उठ गया है।

हालांकि, राघव बहल ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया है, और साथ ही उन्होंने कहा है कि यह खबर उनके द्वारा फैलाई गयी है जो ब्लूमबर्ग क्विंट की सफलता से जलते हैं। बहल ने मनीकंट्रोल की रिपोर्ट पर कहा- “ये सब उनके द्वारा फैलाया हुआ है जो क्विंट की सफलता को पचा नहीं पा रहे हैं, जिसने डिजिटल मीडिया पर अपनी छाप छोड़ी है। हमें इस बात का पूरा यकीन है कि जैसे ही हम ब्रॉडकास्ट करना शुरू करेंगे, हम दूगनी तेजी से आगे बढ़ेगें। अब मुझे इस पर कोई बात नहीं करनी है”।

Tfipost ने इसी महीने नवंबर में यह रिपोर्ट किया था कि वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में उनके नॉमिनेट होने के आसार बहुत कम ही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जिस तरह भारत में उनके साथ गठजोड़ करने वाली कंपनी क्विंट पक्षपाती रिपोर्टिंग करती है, उससे अमेरिका में भारतीय समुदाय कभी उनका समर्थन नहीं करेगा। क्विंट कई बार भारत-विरोधी खबरें भी छापता रहता है। इसके अलावा, राघवबहल पर कर चोरी और रिश्वत के आरोप भी लगे। पिछले साल अक्टूबर में, आयकर विभाग ने बहल के निवास और क्विंट के ऑफिस में कई लाभार्थियों द्वारा प्राप्त किए गए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के संबंध में छापेमारी की थी। इन घटनाओं ने राघवबहल की छवि को एक पक्षपाती मीडिया व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया है, खासकर की माइकल ब्लूमबर्ग की नज़रों में, जो अब बहल की मीडिया होल्डिंग के साथ संबंधों में कटौती करने के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।

ब्लूमबर्ग एलपी इससे पहले रोन्नी स्क्रूवाला के UTV और बाद में अनिल अंबानी ग्रुप के साथ जाइंट वेंचर में जा चुका है, इन सबके बाद ब्लूमबर्ग एलपी ने क्विंट के साथ गठजोड़ किया था। बहल ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म की ‘सफलता’ को दिखाकर ब्लूमबर्ग के साथ यह कहकर जाइंट वेंचर किया था कि वह TV पर भी इसी सफलता को दोहराएंगे और वे 24 घंटों का एक बिजनेस न्यूज़ चैनल लॉन्च करेंगे। हालांकि, अभी तक बहल, सरकार की ओर से टीवी लाइसेन्स पाने में असफल ही रहे हैं।

मनीकंट्रोल ने इस बात का भी खुलासा किया है कि राघव बहल ने एक नकली कंपनी होरीज़ोन सैटेलाइट सर्विसेस को खरीदा है जिसके माध्यम से बहल अपनी कंपनी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को चेंज करना चाहते हैं ताकि ब्लूमबर्ग क्विंट को रिलॉन्च किया जा सके। हालांकि, सरकार को क्विंट का यह कदम बिल्कुल भी नहीं भाया है।

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