समीक्षा – महिला सुरक्षा पर उपदेश देते हुए मूल कहानी से भटकी मर्दानी 2

PC: Bollywood Life

बहुत कम ऐसी फिल्में ऐसी होती हैं जो आप को अंदर तक झकझोर देगी, और ये फिल्म आपको एक बार अवश्य अपने आप से पूछने पर विवश करेगी कि हम आखिर एक समाज के तौर पर कहाँ जा रहे हैं? मर्दानी 2 इसी पर आधारित है। 2014 के स्लीपर हिट फिल्म ‘मर्दानी’ के दूसरे संस्करण का निर्देशन किया है ‘मर्दानी’ फिल्म के लेखक गोपी पुथरन ने, और इसमें मुख्य भूमिका में हैं रानी मुखर्जी। कहानी है राजस्थान के कोटा शहर के बारे में, जहां पर मानसिक रूप से विकृत एक सनी नाम के लड़के ने आतंक मचा रखा है।

कोटा में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ रहे अपराध की जांच पड़ताल के लिए चर्चित पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय का स्थानांतरण कोटा होता है, और फिर शुरू होता है सनी और शिवानी के बीच चूहे बिल्ली का खेल। क्या शिवानी उसे पकड़ पायेगी? यही इस फिल्म का सार है।

सबसे पहले हम ये कहना चाहेंगे कि ऐसे नाज़ुक समय में ऐसी फिल्म न केवल आवश्यक थी, अपितु ये हमसे कई सवाल भी करती है। इस फिल्म का सबसे बड़ा प्रश्न है, ‘हम एक समाज के तौर पर आने वाले पीढ़ी के लिए कैसा भविष्य दे रहे हैं?”

मर्दानी 2 में अच्छा क्या है उसकी बात करें तो उनमें प्रमुख है कोई अनावश्यक गीत का न होना और एक क्रिस्प प्लॉट। अन्य फिल्मों की तरह इसमें न कोई अनावश्यक ट्विस्ट है, और न ही फालतू का नाच गाना। यह फिल्म सीधा अपने मुद्दे पर पहुँचती है, और आपको फिल्म में बताए जा रहे अपराधों की भयावहता से परिचित कराती है। कई दृश्य तो ऐसे हैं जो आपको अंदर तक झकझोर कर रख देंगे। इस फिल्म का असली नायक यदि कोई है, तो वो है इस फिल्म की पटकथा, जो अपने मुद्दे से एक दो दृश्यों को छोड़कर कहीं नहीं भटकती।

यदि मर्दानी 2 में अभिनय की बात करें, तो रानी मुखर्जी ने बड़ी परिपक्वता से आईपीएस अफसर शिवानी रॉय का किरदार निभाया है। एक स्पष्ट और निर्भीक अफसर के तौर पर उन्होंने अपनी भूमिका के साथ पूरी तरह न्याय किया है। रानी मुखर्जी ने रील और रियल लाइफ दोनों में सिद्ध किया है कि समस्या के बारे में रोने-धोने और हल्ला मचाने से अच्छा है कि समस्या का समाधान ढूँढे। मर्दानी की तरह ही इस फिल्म में ऐसे नाजुक मुद्दों पर मीडिया किस तरह लोगों को भड़काती है, इसे बखूबी दिखाया गया है।

युवा एक्टर विशाल जेठवा की एक्टिंग इस फिल्म में लाजवाब है। ‘भारत के वीर पुत्र – महाराणा प्रताप’ में युवा अकबर बन चुके यह अभिनेता इस फिल्म में अपने अभिनय से न केवल सबको चौंकाते है, अपितु खलनायक के तौर उनका अभिनय रूह कंपा देने वाला है। इनके बारे में ज़्यादा विस्तार से बताना फिल्म की पूरी कहानी रिवील करने के बराबर होगा, परंतु हम इतना अवश्य कह सकते हैं कि मर्दानी के पिछले संस्करण के विलेन ताहिर राज भसीन की भांति विशाल जेठवा ने भी अपने अभिनय और अपने वक्तव्य से सिद्ध कर दिया है कि इस फिल्म में उनका क्या महत्व है।

हालांकि, ‘मर्दानी 2’ कोई मास्टरपीस नहीं है, और इसके पीछे प्रमुख कारण है अपनी बात सहजता से कहने और उपदेश देने की महीन रेखा को भूल जाना। इस फिल्म में एक दो दृश्य ऐसे हैं जहां पर महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध पर फ़िल्मकार हमें वास्तविकता से परिचित कराना चाहते हैं, परंतु वे समस्या का समाधान बताते बताते उपदेश देने की दिशा में मुड़ जाते हैं, जो ऐसी फिल्म के लिए बिलकुल भी उचित नहीं है। कई उपदेश तो यौन शोषण के प्रमुख विषय से भटके हुए भी देखे जाते हैं।

लेकिन इन कमियों को अगर हम अनदेखा करें, तो मर्दानी 2 एक इंटेन्स फिल्म है, जो आपको काफी असहज महसूस कराएगी, और आपकी अंतरात्मा को कुरेदेगी। इसे एक बार तो आप अवश्य देख सकते हैं। टीएफ़आई की ओर से इसे मिलते हैं 5 में से 3 स्टार।

Exit mobile version