JNU विवाद में एजेंडा चलाने के लिए बरखा ने जिसे AIIMS का डॉक्टर बताया, वो फर्जी व्यक्ति निकला कांग्रेसी

बरखा दत्त

JNU में हुए हिंसा को कई लोगों ने कई प्रकार से बताने की कोशिश की। कई लोग ये कह रहे ABVP के छात्रों को अधिक चोट लगी तो कोई यह कह रहा है लेफ्ट के छात्रों को अधिक चोट लगी। इन सभी रिपोर्ट्स के बीच एक नाम कॉमन दिख रहा है और अपने आप को निष्पक्ष बताने वाले लोग सिर्फ इसी डॉक्टर के बयान को प्रकाशित कर रहे है। यह कथित डॉक्टर हैं हरजीत सिंह भट्टी। इस तरह की भ्रामक रिपोर्टिंग में बरखा दत्त भी शमिल हैं। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा है कि ये डॉक्टर AIIMs का है और इस डॉक्टर के बयान के आधार पर ABVP को दोषी मान लिया गया।

बता दें कि एक वामपंथी वेबसाइट न्यूज लॉन्ड्री ने इस कथित डॉक्टर को रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप पेश किया और यह रिपोर्ट किया कि 15 से अधिक छात्रों को AIIMS  लाया गया। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस डॉक्टर ने यह बताया कि ABVP के छात्रों को लगी चोटें नकली लग रही थीं। यह तो सरासर झूठ था जिसे इस पोर्टल ने अधिक महत्व दिया। कई रिपोर्ट आ चुकी हैं जिसमें यह साफ देखा जा सकता है कि छात्रों को गंभीर चोटें आई हैं।

इसी तरह अपने आप को प्रासंगिक रखने की कोशिश कर रही कथित पत्रकार और अपने नकारात्मक रिपोर्ट्स के लिए जानी जाने वाली बरखा दत्त ने भी यही किया और इस डॉक्टर के बयान को AIIMS का आधिकारिक बयान बता दिया।  अपने मोजो के वीडियो को ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “जेएनयू हिंसा में आई चोटों पर पहला आधिकारिक बयान @DrHarjitBhatti का। वो बताते है कि ट्रॉमा सेंटर में 23 लोग घायल हैं, छात्रों के साथ-साथ शिक्षक भी हैं।

इनके इस झूठ की पोल तब खुली जब स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोएल ने ट्वीट किया और बरखा दत्त से पूछा कि कि बरखा आपने यहाँ आधिकारिक शब्द का इस्तेमाल किया है लेकिन भट्टी तो ये कह रहा है कि उसने जो भी कहा वह उसके अनुसार था न कि यह एम्स का आधिकारिक बयान।

 

इसके बात तो लोग लगे इस व्यक्ति की ऑनलाइन हरकतों का पता लगाने। इसी क्रम में अभिजीत अय्यर मित्रा ने ट्वीट किया और बताया कि एम्स की वेबसाइट पर डॉक्टर भट्टी को ‘Alumna’ के रूप में दिखाया गया है। अगर ऐसा है तो फिर और भी कई सवाल उठते हैं। वो एम्स के वार्ड में कैसे घुसा और उसने एम्स की तरफ़ से मीडिया को बयान क्यों दिया?

https://twitter.com/Iyervval/status/1214182038829334528?s=20

सवाल तो वाजिब था, आखिर इस व्यक्ति को किसने यह अधिकार दिया कि वह बयान दे और अगर वह अपने स्तर पर बयान दे रहा है तो सभी प्रोपोगेण्डा फैलाने वाले वामपंथी इस व्यक्ति के बयान का ही उल्लेख क्यों कर रहे हैं?

इसके बाद मित्रा ने एक और ट्वीट किया और बताया कि जैसा AIIMS  की वेबसाइट पर लिखा था कि वह वर्तमान में मणिपाल अस्पताल में काम करता है। उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने अस्पताल में फोन किया और पता करने की कोशिश की तो वहाँ की रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि उस नाम से कोई डॉक्टर नहीं है। यही नहीं इस अस्पताल की वेबसाइट पर भी इस नाम का कोई डॉक्टर नहीं है।

https://twitter.com/Iyervval/status/1214190688125849601?s=20

आज के सोशल मीडिया के दौर में किसी का बच पाना नामुमकिन है और यही हरजीत सिंह भट्टी का भी हुआ। धीरे-धीरे परत दर परत और खुलासे होने लगे तो यह पता चला कि यह व्यक्ति शुरू से ही मोदी विरोधी रहा है और पिछले वर्ष कांग्रेस के मेडिकल सेल का राष्ट्रीय संयोजक भी रह चुका है।

कांग्रेस से संबंधित व्यक्ति के बयानों को बरखा दत्त जैसी पत्रकार निष्पक्ष ही मानती हैं। इस वजह से जब यह बात खुलकर सामने आई तो बरखा दत्त और न्यूज़लॉन्ड्री के प्रोपोगेंडा से हैरानी नहीं हुई।

स्वाति गोएल ने भट्टी के फेसबूक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि भट्टी CAA विरोधी है और मोदी-शाह के खिलाफ लोगों को एकत्र करता है।

स्वाति गोएल द्वारा शेयर किए गए भट्टी के फेसबुक पोस्ट्स से पता चल जाता है कि डॉक्टर हरजीत सिंह भट्टी मोदी विरोध के हर उस प्रोपोगेंडा में शामिल रहा है जो कांग्रेस और वामपंथी मीडिया का गुट कर रहा है। पीएम मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ भीड़ जुटाने और समय-समय पर ज़हर उगलने वाले व्यक्ति के राजनीतिक बयान को न्यूज़लॉन्ड्री और बरखा दत्त ने जिस तरह से एक ‘डॉक्टर का बयान’ बता कर पेश किया है उससे इनके भयंकर सीनिस्टर का पता चलता है।

ऐसे ही कई बार एक व्यक्ति का सभी प्रोटेस्ट में शामिल रहना और कुछ चैनलों द्वारा सिर्फ उन्हीं का इंटरव्यू लिए जाने का खुलासा भी हो चुका है। जामिया हिंसा मामले में आयशा और लादीदा की भूमिका एक बड़ा उदाहरण है। यह मामला भी ठीक उसी तरह था जहां कांग्रेस के एक कथित कार्यकर्ता को डाक्टर बता कर उसके बयान को आधिकारिक बयान बताया जा रहा है।

ऐसा लगता है कि वामपंथी मीडिया और विपक्ष सभी जगह पर अपने कार्यकर्ता स्लिपर सेल्स को बैठा कर रखी है और जैसे ही कुछ होता है चाहे वे मीडिया में हो या डॉक्टर हो सब एक्टिव हो जाते है।

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