खुशी मनाओ मलेशिया वालों, तुम्हारा बड़बोला और मुर्ख प्रधानमंत्री अब कुर्सी छोड़ने वाला है

कश्मीर, CAA पर बोलकर इसने अपनी बहुत भद्द पिटवाई थी

महातिर मोहम्मद

PC: iChowk

दुनिया के सबसे बुजुर्ग प्रधानमंत्री और मलेशियाई नेता महातिर मोहम्मद  ने आखिर अब बोल दिया है कि वे जल्द ही अपनी कुर्सी छोड़ देंगे। महातिर मोहम्मद ने कहा है कि वे गठबंधन में अपने साथी अनवर इब्राहिम को पीएम की कुर्सी सौंप देंगे। हालांकि, अभी महातिर ने तारीख नहीं बताई है कि वे कब अपनी कुर्सी छोड़ेंगे। महातिर वर्ष 2018 में दूसरी बार मलेशिया के PM बने थे और तभी से उन्होंने मलेशिया के आर्थिक और कूटनीतिक पहलुओं को कमजोर करना शुरू कर दिया था। एक तरफ उन्होंने अपने भड़काऊ बयानों से भारत और अमेरिका जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते खराब किए, तो वहीं इन देशों के साथ अपने व्यापार को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया, जिसका खामियाजा मलेशिया के मासूम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उम्मीद है कि महातिर के जाने के बाद देश के नए पीएम उनके द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई करने का प्रयास करेंगे।

महातिर मोहम्मद अभी अपने राजनीतिक साथी अनवर इब्राहिम के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं, और सरकार बनाते समय महातिर ने यह वादा किया था कि एक या दो साल के बाद वे प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर अनवर के लिए कुर्सी खाली कर देंगे। लेकिन पिछले वर्ष नवंबर में उन्होंने अपनी कुर्सी छोड़ने से साफ इंकार कर दिया था।

फाइनेंशियल टाइम्स को इंटरव्यू देते हुए उन्होंने कहा था कि अभी कुर्सी छोड़ने का उनका कोई प्लान नहीं है और मौजूदा हालातों को देखते हुए देश चलाने के लिए वे ही सही व्यक्ति हैं। लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे जल्द ही अपनी कुर्सी छोड़ने वाले हैं। इससे मलेशिया के लोग सबसे ज़्यादा खुश होंगे क्योंकि वे महातिर की सरकार से खासा निराश हैं।

जिस तरह उन्होंने देश को भ्रष्टाचार से उबारने के नाम पर पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था का बंटाधार किया है, खुद मलेशिया के लोग भी उनसे खुश नहीं हैं। मलेशिया में महातिर मोहम्मद की सरकार की लोकप्रियता में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।  पिछले वर्ष अप्रैल में प्रकाशित स्ट्रेट टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ एक साल के अंदर ही महातिर सरकार की लोकप्रियता में बड़ी कमी आई है, और महातिर की अप्रूवल रेटिंग 71 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 46 प्रतिशत रह गयी है। वहीं रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि सिर्फ 39 प्रतिशत लोग ही उनकी सरकार को सकारात्मक फीडबैक देंगे।

इसके अलावा पिछले कुछ महीनों में भी वे ऐसे कदम उठा चुके हैं जिससे भविष्य में मलेशिया की अर्थव्यवस्था को तगड़ा नुकसान पहुँच सकता है। पिछले वर्ष अगस्त महीने में उन्होंने यूएन में कश्मीर मुद्दे को उठाया था जिसने नई दिल्ली को बहुत आहत कर दिया था, रही सही कसर महातिर के CAA की आलोचना करने वाली बयान से पूरी कर दी। इसके बाद मलेशिया की पाम ऑयल इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। नीचे दिये हुए ग्राफ से आप समझ सकते हैं कि वर्ष 2019 के आखिर में भारत ने मलेशिया से पहले के मुक़ाबले बेहद ही कम मात्रा में पाम ऑइल का इम्पोर्ट किया था।

वहीं पिछले वर्ष ईस्ट एशिया समिट के दौरान भी महातिर ने चीन का बचाव करते हुए अमेरिका पर निशाना साधा। दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान RCEP के मुद्दे पर बोलते हुए महातिर मोहम्मद ने कहा था कि अमेरिका जानबूझकर ASEAN देशों को टार्गेट कर रहा है ताकि अपनी शत्रुतापूर्ण व्यापार नीति के माध्यम से वह एक-एक करके सभी देशों को निशाना बना सके। महातिर मोहम्मद ऐसे समय में अमेरिका पर हमले कर रहे हैं जब खुद मलेशिया का अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस है। वर्ष 2018 में अमेरिका के साथ मलेशिया का ट्रेड सरप्लस 26.5 बिलियन यूएस डॉलर था। वहीँ, मलेशिया उस चीन की गोद में बैठकर अमेरिका को गाली दे रहा है जिसके साथ उसका ट्रेड डेफिसिट है। यह दिखाता है कि मलेशिया ASEAN देशों में ASEAN के हितों के विरुद्ध चीन के हितों के लिए काम कर रहा है।

ऐसे में अब जब महातिर मोहम्मद अपनी कुर्सी छोड़ेंगे, तो अनवर के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वे महातिर द्वारा की गई इन गलतियों को सुधारे और भारत के साथ अपने रिश्ते दोबारा सही करने की दिशा में काम करें।

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