वेंटिलेटर बनवाने से लेकर रिसॉर्ट सौंपने तक- आनंद महिंद्रा ने वो सब कर दिखाया है जो किसी बिजनेसमैन ने नहीं किया

आनंद महिंद्रा

देश में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं और अब यह संख्या 300 पार कर चुकी है। कोरोना से लड़ाई में अब पूरा भारत एक हो चुका है और इसी का नमूना हमें रविवार को 5 बजे देखने को मिला जब भारत की जनता ने पीएम मोदी के आह्वान का समर्थन करते हुए तालियाँ बजाई। अब कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में बड़े-बड़े उद्योगपति भी सामने आने लगे हैं। इन्हीं उद्योगपतियों में सबसे पहला नाम है महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का।

कोरोना के केस बढ़ते देख आनंद महिंद्रा ऐसे पहले उद्योगपति के रूप में सामने आए हैं, जिन्होंने मदद की पेशकश की है। महिंद्रा ने मरीजों के लिए अपने रिजॉर्ट्स देने के साथ-साथ अपनी पूरी सैलरी देकर मॉनिटरी मदद की बातें कहीं है।

रविवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने अपने विचार प्रकट किए और यह पेशकश की। महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने रविवार को कहा कि उनकी कंपनी तुरंत इन संभावनाओं पर काम करना शुरू कर रही है कि कैसे उनकी निर्माण इकाइयों में वेंटिलेटर तैयार किए जा सके।

साथ ही, उन्होंने कहा कि उनके क्लब महिंद्रा रिजॉर्ट्स मरीजो की देखभाल के लिए टेंपरेरी फैसिलिटी के रूप में इस्तेमाल किए जा सके। आनंद ने इसके अलावा यह भी कहा कि उनकी कंपंनी अन्य फैसिलिटी तैयार करने में सरकार और सेना की पूरी मदद करेगी।

आनंद महिंद्रा ने लिखा है, महामारी विशेषज्ञों की कई रिपोर्ट्स इस ओर इशारा करती हैं कि भारत (कोरोनावायरस) ट्रांसमिशन के तीसरे स्टेज में है। मामलों में बहुज ज़्यादा बढ़ोतरी हो सकती है और लाख़ों लोग शिकार हो सकते हैं। उन्होंने लिखा है कि इससे मेडिकल व्यवस्था पर काफ़ी असर पड़ेगा।

महिंद्रा ने सलाह दी है कि अगर आने वाले हफ्तों में लॉकडाउन होता है तो इससे मामलों में कमी आ सकती है जिससे मेडिकल व्यवस्था पर भार कम होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए महिंद्रा समूह तुरंत इस ओर कदम बढ़ाए कि उनके मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का वेंटिलेटर बनाने में इस्तेमाल किया जा सके।

उन्होंने ये भी कहा है कि उनकी प्रोजेक्ट टीम सरकार और आर्मी की अस्थायी केयर फैसिलिटी बनाने में मदद करने को तैयार खड़ी है। उन्होंने कहा, ‘जिन्हें इससे सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा है उनकी मदद के लिए महिन्द्रा फाउंडेशन एक फंड बनाएगा।’ इससे छोटे व्यापार और अपने बूते व्यापार करने वालों की मदद की जाएगी।

अपने आखिरी ट्वीट में आनंद महिंद्रा ने लिखा कि अगर कोई भी इस फंड में योगदान देना चाहता है तो दे सकता है। मैं अपनी सैलरी का पूरा हिस्सा इस फंड को दूंगा और आने वाले कुछ महीनों में मैं इसमें अपना और भी योगदान दूंगा। मैं सभी व्यवसायियों से निवेदन करता हूं कि वो भी इस फंड में अपना कुछ योगदान दें ताकि जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सके।

कुछ ही दिनों पहले उन्होंने एक रिक्शेवाले की मदद की थी। दरअसल, वे रिक्शेवाले की जुगाड़ पर फिदा हो गए थे। रिक्शेवाले ने रिक्शे में महिंद्रा ग्रुप का लोगो लगाया था जिसको देखकर आनंद महिंद्रा के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उन्होंने रिक्शेवाले को अपग्रेडेड वाहन देने का फैसला किया था।

आनंद महिंद्रा ने लिखा, ”नीरज शायद तुम्हें यह मजाकिया लगा होगा और हां यह है भी, खासतौर पर तब, जब लोगो नीचे की तरफ लगाया गया है। लेकिन मैं इससे बेहद रोमांचित हूं, और हम उसे चलाने के लिये एक नया अपग्रेडेड वाहन देंगे, ताकि वह जिंदगी में ‘Rise’ कर सके।”

यही नहीं कुछ ही दिनों पहले उन्होंने एक 80 वर्षीय महिला की इडली की दुकान में भी इन्वेस्ट करने की बात कही थी, जो गरीब और जरूरतमंदों को 1 रुपये में इडली खिलाती हैं।

बता दें कि तमिलनाडु के कोयम्बटूर जिले में 80 साल की एक महिला लकड़ी के चूल्हे पर इडली बनाती है । यह महिला इसे सुबह काम पर जाने वाले मजदूरों को मात्र एक रुपये में ही बेचती है।

आनंद महिंद्रा एक दूरदर्शी उद्योगपति हैं, जिन्होंने उपभोक्ता की जरूरतों के अनुसार समूह के हित में विविधता लाई है। कंपनी ने नए युग की सेवाओं में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए राइड-शेयरिंग स्टार्टअप्स में निवेश किया है। वे समय-समय पर अपने हिसाब से लोगों की मदद करते रहते हैं। अब उन्होंने कोरोना जैसी भयंकर आपदा के समय में सरकार और लोगों की मदद कर बाकी उद्योगपतियों के सामने एक उदाहरण पेश किया है।

Exit mobile version