एक CM ने Bihar के लोगों को सड़क पर फेंक दिया, एक ने सीमा से परे मदद किया, एक ने उन्हें दर-दर भटकने दिया

आपके हिसाब से कौन योद्धा, कौन कायर और कौन जयचंद?

बिहार, नितीश कुमार, नीतीश कुमार, दिल्ली,

एक समय होता था जब बिहार राज्य हर क्षेत्र में भारत में अग्रणी माना जाता था। आज इसके ठीक उलट बिहार राज्य अनेक कारणों से मजाक का कारण बना हुआ है। वुहान वायरस जैसी महामारी के समय जहां पूरा देश इस समस्या से निपटने के लिए सीना तान कर खड़ा है, वहीं कुछ राज्य ऐसे भी है, जिन्हें इस समय भी अपने निजी हित ज़्यादा प्रिय है, और बिहार भी उन्हीं में से एक है। नितीश कुमार ने संकेत दिए हैं कि भले ही वे दिल्ली से आने वाले श्रमिकों की बस नहीं रोकेंगे, परंतु इसके बाद श्रमिकों को अपने हाल पर छोड़ दीजिएगा।

दिल्ली सरकार के लचर व्यवस्था के कारण उत्पन्न हुए आव्रजन संकट में असंख्य श्रमिक पैदल ही यूपी और बिहार के लिए निकल पड़े, जिसके कारण पूरे देश में हड़कंप मच गया। इस समय वुहान वायरस से निपटने हेतु पूरा देश 21 दिनों के lockdown में बंद है, ताकि वायरस का प्रभाव देश पर कम से कम हो।

परंतु बिहार अपने ही धुन में मस्त चला जा रहा है, जो lockdown के घोषित होने के बाद उनके कार्यशैली में भी दिखा। lockdown के आदेश के बाद भी भारी संख्या में लोगों की आवाजाही जारी रही। कई दुकानें खुली रही, और अब तो खबरें सामने आ रही हैं कि वुहान वायरस के साथ साथ चमकी बुखार ने भी राज्य में दस्तक दे दी है।

नितीश कुमार ने इस स्थिति का हल बताते हुए कहा- ‘’बसों से लोगों को उनके राज्यों तक पहुंचाने से लॉकडाउन का मकसद ही खत्म हो रहा है।  बेहतर होगा कि फंसे हुए लोगों को वहीं पर खाना और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।‘’

बिहार के प्रवासी मजदूरों के लिए नीतीश कुमार ने कहा कि दिल्ली में ही हम व्यवस्था करेंगे. इसके लिए दिल्ली स्थित बिहार भवन में तीन हेल्पलाइन नंबर शुरु किए गए थे. नीतीश ने यहां तक दावा किया था कि बिहार भवन में लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था की गई है. हालांकि जब पत्रकारों ने बिहार भवन का दौरा किया तो हकीकत कुछ और ही था. रविवार के दिन बिहार भवन में ताला लटका था. इसके साथ ही हेल्पलाइन नंबर भी बंद मिला.

हालांकि काफी संख्या में लोग दिल्ली से बिहार बिना जांच के ही पहुंच गए जिस पर देश में काफी सवाल उठने लगे. ऐसे में फजीहत से बचने के लिए बिहार सरकार ने आदेश दिए कि जब प्रवासी लोग बिहार में दाखिल होंगे तो उन्हें 14 दिनों तक सरकारी कैंपों में रखा जाएगा. एक ओर जहां उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी मजदूर सुविधाओं के लिए भटके नहीं, तो वहीं नितीश ने अधिकांश मजदूरों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया है।

नितीश कुमार प्रवासी गरीब नागरिकों के प्रति कितना संवेदनशील हैं, इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं, कि एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी तक को नितीश कुमार को आड़े हाथ लेना पड़ा है। जनाब ट्वीट करते हैं, “AIMIM पार्टी के कार्यकर्ता हमारे भाइयों जो बिहार के किशनगंज के रहने वाले हैं और वर्तमान में हफीजपेट में रहते हैं, को पका हुआ खाना बांट रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से वह हैदराबाद में फंस गए हैं।  नीतीश कुमार, यह लोग आपके राज्य से हैं, आपने उन्हें क्यों छोड़ दिया”।

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परंतु हैरानी की कोई बात नहीं चाहिए, आखिर ये बिहार के ‘’सुशासन बाबू” जो ठहरे। पिछले वर्ष जब चमकी बुखार का प्रकोप बिहार में फैला था, तो उसके कारण लगभग 185 से अधिक मासूमों की मृत्यू हुई थी, परंतु नितीश कुमार ने स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने के लिए कोई पहल नहीं की।

मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम  के कारण कुछ दावों की माने तो इस बीमारी के कारण पहले भी मासूमों की मौत हो चुकी है। इतनी मौतों के बाद भी नीतीश सरकार ने इस मामले को गंभीरता से कभी नहीं लिया। हमेशा उन्होंने सब कुछ ठीक होने का ढोंग किया। यही नहीं हर बार की तरह उन्होंने बस मृतकों के परिवार को मुआवजा देने की घोषणा कर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेना उनकी राजनीति का हिस्सा रहा है। उनके मंत्री भी यही कहते हैं कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं।

इसके अलावा जब बिहार बाढ़ से प्रभावित था तब भी नीतीश सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह सही तरीके से नहीं किया, और तो और इसके लिए भी वो केंद्र सरकार की और देख रहे थे। नीतीश कुमार ने केंद्र से मदद की दरकार की लेकिन अपने स्तर पर कोई उचित कदम नहीं उठाये। हर बार नीतीश कुमार स्थिति का आंकलन करने की बजाय और उचित कदम उठाने की बजाय पल्ला झाड़ने की भरपूर कोशिश करते हैं। स्थिति तो इतनी दयनीय हो गयी कि स्वयं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बाढ़ में फंसे हुए दिखाई दिये। ऐसे में वुहान वायरस ने बिहार के सुशासन बाबू के सुशासन की बुरी  तरह से पोल खोल दी है।

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