ज्यादातर हर कोरोना वायरस हॉटस्पॉट मुस्लिम बहुल इलाका ही क्यों है?

आखिर क्या कारण है जिससे कोरोना इन्हें अपनी चपेट में ले रहा है

कोरोना वायरस

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कोरोना वायरस विश्व के लिए कितना घातक रहा है, इसे समझने के लिए कोई विशेष शोध की आवश्यकता नहीं है। लगभग 20 लाख लोग विश्व भर में इससे संक्रमित है, और अब तक 125000 से ज़्यादा लोग इससे मर चुके हैं।

यूं तो भारत भी इससे अछूता नहीं है, परन्तु यहां स्थिति उतनी भी भयावह नहीं जितना कि अमेरिका, इटली या स्पेन में रही है। परन्तु कुल मामलों में जो एक अनचाहा उछाल आया है, उसके पीछे के प्रमुख कारणों का विश्लेषण करने पर एक अलग ही तस्वीर सामने आती है। आप माने या नहीं, परन्तु भारत के जितने भी कोरोना वायरस हॉटस्पॉट देखें गए हैं, उनमें से आधे से ज़्यादा मुस्लिम बहुल इलाके हैं। आखिर ऐसा क्यों है इसपर हमने पहले भी प्रकाश डाला था।

इस विषय पर प्रकाश डालने से पहले भारत की स्थिति संक्षेप में जाने की आवश्यकता है। विश्व भर के बड़े-बड़े देशों के मुकाबले भारत में अभी  केवल 11000 से  ज़्यादा लोग संक्रमित हुए हैं। इनमें से करीब 377 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 1300 से अधिक लोग इस बीमारी से पूरी तरह ठीक भी हुए हैं।

परन्तु इन आंकड़ों का मुस्लिम बहुल इलाकों से क्या संबंध? यदि आपको स्मरण हो, तो 31 मार्च से पहले भारत में कुल मामले महज 1200 से 1300 के बीच में थे। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन को लागू हुए लगभग एक हफ्ता हुआ था, और ऐसा लगा था कि धीरे धीरे ही सही, पर भारत इस लड़ाई में विजयी होगा।

परन्तु 31 मार्च को जैसे ही दिल्ली के निज़ामुद्दीन क्षेत्र में स्थित मरकज भवन से 24 व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए, मानो पासा ही पलट गया। देखते ही देखते 15 दिनों में भारत में कुल मामले 11000 पार कर गए।

अब अगर कुछ राज्यों के मामले हटा दिए जाएं, तो कुल मामले 5000 का आंकड़ा भी बमुश्किल पार करें। तब्लीगी जमात के सदस्यों में संक्रमण के कारण सर्वाधिक असर दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान जैसे शहरों में देखा गया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि इन राज्यों में से 70 प्रतिशत मामले केवल और केवल तब्लीगी जमात की देन है। उदाहरण के लिए दिल्ली में जब 1069 मामले थे, तो अकेले 700 से अधिक मामले तब्लीगी जमात के सदस्यों से सम्बंधित थे। महाराष्ट्र के कुल 2687 मामलों में से कुछ नहीं तो डेढ़ हज़ार से ज़्यादा मामले केवल मुंबई शहर में देखे गए हैं, जिनमें आधे से अधिक मामले तब्लीगी जमात से सम्बन्ध रखते हैं।

जब विभिन्न सरकारों ने सुरक्षा के लिहाज से हर शहर के उन हॉटस्पॉट्स को सील करना शुरू किया, जहां ये मामले अधिक हैं, तो उनके विश्लेषण पर कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उत्तर प्रदेश में कई शहरों के हॉटस्पॉट सील किए गए, और उदाहरण के तौर पर कानपुर शहर में बेकनगंज, कर्नलगंज, अनवरगंज, घाटमपुर क्षेत्र सील हुए हैं, और ये सभी वो इलाके हैं, जहां मुसलमानों की जनसंख्या अधिक है

ऐसे ही झारखंड  की राजधानी रांची का हिंदपीढ़ी इलाका राज्‍य में कोरोना का सबसे बड़ा हॉट स्‍पाॅट बन गया है। अब तक यहां से कुल 11 मामले सामने आए हैं। इसमें एक व्‍यक्ति की मौत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही जांच में लगातार इस इलाके में नए मरीज मिल रहे हैं। अब तक यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुस्लिम बहुल इलाकों में लगातार कोरोना का संक्रमण फैलता जा रहा है। यहां के लोग कोरोना की जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे हैं।

इसके अलावा मध्य प्रदेश में इंदौर, राजस्थान में जयपुर के रामगंज क्षेत्र, गुजरात में अहमदाबाद के कुछ क्षेत्र और उत्तराखण्ड में हल्द्वानी के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या काफी ज़्यादा है। परन्तु इन्हें इलाज के लिए ले जाना युद्ध लड़ने से कम खतरनाक नहीं है, और ये बात इंदौर के स्वास्थ्य कर्मियों से बेहतर कौन जानता है। इन्हीं क्षेत्रों में तब्लीगी जमात के कुछ सदस्य भी छुपे हुए थे। ऐसे में ये पता लगाना ज़्यादा कठिन नहीं है कि आखिर यहां के लोग जांच पड़ताल में क्यों सहयोग नहीं कर रहे हैं।

आखिर क्या कारण है कि जिस राजस्थान में भीलवाड़ा राज्य सरकार की बेरुखी के बाद भी कोरोना वायरस से निपटने में सक्षम रहा है, उसी राजस्थान की राजधानी जयपुर में कोरोना वायरस का एक बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा और भीलवाड़ा मॉडल भी यहां फेल रहा। कारण स्पष्ट है – मुस्लिम बाहुल्य इलाको में स्वच्छता और सोशल distancing को अनदेखा करना।

जयपुर  की हालत कितनी खराब है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि रविवार दोपहर तक जयपुर में 338 पॉजिटिव केस मिले हैं। इनमें से 300 संक्रमित रामगंज और उससे सटे इलाकों के हैं। यानी एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में। दिन बढ़ने के साथ मरीजों की संख्या 200% की रफ्तार से बढ़ रही है। शनिवार को जयपुर में 80 नए केस मिले थे, इनमें से 79 रामगंज इलाके थे। इस इलाके में संक्रमण का पहला केस ओमान से लौटे एक व्यक्ति में मिला था। फिर यह आंकड़ा तेजी से बढ़ता गया। बाद में कुछ तब्लीगी जमात के कुछ लोग भी सामने आए।

सच कहें तो  जिस तरह से मुस्लिम बहुल इलाके कोरोना वायरस के हॉटस्पॉट उभर के सामने आ रहे हैं, वो दुखी कर देने वाली है। इन इलाकों के लोगों को सरकार का सहयोग करते हुए कोरोना को हराने के लिए सामने आना चाहिए।

 

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