जाहिल जमातियों से निपटने में ‘इस्लामिक पाकिस्तान’ ‘सेक्युलर भारत’ से कही बेहतर काम कर रहा है

पाकिस्तान में भी जमातियों ने कोहराम मचाया है

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वुहान वायरस के मामलों में अप्रत्याशित उछाल लाने में तब्लीगी जमात का बहुत बड़ा हाथ रहा है। दक्षिण एशिया से लेके दक्षिण पूर्वी एशिया के इस्लाम बहुल देशों में इसके कारण काफी लोग संक्रमित हुए हैं। भारत भी तब्लीगी जमात की बुरी नजर से बच नहीं पाया, और अभी कुल 16000 से ज़्यादा मामलों में करीब 30 से 40 प्रतिशत मरीज़ तब्लीगी जमात की देन है। परन्तु जहां भारत के बुद्धिजीवी इन जाहिलों को बचाने के लिए लगे पड़े हैं, तो वहीं पाकिस्तान में आश्चर्यजनक रूप से तब्लीगी जमात के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।

हाल ही में पाकिस्तानी अख़बार और न्यूज़ पोर्टल डॉन ने तब्लीगी जमात को निशाना बनाते हुए एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे तब्लीगी जमात के सदस्यों के उत्पात मचाने के कारण पंजाब प्रांत को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

परन्तु यह तो मात्र शुरुआत भर थी।  पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया ने अपने यूटयूब चैनल पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें तब्लीगी जमात के सदस्यों को बचाने के लिए उन्होंने ना केवल राणा अय्यूब, सबा नकवी और आरफा खानुम शेरवानी जैसे कट्टरपंथी इस्लामियों को आड़े हाथों लिया, अपितु एक एक प्वाइंट पर उन्होंने इनकी कलई भी खोली। उनके अनुसार जहां पाकिस्तान के लोग  तब्लीगी जमात के विरुद्ध मोर्चा संभाले हुए हैं और भारत में कुछ लोग इसका नाम लेने से भी कतराते हैं.

बता दें कि आरफा खानुम शेरवानी और राणा अय्यूब जैसे लोगों ने बिना किसी ठोस प्रमाण के तब्लीगी जमात के कोरोना जिहादियों को क्लीन चिट दे दी थी। जब गाज़ियाबाद के एक अस्पताल से ये खबर सामने आई कि गाज़ियाबाद में तब्लीगी जमात के सदस्यों को quarantine किया गया है, वे न सिर्फ अस्पतालों में उत्पात मचा रहे थे, बल्कि महिला स्टाफ, विशेषकर नर्सों के साथ बदतमीजी भी कर रहे हैं, और उनके साथ छेड़खानी भी कर रहे हैं।

परन्तु  द वायर की स्टार पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी को लगता है कि यह केंद्र सरकार की मुसलमानों को दबाने की कोई साजिश है। आरफा खानुम शेरवानी के अनुसार-

“तबलीगी इस देश के सबसे पढ़े लिखे नागरिकों में नहीं आते। पर मैं नहीं मानती कि वे डॉक्टरों पर थूकेंगे और महिलाओं के साथ अभद्रता कर सकते हैं। वे बड़े ही नेकदिल, निस्स्वार्थ मनुष्य हैं। प्लीज़, अपना यह प्रोपगैंडा बंद करें”।

लगता है पाकिस्तानी अवाम को तब्लीगी जमात का उत्पात बिल्कुल भी रास नहीं आया है। पाकिस्तान में कई मामले तब्लीगी जमात की ही देन है, और फैसलाबाद इकाई के अध्यक्ष मौलाना सुहैब रूमी इसी महामारी के कारण परलोक सिधार गए। फैसलाबाद के डेप्युटी कमिश्नर मुहम्मद अली के अनुसार इस मौलवी ने पिछले माह लाहौर में रेविंद में जमात के एक सम्मेलन में शामिल हुए थे। इस कारण उनके परिवार के पांच सदस्य भी संक्रमित पाए गए।

बता दें कि जमात के वार्षिक सम्मेलन में 10000 से ज़्यादा पाकिस्तानी लोगों ने हिस्सा लिया था। यह स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि स्वयं फवाद चौधरी जैसा कट्टरपंथी नेता इन्हें खरी खोटी सुना रहा है।

तब्लीगी जमात के कारण भारत में भी बहुत उत्पात मचा था। अलामी मरकज बंगलेवाली मस्जिद में 8000 से ज़्यादा इस्लामी मौलवियों का इकट्ठा होना अपनें आप में इस बात का सूचक है कि स्थिति कितनी नाजुक है।

यदि तब्लीगी जमात ने उत्पात ना मचाया होता तो भारत का कुल आंकड़ा शायद दक्षिण कोरिया के आसपास ही रहता। आलम तो यह है कि जहां तमिलनाडु में कुल संक्रमित मामलों का 84 प्रतिशत तब्लीगी जमात के सदस्यों की देन है। इसी प्रकार से तेलंगाना में भी कुल मामलों में 70 प्रतिशत से ज़्यादा तब्लीगी जमात के सदस्यों की देन है।

यूं तो पाकिस्तान से व्यवहारिकता की आशा करना माने घास में सुई ढूंढने के बराबर है। परन्तु इस बार तो पाकिस्तान ने तब्लीगी जमात के विरुद्ध मोर्चा निकालकर भारत के बुद्धिजीवियों को आइना दिखाने का काम किया है। एक तरफ भारत में इन्हें सिंगल सोर्स के नाम से खबरों में लिखा जा रहा है वहीं पाकिस्तान में खुलेआम इनके जमात का नाम लिखा जा रहा है.

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