‘€149 बिलियन दो पहले’, दुनियाभर के अच्छे प्रेस को पहले चीन ने खरीदा, अब वही चीन से पीछा छुड़ा रहे हैं

बहुत दुखद भईया!

चीन, मीडिया,

चीन के प्रभावशाली सैन्य रणनीतिकार और दार्शनिकों में से एक सुन त्ज़ु ने एक बार कहा था कि किसी शहर पर हमला करने के बजाय दुश्मन के दिमाग पर हमला करना बेहतर है। उनके मौत के सैकड़ों साल बाद आज भी चीनी सरकार इसी कथन का अनुसरण करती आई है। शी जिंपिंग आज भी वैश्विक मीडिया हाउस को अपने वश में करके यही कर रहे हैं। कई दिनों से मीडिया में चीन का ही प्रोपोगेंडा चल रहा है लेकिन कोरोना के बढ़ते प्रकोप ने यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की मीडिया हाउस को चीन के विरोध में जाने पर मजबूर कर दिया है।

दरअसल, जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद चीन को वैश्विक स्तर पर अपनी ताकत बढ़ाने को लेकर बल मिला है। इसके बाद ही चीनी सरकार ने अपनी कम्युनिस्ट राजनीतिक प्रणाली को आक्रामक रूप से बढ़ावा दिया। यही नहीं चीन ने ’कम्युनिस्ट शासन प्रणाली को चीनी विशेषताओं के साथ  दुनिया की राजनीतिक अर्थव्यवस्था के मॉडल के रूप में पेश किया और खूब प्रचार प्रसार करवाया। अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने के लिए, चीन ने दुनिया भर के मीडिया संस्थानों को खरीदना शुरू कर दिया जिससे अपने प्रतिद्वंदी देशों में चीन के लिए जगह बनाया जा सके।

चीन की यह कम्युनिस्ट सरकार हर साल दुनिया भर के देशों में, खासकर पश्चिमी देशों में प्रेस को अपने पक्ष में लगातार प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए अरबों डॉलर खर्च करती है। चीन ने इसके लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। मीडिया में चीन वॉच नामक सेक्शन को स्पोंसर करता है जहां पर चीन के बारे में लेख प्रकाशित किया जाता है। इन लेखों को चीन के पत्रकारों द्वारा लिखा जाता है, और इन लेखों को प्रकाशित करने के लिए समाचार पत्रों को चीन भुगतान करता है।

द डेली टेलीग्राफ, वॉल स्ट्रीट जर्नल और द न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे कई प्रभावशाली अखबारों में चीन प्रायोजित सेक्शन होता है। यह न केवल वैश्विक रूप से प्रभावशाली अंग्रेजी समाचार पत्रों में होता है, बल्कि मध्य और पूर्वी यूरोप में भी चीन का एक अलग सेक्शन का संचालन किया जाता है, जिसके लिए चीनी सरकार उन्हें अरबों का भुगतान करती है।

वहीं दूसरी तरफ दूसरी ओर, चीन दक्षिण एशियाई और उप-सहारा अफ्रीका जैसे गरीब क्षेत्रों के पत्रकारों को अपने देशों में चीनी प्रोपोगेंडा का प्रचार करने के लिए प्रशिक्षित करता है। 2016 से ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टी बकायदा विदेशी पत्रकारों को 10 महीने का एक कोर्स कराती है, और इसके लिए चीन उन पत्रकारों को पैसे देता है, उन्हें फ्री में चीन में घुमाता है और उनकी जबरदस्त खातिरदारी करता है।

इसके अलावा, कम्युनिस्ट सरकार फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और अन्य लोकप्रिय सोशल मीडिया साइटों पर चीन के अनुकूल कवरेज को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया विज्ञापन पर अरबों डॉलर खर्च करती है।

अरबों डॉलर के कारण कम्युनिस्ट सरकार को पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक लिबरल मीडिया ने मीडिया हाउस ने सर आँखों पर बैठाया हुआ है। पत्रकारों ने हमेशा चीनी राजनीतिक व्यवस्था और उसकी कंपनियों के बारे में सकारात्मक कहानियाँ लिख कर अपने कर्ज का भुगतान किया है।

लेकिन चीन का यह सारा प्रयास कोरोनावायरस महामारी के कारण एक ही झटके में बर्बाद हो गया। चीन के वुहान में उत्पन्न हुए अत्यधिक संक्रामक वायरस ने अभी तक 24 लाख लोगों को संक्रमित किया है और अब तक 1.65 लाख लोग मारे गए हैं। कोविड-19 ने दुनिया भर में, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में जन-जीवन और अर्थव्यवस्था को विनाश के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. इन दो क्षेत्रों में ही सबसे अधिक चीन समर्थित मीडिया अपना प्रोपोगेंडा चलाती हैं।

आम जनता के बीच चीन के खिलाफ बढ़ती भावना के साथ, पश्चिमी देशों में, विशेष रूप से यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की मीडिया ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार से अपना मुंह मोड़ लिया है। इनमें से अधिकांश अखबारों ने कम्युनिस्ट सरकार द्वारा प्रायोजित चीन के सेक्शन को ही रोक दिया है।

ब्रिटेन की प्रभावशाली अखबार द डेली टेलीग्राफ, जिसे “बोरिस जॉनसन का मुखपत्र” के रूप में भी जाना जाता है, ने चीन के सेक्शन को ही समाप्त कर दिया है जिसके तहत उसने ग्लोबल टाइम्स की कहानी प्रकाशित की थी। यह सभी को पता है कि ग्लोबल टाइम्स कम्युनिस्ट सरकार की अंग्रेजी भाषा का मुखपत्र है। बता दें कि द डेली टेलीग्राफ को इसके हर महीने 750,000 पाउंड का भुगतान किया जाता था। इस अखबार ने कई लेखों को भी हटा दिया था जिनका शीर्षक कुछ इस प्रकार था:

“Why are some framing China’s heroic efforts to stop coronavirus as inhumane?”;

“Traditional Chinese medicine ‘helps fight coronavirus’”;

और “Coronavirus outbreak is not an opportunity to score points against China”.

तब से इस अखबार ने चीन के खिलाफ कई कहानियों को प्रकाशित किया है जैसे कि एक लेख का शीर्षक था “The Left have become China’s useful covidiots “।

वॉल स्ट्रीट जर्नल में भी चीन के खिलाफ चलाया, जहां उसने चीन के अनुकूल लेख प्रकाशित की थी। लेकिन अभी इसे अपडेट नहीं किया जा रहा है। NYT ने भी इसी तरह के चीन के सेक्शन को बंद कर दिया और कहा कि प्रबंधन ने कहा है-

“किसी भी राज्य द्वारा संचालित मीडिया से ब्रांडेड सामग्री विज्ञापनों को स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया  गया है, जिसमें चाइना डेली शामिल है।”

पिछले कुछ दिनों में, एक्सप्रेस यूके, जर्मनी के बिल्ड, फ्रेंच और इतालवी मीडिया जैसे कई यूरोपीय मीडिया हाउसों ने चीन के खिलाफ लेख प्रकाशित किए हैं।

https://twitter.com/jonnajarian/status/1251897107239383041?s=20

जर्मनी का सबसे बड़ा टैब्लॉयड अखबार, बिल्ड,ने चीन को मुआवजा देने के विषय में एक लेख प्रकाशित किया जिसमें चीन से 130 बिलियन पाउंड भुगतान करने के लिए कहा गया था।

Bild के इस लेख के बाद चीन के स्टेट मीडिया ने जवाब दिया और कहा कि यह “ज़ेनोफोबिया और राष्ट्रवाद को उकसाता है”, जिसके बाद Bild के एडिटर-इन-चीफ जूलियन रीचेल्ट ने पलटवार करते हुए लिखा

शी जिनपिंग, आपकी सरकार और आपके वैज्ञानिकों को बहुत पहले पता होना चाहिए था कि कोरोनावायरस अत्यधिक संक्रामक है, लेकिन आपने दुनिया को इसके बारे न बता कर अंधेरे में छोड़ दी।”

दुनिया भर में अपने अनुकूल प्रेस खरीदने और अपने पक्ष में जनता की राय को बदलने के लिए चीन ने अरबों डॉलर खर्च किया और वर्षों का प्रयास किया, लेकिन यह सब एक झटका में नष्ट हो चुका है। कोरोनवायरस के बाद, चीन की अर्थव्यवस्था, उसकी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक राय कभी भी पहले की तरह नहीं रहने वाली है।

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