“अपना धंधा बंद करो”, अमेरिका ने चीनी मीडिया को दिया चीनी दूतावास का दर्जा, रहेगी पैनी नज़र

चुनावी साल में ट्रम्प ने उड़ाई चीनी मीडिया की धज्जियां

लगता है डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन की सारी हेकड़ी को मिट्टी में मिटाने की ठान ली है। इसीलिए उनका प्रशासन चुन-चुन कर चीन से हर मोर्चे पर बदला लेने को उद्यत है। अभी हाल ही में एक अहम निर्णय में डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार ने चार चीनी मीडिया पोर्टल्स को चीन के राजनैतिक मिशन के बराबर का दर्जा दिया है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक चार चीनी मीडिया पोर्टल्स को चीन के राज नैतिक मिशन के बराबर का दर्जा दिया गया है। इन पोर्टल्स के नाम हैं चाइना सेंट्रल टेलिविजन, चाइना न्यूज़ सर्विस, पीपुल्स डेली और ग्लोबल टाइम्स। इन चारों पोर्टल्स को चीन के राजनैतिक मिशन के बराबर का दर्जा देने का अर्थ है कि अब इन चारों पोर्टल्स को चीन के राजनैतिक मिशन अथवा दूतावास की भांति  अमेरिका में अपनी हर गतिविधि के बारे में विस्तार से बताना होगा, और अपने स्टाफ एवं रियल एस्टेट होल्डिंग्स की जानकारी भी अमेरिकी प्रशासन से साझा करनी पड़ेगी। यानि अब चीनी मीडिया को पत्रकारों वाली कोई सहूलियत नहीं मिलेगी, बल्कि उनके साथ चीनी राजनयिकों जैसा ही बर्ताव किया जाएगा।

इसके बारे में विस्तार से बताते हुए स्टेट विभाग के पूर्वी एशिया और पैसिफिक affairs के सचिव डेविड स्टिलवेल ने कहा, “ये संगठन कोई स्वतंत्र समाचार सेवा नहीं देते, अपितु  ये चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में रहते हैं। हमारे इस कदम से न केवल जानकारी के आदान-प्रदान में पारदर्शिता आएगी, अपितु चीन के मीडिया संगठनों को भी सीख मिलेगी”।

जब से वुहान वायरस ने दुनिया भर में पाँव पसारा है, तब से अमेरिका ने इस महामारी के जनक चीन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। अमेरिका भली भांति जानता है कि चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी किस तरह से अपनी राजकीय मीडिया द्वारा प्रोपेगेंंडा फैलाती है, इसीलिए अब ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चीनी मीडिया के विरुद्ध आक्रामक रुख अपनाया हुआ है, और ग्लोबल टाइम्स जैसे मीडिया पोर्टल इसके पहले शिकार नहीं है।

अभी कुछ ही हफ्तों पहले चीन के आधिकारिक मीडिया नेटवर्क चाइना ग्लोबल न्यूज़ नेटवर्क (सीजीटीएन) से यूएसए के स्टेट डिपार्टमेन्ट ने उसके अमेरिका में रहने वाले कर्मचारियों के सभी निजी जानकारी साझा करने को कहा है। ‘स्टेट डिपार्टमेन्ट OFM’ नामक इस प्रश्नावली में कर्मचारियों की निजी जानकारी मांगी गई, जिसमें कर्मचारियों के निजी जानकारी और उनके साथ रह रहे बीवी, बच्चे और अन्य रिशतेदारों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।

तीन महीनों में डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने दूसरी बार ऐसा निर्णय लिया है। इससे पहले फरवरी माह में अमेरिका के स्टेट विभाग ने बताया था कि चीन के पाँच मीडिया संगठन – शिनहुआ, सीजीटीएन, चाइना रेडियो, चाइना डेली और द पीपल्स डेली पर वही नियम लागू होंगे, जैसे कि चीन राजदूत पर लागू होते हैं, और इसी के उत्तर में चीनी सरकार ने अमेरिकी पोर्टल्स वाशिंगटन पोस्ट, न्यू यॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकारों को बाहर निकाल दिया।

वुहान वायरस के कारण वाशिंगटन और बीजिंग के बीच संबंध रसातल में है। पिछले वर्ष प्रारम्भ हुई ट्रेड वॉर ने पहले ही सम्बन्धों में काफी कड़वाहट घोल दी थी, और रही सही कसर चीन द्वारा फैलाये गए वुहान वायरस ने पूरी कर दी। ट्रम्प और उनके प्रशासन के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने बार बार चीन को ट्रेड सम्बन्धों का सम्मान न करने के लिए गंभीर परिणाम भुगतने के लिए कहा है। इसके अलावा जिस तरह से चीन नैतिकता और लोकतन्त्र को ठेंगे पर रख हाँग काँग की स्वायत्ता को कुचलने पर तुला हुआ है, वह भी अमेरिका से अछूता नहीं रहा है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका अब चीन से पाई पाई का हिसाब चुकता करने की राह पर चल चुका है।

 

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