करियर बर्बाद करने और वंशवाद को बेशर्मी से बढ़ावा देने के बाद अब करण जौहर सहानुभूति मांग रहे हैं

करण जौहर

कभी कभी कुछ लोगों के लिए ये कहा गया है कि वे जीते जी जितने खतरनाक नहीं होते, मृत्यु के पश्चात वे और भी अधिक खतरनाक हो जाते हैं, और ये बात दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के परिप्रेक्ष्य में बिलकुल सटीक बैठती है। जब से सुशांत की मृत्यु की खबर ने लाखों सिनेमा प्रेमियों को झकझोरा है, तब से बॉलीवुड के एलीट वर्ग की रातों की नींद उड़ी हुई है। लेकिन जिसे लाखों सिनेमा प्रेमियों के कोपभाजन का शिकार बनना पड़ा है, वो है नेपोटिज्म का परिचायक और फिल्म निर्माता एवं निर्देशक करण जौहर।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि करण जौहर ने काफी बेशर्मी से बॉलीवुड में वंशवाद को बढ़ावा दिया है, और इसी कारण से सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद उन्हें जनता के क्रोध का सामना करना पड़ा है। स्थिति तो यहाँ तक पहुँच गई कि करण को न केवल मुंबई फिल्म फेस्टिवल के बोर्ड से इस्तीफा देना पड़ा, बल्कि उनका विवादित चैट शो ‘कॉफी विद करण’ का भी बंद होना लगभग तय है। अब सूत्रों की मानें, तो करण जौहर इस पूरे प्रकरण से बुरी तरह टूट चुके हैं, और अक्सर फूट-फूट के रोते हैं।

बॉलीवुड हँगामा की रिपोर्ट के अनुसार, करण जौहर से जुड़े एक करीबी मित्र ने बताया, “करण अब बुरी तरह  टूट चुका है। सालों की ट्रोलिंग के कारण वो काफी सशक्त हो चुके थे, परंतु सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद से जो उन्होंने झेला है, उसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है”।

परंतु करण के करीबी मित्र यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे बताया, “करण इसलिए टूट चुके हैं, क्योंकि इस बार जो उनके सबसे करीब हैं, उन्हें निशाने पर लिया जा रहा है। उनके तीन वर्ष के बच्चों को मौत की धमकियाँ मिल रही हैं। एक सोशल मीडिया यूजर ने अनन्या पाण्डे को सुशांत सिंह राजपूत के एवज में आत्महत्या करने को कह दिया है, जबकि वह करण जौहर से किसी भी तरह संबन्धित नहीं हैं”।

सुशांत की मृत्यु से जुड़े स्पष्टीकरण पर करण के करीबी मित्र ने आगे बताया, “करण अब पहले जैसा नहीं रहा। उसके लड़ने की क्षमता ही जैसे खत्म हो चुकी है। उससे बात करने में काफी दुख महसूस हुआ है। हर समय रोता रहता है। वो रोते रोते पूछता है कि मैंने ऐसा क्या किया है, जिसके लिए मुझे इतनी उलाहना और गालियां मिली है?”

प्रिय करण जौहर, यदि आपने कभी वंशवाद को बढ़ावा नहीं दिया होता, और सुशांत सिंह राजपूत जैसे प्रतिभावान अभिनेताओं को अपमानित नहीं किया होता, तो शायद आपका प्रश्न भी उचित था। परंतु जिस तरह से करण जौहर जैसे लोगों ने बॉलीवुड को अपनी निजी संपत्ति मानकर घटिया कंटैंट, औसत दर्जे के अभिनेताओं और कुत्सित प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देते आए हैं, उस हिसाब से करण जौहर का ये रोना धोना ड्रामा अधिक लगता है। वैसे भी करण ने एक समय खुद कहा था कि “वे अपने आप को सहानुभूति देने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे, और वे दूसरों को भी अपनी तरह ‘सेल्फ पिटी स्पा’ यानि खुद को सहानुभूति देने का उपयोग करने की सलाह देंगे।”

इसके अलावा करण जौहर ने किस प्रकार से वंशवाद को बढ़ावा देने के नाम पर प्रतिभावान अभिनेताओं को अपमानित किया है, ये सुशांत सिंह राजपूत के अलावा प्रख्यात अभिनेता आयुष्मान खुराना भी भली भांति जानते हैं। अपनी आत्मकथा में उन्होंने बताया कि कैसे जब उन्हें करण ने धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले काम करने का प्रस्ताव दिया, तो उन्होंने खुशी खुशी उस प्रस्ताव को स्वीकार लिया, पर बाद में जब उन्होंने इसी परिप्रेक्ष्य में फोन किया, तो उन्हें बताया गया कि धर्मा के टीम बाहरियों के साथ काम नहीं करती।

सच कहें तो करण जौहर के साथ अभी जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए वे खुद जिम्मेदार हैं। कईयों का करियर बर्बाद करने के बाद और फिल्म उद्योग में अकर्मण्यता को बढ़ावा देने के बाद भी करण जौहर का जनता से सहानुभूति की आशा करना काफी हास्यास्पद है, और इनपर एक ही कहावत चरितार्थ होती है, “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत”।

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