‘ये गैर इस्लामिक है इसे तोड़ दो’, पाकिस्तानी मौलवी के इशारे पर गौतम बुद्ध की दुर्लभ मूर्ति को तोड़ दिया गया

एक बार फिर बामीयान दोहराया गया?

पाकिस्तान

बामियान की त्रासदी याद है? हाँ वही बामियान, जहां पर स्थित भगवान गौतम बुद्ध की भीमकाय मूर्तियों को तालिबानी आतंकियों ने ध्वस्त कर दिया था? अब एक बार फिर उस त्रासदी को दोहराया गया है, और इस बार साक्षी बना है खैबर पख्तूनख्वा का प्रांत, जहां एक मकान की नींव खोदते समय निकाली गई एक दुर्लभ मूर्ति को कट्टरपंथी मुसलमानों ने बुरी तरह तोड़ दिया।

अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई है, जिसमें पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के मर्दन जिले में एक मकान की नींव खोदते समय एक मूर्ति पाई गई। ये मूर्ति गौतम बुद्ध की थी, और इसे देखते ही एक व्यक्ति ने पूछा, “ये तो बड़ी अजीब मूर्ति है, ये कोई अंग्रेज़ है या फिर हिन्दू?” जैसे ही किसी ने बोला हिन्दू, तो वहाँ खड़े एक मौलवी ने मूर्ति को गैर इस्लामिक करार देते हुए उसे तोड़ने का आदेश दिया गया। आदेश मिलते ही मूर्ति को बुरी तरह छेनी हथौड़े से तोड़कर छिन्न भिन्न कर दिया गया।

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जब तक पाकिस्तान का पुरातत्व विभाग पहुँच पाता, तब तक मूर्ति छिन्न भिन्न हो चुकी थी। मूर्ति के अवशेषों को कार्बन डेटिंग के लिए जब भेजा गया, तो अफसर हैरत में पड़ गए। गौतम बुद्ध की वो दुर्लभ मूर्ति न केवल 1700 से 1800 वर्ष पुरानी थी, बल्कि गांधार राज्य से भी संबन्धित थी, जिसे संभावित कुषाण वंश के कार्यकाल में निर्मित किया गया था। फिलहाल के लिए पुरातत्व विभाग के निर्देशनुसार अभियुक्तों को हिरासत में लिया गया है और जल्द ही उनपर कार्रवाई भी की जाएगी।

लेकिन इस दुर्लभ मूर्ति के विध्वंस से पाकिस्तान ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि आखिर क्यों ये देश कभी कभी नर्क का दूसरा नाम समझा जाता है। यहाँ गैर मुसलमानों के लिए कोई मान सम्मान नहीं है, उन्हें अक्सर ईश निंदा के झूठे आरोप में हिरासत में लिया जाता है, उनकी बहू बेटियों को अगवा कर जबरन इस्लाम में परिवर्तित किया जाता है, और कभी कभी तो कई लोगों को मौत के घाट भी उतार दिया जाता है। विश्वास नहीं होता तो ननकाना साहिब का ही उदाहरण देख लीजिये।

2020 के प्रारम्भ में  गुरुनानक के जन्मस्थान ननकाना साहिब के गुरुद्वारे पर हिंसक भीड़ ने जमकर पत्थरबाजी की, और उसे तोड़ गिराने की धमकियाँ भी दी। एक व्यक्ति ने तो यहाँ तक कह दिया की यहाँ पर किसी सिख को नहीं रहने दिया जाएगा और इस जगह का नाम बदलकर ग़ुलाम ए मुस्तफा रख दिया जाएगा। ये सारी घटना केवल इसलिए हुई थी क्योंकि ननकाना साहिब के ग्रंथी की पुत्री  जगजीत कौर को अगवा कर उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया था।

सूत्रों की माने तो पीड़िता को उसके परिवार के पास जब भेजा गया, तो उसे उसके परिवार ने वापिस भेजने से मना कर दिया था। इसपर अपहरणकर्ता मुहम्मद हसन और उसके परिवार ने भीड़ को इकट्ठा कर ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर धावा बोल दिया और वहां जमकर पत्थरबाजी की। इतना ही नहीं, अभी कुछ ही हफ्तों पहले इस्लामाबाद में एक हिन्दू मंदिर को बनाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन कट्टरपंथी मुसलमानों को ये निर्णय नहीं भाया और उन्होंने मंदिर की नींव को तोड़कर ही दम लिया।

इन उदाहरणों से आप साफ समझ सकते हैं कि पाकिस्तान में गैर मुसलमानों की क्या हालत है। सच कहें तो मर्दन जिले की घटना से एक बार फिर सिद्ध हुआ है कि आखिर क्यों पाकिस्तान की धर्मांधता के लिए किसी भी प्रकार की निंदा कम पड़ेगी।

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