“हमारी सेना आपके साथ खड़ी है”, भारत-चीन विवाद में फ्रांस की रक्षा मंत्री उतरी भारत के समर्थन में

फ्रांस ने भारत को दिया हरसंभव सहायता का आश्वासन

फ्रांस

PC: Punjab Kesari

जब से चीन ने गलवान घाटी में तनाव को बढ़ाया है, तभी से भारत के मोर्चा संभालते ही कई देश भारत की सहायता हेतु आगे आए हैं। अब फ्रांस ने भी संकेत दिए हैं कि स्थिति कैसी भी हो, वह भारत का न केवल समर्थन करेगा, अपितु भारत को हरसंभव सहायता भी पहुंचाएगा।

इसी परिप्रेक्ष्य में फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिखते हुए गलवान घाटी के हमले में वीरगति को प्राप्त हुए 20 भारतीय सैनिकों के प्रति सांत्वना जताते हुए लिखा,

“ये सैनिकों, उनके परिवारों और देश के लिए बहुत बड़ा आघात है। ऐसे संकट की घड़ी में मैं अपने देश की ओर से और पूरी फ्रांस सेना की ओर से इन सैनिकों के परिवारों के प्रति अपनी सांत्वना प्रकट करती हूँ”। इसके अलावा फ्लोरेंस पार्ली ने भारत आने की भी इच्छा जताई है, और ये भी भरोसा दिलाया है कि फ्रांस आवश्यकता पड़ने पर भारत को हरसंभव सहायता देने की बात भी की है।

गौरतलब है कि गलवान घाटी में भारत-चीन की झड़प के बाद से ही फ्रांस भारत को हर प्रकार से सहायता करने को तैयार है। भारत की मांग पर फ्रांस ने समय से पहले राफेल फाइटर जेट्स की पहली खेप भेजने को भी अपनी स्वीकृति दी है। इतना ही नहीं, इकोनॉमिक टाइम्स की की रिपोर्ट की माने तो फाइटर जेट्स के लिए उपयोग में लाने जाने वाले एयर टू एयर एवं एयर टू ग्राउन्ड मिसाइल्स समय से पहले भेजने को तैयार भी हो चुकी हैं।

परंतु फ्रांस इतने पर नहीं रुका। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस राफेल जेट्स समय से पहले भेजेगा, जिससे उन्हें युद्ध में उतारने में अधिक आसानी होगी, क्योंकि METEOR aur SCALP जैसे अत्याधुनिक मिसाइल्स, जो आम तौर पर फ्रांस की वायुसेना के लिए आरक्षित थे, अब राफेल जेट्स के साथ भारत भेजे आयेंगे। पहले ये काम फाइटर जेट्स की पहली खेप डिलीवर होने के कई महीनों बाद होना था।

सच कहें तो चीन द्वारा एलएसी पर तनाव बढ़ाने के साथ ही उसने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है, क्योंकि नई दिल्ली के समर्थन में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि विश्व के लगभग सभी शक्तिशाली देश सामने आए हैं, चाहे वो अमेरिका हो, रूस हो, जापान हो, या फिर औस्ट्रेलिया ही क्यों न हो।

रूस ने भारत को 1 बिलियन डॉलर के मूल्य का गोला बारूद, एंटी टैंक मिसाइल्स, एयर डिफेंस सिस्टम, एवं एस 400 एयर डिफेंस सिस्टम्स को तत्काल प्रभाव से भारत भेजने पर अपनी स्वीकृति जताई है। इसके लिए उन्होंने राजनाथ सिंह के साथ एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर भी किया है।

इसके अलावा अमेरिका ने भी इंटेलिजेंस में सहायता से लेकर ऊंचे इलाकों में युद्ध के लिए अहम precision आर्टिलेरी राउंड को तत्काल प्रभाव से भारत भेजने पर भी अपनी सहमति जताई है। अब जब रूस, अमेरिका, इज़राइल जैसे देशों ने भारत की सहायता करने का वादा किया है, तो अब फ्रांस ने भी ये स्पष्ट कर दिया है कि इस युद्ध में वह किसका साथ दे रहा है। ऐसे में अब भारत न केवल चीन से दो कदम आगे चल रहा है, और यदि चीन नहीं सुधरा, तो उसके एक गलत कदम से उसका पूरा प्रभुत्व मिट्टी में मिलना तय है।

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