‘राहुल गांधी की बजाय अब दूसरा विकल्प देखना चाहिए’, अब शशि थरूर पार्टी अध्यक्ष बनना चाहते हैं

संजय झा के बाद कहीं थरूर की बारी तो नहीं!

शशि

(pc -theprint )

2019 चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गाँधी ने इस्तीफा दे दिया, तब पार्टी ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बना दिया था। उनका एक वर्ष का कार्यकाल सोमवार को पूरा हो गया है, लेकिन अब तक नए अध्यक्ष का चुनाव करने में पार्टी असमर्थ रही है। राहुल गांधी ने पदभार लेने से मना कर दिया है, फिर भी कांग्रेस के नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि निकट भविष्य में पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव कर लेगी। लेकिन जबसे पार्टी में गांधी परिवार के बाहर किसी नेतृत्व की बात सोची गई है तब से कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने अपना नाम आगे करने का प्रयास किया है। थरूर एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने खुद को कांग्रेस के सबसे पढ़े लिखे और योग्य नेता के तौर पर पेश किया है।

थरूर ने बयान देते हुए कहा है कि “पार्टी के लक्ष्यहीन और दिशाहीन होने की लोगों में बढ़ती धारणा को खत्म करने के लिए इसे एक पूर्णकालिक अध्यक्ष ढूंढ़ने की प्रक्रिया अवश्य ही तेज करना चाहिए। उन्हें निश्चित रूप से ऐसा लगता है कि पार्टी का एक बार फिर से नेतृत्व करने के लिए राहुल गांधी के पास साहस, क्षमता और योग्यता है, लेकिन यदि वह ऐसा करना नहीं चाहते हैं तो पार्टी को एक नया अध्यक्ष चुनने की दिशा में अवश्य ही आगे बढ़ना चाहिए। मैंने पिछले साल अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया जी की नियुक्ति का स्वागत किया था, लेकिन मेरा मानना है कि उनसे अनश्चितकाल तक इस जिम्मेदारी को उठाने की उम्मीद करना उचित नहीं होगा।“

अपने बयान के जरिये शशि थरूर ने ये संकेत देने का प्रयास किया है कि यदि राहुल गांधी पार्टी का नेतृत्व नहीं करना चाहते तो पार्टी को अन्य विकल्प के तौर पर उन्हें भी एक अवसर देना चाहिए। परन्तु एक सच्चाई ये भी है कि कांग्रेस पार्टी कभी गांधी परिवार से अन्य किसी को पार्टी का अध्यक्ष पद नहीं देगी, इससे गांधी परिवार का वर्चस्व पार्टी में कम हो जायेगा। ऐसे में पार्टी के कई वफादार नेता राहुल गांधी को मनाने में लगे हैं।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने इस तरह से खुद को अध्यक्ष पद के लिए विकल्प के तौर पर पेश किया हो। शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष बनने का ख्वाब तो पहले से ही देखते हैं। राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद भी उन्होंने कुछ ऐसा ही प्रयास किया था। तब उन्होंने कहा था, ‘मैंने जीवनभर के लिए कांग्रेस नहीं जॉइन की है। मैं पार्टी के साथ इसलिए हूँ क्योंकि ये एक समावेशी एवं प्रगतिशील भारत के लिए सबसे उपयुक्त पार्टी है। इन विचारों को हम कुछ सीटों या वोटों के लिए बलि नहीं चढ़ा सकते।‘

अपने बयान से उन्होंने तब पार्टी को ये संकेत देने का प्रयास किया था कि कांग्रेस अपने ‘समावेशी भारत के विचारों’ पर आजकल अमल नहीं कर रही है, परंतु वो आज भी उसे फॉलो करते हैं। इसी के साथ उनका संकेत इस ओर भी था कि भविष्य में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए वो एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं। परन्तु तब भी पार्टी ने उनकी बातों को नजअंदाज किया था। इस बार अगर शशि थरूर पार्टी पर और दबाव बनाने का प्रयास करते हैं तो शायद उन्हें भी ‘पार्टी लाइन से हटकर’ विचार प्रकट करने के लिए परिणाम भुगतने पड़े जिस तरह से संजय झा भुगतना पड़ा है।

ऐसे में शशि थरूर की बातों पर आलाकमान क्या रुख अपनाएगा यह पता नहीं। वैसे इसके पहले भी एक बार उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया था। उन्होंने पाकिस्तान को कश्मीर पर जमकर लताड़ा था और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ भी की थी। इसके बाद केरल कांग्रेस ने उन्हें समन किया था। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कांग्रेस पार्टी उनके संकेत को किस रूप में लेती है।

Exit mobile version