महाराष्ट्र में पवारों का डबल गेम: बाप का गठबंधन से प्यार तो वहीं बेटे का गठबंधन पर वार

कांग्रेस और शिवसेना के साथ बढ़िया खेल खेला जा रहा है

महाराष्ट्र

राजनीति एक बड़ा ही विचित्र खेल है। यहाँ विजय प्राप्त करने के लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं होते। कुछ लोग अपनी प्रतिभा और अपने परिश्रम से राजनीति के शिखर तक पहुँचते हैं, तो कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनहे सभी सुविधाएं मिलने के बाद भी राजनीति में कभी भी सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनके राजनीतिक सूझबूझ और कौशल ऐसे हैं कि यदि ये बुरे काम भी करे, तो इनकी कार्यकुशलता देख जनता यही कहेगी – मानना पड़ेगा, सही खेल गए तुम लोग!कुछ ऐसा ही है पवार परिवार। महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का वही स्थान है, जो राष्ट्रीय राजनीति में गांधी वाड्रा परिवार का है और क्षेत्रीय राजनीति में यादव परिवार [मुलायम और लालू दोनों], रेड्डी परिवार एवं सिंधिया परिवार का है। अभी हाल ही में एनसीपी के नेता और अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार ने ये कहकर तहलका मचा दिया कि सुशांत सिंह राजपूत में सरकार को जनादेश का सम्मान करते हुए सीबीआई से निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

अब इस पर जब शरद पवार से राय मांगी गई, तो उन्होने दो टूक बताया, “पार्थ पवार अभी बच्चा है, और अनुभवहीन है। इसलिए मैं उसकी मांग पर कौड़ी भर कीमत भी नहीं देता।“ इस बयान से जहां मीडिया के अनुसार अजित पवार नाराज़ बताए जा रहे हैं, तो वहीं पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने इस प्रकरण से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह पार्थ के निजी बयान है।

परंतु पार्थ ने ऐसा भी क्या बोला था कि स्वयं शरद पवार और सुप्रिया सुले को सार्वजनिक रूप से बयान देना पड़ा? दरअसल पार्थ ने महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख को पत्र लिखते हुए बोला था कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए। पत्र के एक अंश अनुसार, “सुशांत सिंह राजपूत जैसे प्रतिभावान अभिनेता की मृत्यु ने पूरे देश में कोहराम मचा दिया है। बाकी जनता की तरह मैं भी इस असामयिक मृत्यु से बहुत दुखी हूँ और इसलिए मैं जनादेश का सम्मान करते हुए यह चाहता हूँ कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।”

परंतु एक बयान पर शायद ही किसी ने ध्यान दिया, जिससे पवार परिवार का पूरा खेल स्पष्ट हो जाता है। शरद पवार ने सीबीआई जांच के विषय में कहा था, “हमारे पोते (भतीजे के बेटे) ने जो कुछ भी कहा है हम उसे तनिक भी महत्व नहीं देते हैं। वह अभी अपरिपक्व हैं….मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि हमें महाराष्ट्र पुलिस पर 100 फीसदी भरोसा है। लेकिन, अगर कोई अब भी चाहता है कि मामले की जांच सीबीआई से हो तो इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं है।“

अब सीबीआई की जांच का विरोध न करने की बात करना कोई आम बात नहीं है। जब शिवसेना हाथ धोके सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के पीछे पड़ी हो, तो ऐसे में सीबीआई जांच का विरोध न करने की बात सार्वजनिक रूप से बोलना एक स्पष्ट संदेश देता है – पवार परिवार की राजनीति का कोई तोड़ नहीं। जहां उन्हे अपना लाभ दिखेगा, वहीं वे निवेश करेंगे।

परंतु ऐसा क्यों? दरअसल शरद पवार ये भली भांति जानते हैं कि वुहान वायरस की आपदा खत्म होने के पश्चात महा विकास अघाड़ी सरकार के पास ज़्यादा दिन नहीं बचे हैं। लेकिन वे न तो अपनी छवि खराब करना चाहते हैं, और न ही वे ये संदेश देना चाहते हैं कि उन्होने उद्धव ठाकरे से सभी प्रकार के नाते तोड़ लिए हैं। ऐसे में शरद पवार ने अपने बयान से वो गुगली डाली है जिसे देख राजनीति के बड़े बड़े सूरमा भी चक्कर खा जाएँ। एक ही बयान से उन्होने जनता की मांग का भी समर्थन किया और उद्धव ठाकरे सरकार का भी मान रखा।

सच कहें तो शरद पवार ने चाहे जितने अच्छे-बुरे कर्म किए हों, पर उनकी राजनीतिक सूझबूझ पर कोई संदेह नहीं कर सकता। इसीलिए वे ‘येन केन प्रकारेण’ कई वर्षों से महाराष्ट्र की सत्ता में अपना एक अलग, पर अहम स्थान बनाए हुए हैं और इसीलिए उनका वर्तमान बयान उनकी राजनीतिक सूझबूझ का एक बेहतरीन उदाहरण भी देता है।

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