और ये हुआ GOAL- प्रीमियर लीग ने चीन के साथ अपने 490 मिलियन यूरो के करार को रद्द कर दिया

प्रीमियर लीग ने शानदार तरीके से चीन को Knock Out कर दिया

प्रीमियर लीग

वुहान वायरस की महामारी फैलने के बाद से चीन को कूटनीतिक और आर्थिक तौर पर काफी नुकसान उठाना पड़ा है। कभी जो देश उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे, आज वही मुंह मोड़ते फिर रहे हैं। इतना ही नहीं, चीन से अब कोई किसी भी प्रकार का संबंध नहीं रखना चाहता है। इसी का एक उदाहरण अभी हाल ही में देखने को मिला जब इंग्लिश प्रीमियर लीग ने चीनी टीवी कंपनी से टीवी राइट्स से जुड़े एक अहम डील को रद्द कर दिया।

द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, सुनिंग होल्डिंग्स नामक चीनी कंपनी के अंतर्गत काम करने वाली डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग कंपनी पीपीटीवी के साथ इंग्लिश प्रीमियर लीग ने डिजिटल प्रीमियर के लिए एक कांट्रैक्ट पिछले साल किया था, जिसके एवज में PPTV को 564 मिलियन पाउंड का भुगतान करना था, जिसके लिए 2019 से 2022 तक दोनों पक्षों के बीच अनुबंध भी हुआ था। परंतु PPTV ने मार्च में 160 मिलियन पाउंड का बकाया भुगतान देने से मना कर दिया था। फलस्वरूप प्रीमियर लीग को अपना अनुबंध रद्द करने पर विवश होना पड़ा।

इसके बारे में सूचना देते हुए एक प्रेस वार्ता में प्रीमियर लीग के आयोजकों ने कहा, “प्रीमियर लीग इस बात की पुष्टि करती है कि चीन में प्रीमियर लीग के कवरेज को लेकर किया गया हमारा अनुबंध अब से रद्द हो चुका है।’’ ऐसा करके प्रीमियर लीग ने आधिकारिक रूप से चीनी निवेश से अपने आप को मुक्त किया है।

जब से चीन में उत्पन्न वुहान वायरस दुनिया भर में फैला है, और चीन समस्या सुलझाने के बजाए अपनी औपनिवेशिक मानसिकता का भद्दा प्रदर्शन कर रहा है, तब से उसकी वैश्विक और आर्थिक छवि, दोनों को ही ज़बरदस्त नुकसान पहुंचा है। अभी कुछ ही हफ्तों पहले जब भारत की बीसीसीआई ने आईपीएल के वर्तमान संस्करण के लिए चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो के साथ अपना करार जारी रखने का निर्णय किया, तो देशभर में काफी हो-हल्ला मचा था। फलस्वरूप वीवो को आईपीएल के संस्करण के स्पॉन्सरशिप से हटना पड़ा।

लेकिन प्रीमियर लीग के आयोजकों द्वारा चीनी निवेश को नकारना अपने आप में स्पष्ट करता है कि जो अभियान भारत ने टिक-टॉक सहित 59 एप्स को प्रतिबंधित कर शुरू किया था, वो अब कितना विशाल हो चुका है। यूं तो अमेरिका ने Huawei जैसी टेक कंपनियों के विरुद्ध विश्वव्यापी अभियान चलाकर पहले ही इस आंदोलन की नींव रख दी थी, लेकिन भारत द्वारा 59 चीनी एप्स पर पूर्णतया प्रतिबंध लगते ही दुनिया भर के अन्य देशों ने अपने-अपने शैली में चीन को दुलत्ती देनी शुरू कर दी।

उदाहरण के लिए चीन को उसकी औकात दिखाने के लिए अभी हाल ही में इंडोनेशिया ने एक अनोखा उपाय निकाला है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपे एक लेख के अनुसार, इंडोनेशिया ने चीन द्वारा प्रायोजित अखबारों को न सिर्फ वित्तीय सहायता दिये जाने पर रोक लगा दी है, बल्कि अपने पूर्व शासक सुहर्तो की तर्ज पर चीन को कूटनीतिक मोर्चे पर अलग-थलग भी करना चाहता है। अब जिस तरह से इंग्लिश प्रीमियर लीग ने चीन को दुलत्ती मारी है, वो कई अहम प्रायोजकों और निवेशकों को भी एक नई राह दिखा सकता है, और जल्द ही चीन को वैश्विक तौर पर हर मोर्चे से अलग करने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा।

 

 

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