‘अफसर बाबुओं का रौब अब और नहीं’, कर्मयोगी मिशन के जरिये अब मोदी सरकार ऐसे सुस्त बाबुओं को करेगी आउट

कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे अफसर बाबू!

कर्मयोगी

देश की केंद्र सरकार नौकरशाही को सुधारने की दिशा में बड़ी तेजी से और दृढ़ता से काम कर रही है। इसी कड़ी में अब मोदी सरकार ने देश के सिविल सरवेंट्स के लिए “कर्मयोगी” मिशन को मंजूरी दी है। इस मिशन के तहत नियुक्ति के बाद सिविल अधिकारियों समेत अन्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें खास ट्रेनिंग दी जाएगी। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मिशन ‘कर्मयोगी’ के जरिए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपना प्रदर्शन बेहतर करने का मौका मिलगा। केंद्रीय मंत्री के अनुसार सरकार के विभिन्न कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यक्षमता कैसे बढ़े, इसके लिए क्षमतावर्धन का लगातार कार्यक्रम चलेगा।

“मिशन कर्मयोगी” के तहत सिविल सेवा अधिकारियों को क्रिएटिव, कल्पनाशील, इनोवेटिव, प्रो-एक्टिव, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और तकनीकी तौर पर दक्ष बनाकर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा। अधिकारियों की स्किल बढ़ाना और उन्हें बेहतर करना इस योजना का प्रमुख लक्ष्य होगा। भर्ती होने के बाद कर्मचारियों, अधिकारियों की क्षमता में लगातार किस तरह से बढ़ोतरी की जाए, इसके लिए राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) के तहत इस मिशन को शुरू किया गया है।

मोदी सरकार ने नौकरशाही में सुधार करने के कार्य को अपनी प्राथमिकताओं में से एक रखा है। नौकरशाही में शुरू से ही आलस्य, लाल-फ़ीताशाही और कामचोरी विद्यमान रही है। मिशन कर्मयोगी को लॉंच कर केंद्र सरकार बाबुओं की इन कमजोरियों को दूर करने की कोशिश करेगी। इससे पहले केंद्र सरकार सिविल सेवाओं के लिए Lateral Entry Scheme के जरिये 9 पेशेवरों को Joint Secretary के पद पर नियुक्त कर चुकी है। Lateral Entry Scheme के जरिये सरकार ने नौकरशाही में अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आने का मौका दिया है। इस स्कीम के जरिये 40 साल से ऊपर के और 15 साल से अधिक के अनुभव के साथ विशेषज्ञ देश की नौकरशाही में योगदान दे सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने शुरू से ही चुस्त नौकरशाही को बेहतर प्रशासन का केंद्र माना है। ये सब बड़े कदम दिखाते हैं कि मोदी सरकार असल में अपने उन वादों को लेकर गंभीर है और उन्हें पूरा करने की दिशा में कदम उठा रही है। मोदी सरकार अब Dept of Personnel and Training को भी दो विभागों में बांटने की योजना पर काम कर रही है। अभी DoPT ही देश में भर्ती करने, सिविल सेवकों के रेगुलेशन, उनकी पोस्टिंग, ट्रांसफर और ट्रेनिंग के लिए जिम्मेदार होता है। सरकार Personnel और training को अलग-अलग विभागों को सौंपना चाहती है, ताकि Training पर और अधिक ज़ोर दिया जा सके।

अभी तक देश के इन बाबुओं को “सक्रियता” से काम करने की कोई ज़रूरत ही महसूस नहीं होती थी। ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हें कभी नौकरी खोने का खतरा होता ही नहीं था। हालांकि, मोदी सरकार के नए सुधारों के बाद इन बाबुओं में भी नौकरी खोने का खतरा पैदा हो गया है, जिसके कारण उनकी कार्यशैली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पिछले वर्ष जुलाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2014 में मोदी सरकार के बनते ही नियमों के तहत 1 लाख से अधिक अफसरों की कार्यप्रणाली पर नज़र रखी गयी थी और करीब 312 सरकारी अधिकारियों को जनहित में सेवानिवृत्त भी किया गया था। साथ ही पिछले वर्ष अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय ने भी अपने अफसरों की कार्यप्रणाली पर नज़र रखने के लिए यूएस विजिलेंस यानी अंडर सेक्रेटरी विजिलेंस का गठन किया था जिसने अफसरों की कार्यप्रणाली को जांचने के लिए ‘3के’ फार्मूला तैयार किया था। ‘3के’ यानी ‘कामकाज, करेक्टर, करप्शन’।

सरकार लगातार इन सुधार कार्यों को अंजाम देती जा रही है, तो वहीं विपक्ष  और खासकर कांग्रेस इन कदमों का विरोध करती रही है। कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर भी राजनीति ही देखने को मिली है। हालांकि, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि केंद्र सरकार के ये कदम देश की नौकरशाही को सुधारने में अहम भूमिका अदा करेंगे।

 

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