“अपने Rice bag उठाओ और दफ़ा हो जाओ”, धर्मांतरण कर रहे 4 ईसाई NGOs पर चला अमित शाह का चाबुक

बहुत बढ़िया शाह जी!

FCRA

अवैध धर्मांतरण के काले धंधे पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह कमर कस चुकी है। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 4 मिशनरी संगठन के FCRA लाइसेंस सस्पेंड कर दिये हैं, जिनमें से दो झारखंड में स्थित हैं, एक मणिपुर में और एक मुंबई में।

द हिन्दू की एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में चार मिशनरी संगठनों के FCRA लाइसेन्स  निलंबित किए हैं, जिनमें झारखंड में स्थित Ecreosoculis North Western Gossner Evangelical, मणिपुर में स्थित Evangelical Churches Association (ECA) , झारखंड में बसे Northern Evangelical Lutheran Church और मुंबई में स्थित New Life Fellowship Association (NLFA) भी शामिल है। इन मिशनरी संगठनों में से एक जर्मनी से, एक वेल्स से, एक न्यूज़ीलैंड से तो एक अमेरिका से संबंध रखता है। बता दें कि न्यूजीलैंड में New Life चर्चों के मिशनरियों के आगमन के बाद 1964 में New Life Fellowship Association भारत में अस्तित्व में आया था। अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय के डाटा के अनुसार New Life Fellowship Association का एफसीआरए लाइसेंस 10 फरवरी को निलंबित ही कर दिया गया था। बता दें कि गैर-सरकारी संस्थाओं को विदेशी चंदा/अंशदान प्राप्त करने के लिये FCRA लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होता है।

गृह मंत्रालय के इस निर्णय के पीछे का प्रमुख कारण इन संगठनों द्वारा कथित तौर पर अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। बता दें कि ईसाई मिशनरी संगठनों द्वारा अवैध धर्मांतरण पूर्वी और दक्षिण भारत में बड़े स्तर पर किया जाता है। जहां वे केरल, मिज़ोरम जैसे राज्यों में काफी हद तक ईसाई धर्म में अवैध तरह से धर्मांतरण कराने में सफल रहे, तो वहीं आंध्र प्रदेश, गोवा, तमिलनाडु, मेघालय जैसे राज्यों में उन्हें अच्छी ख़ासी छूट मिली हुई है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने अवैध धर्मांतरण के विषय पर आँखें नहीं मूँद रखी है, और वर्तमान निर्णय उसी का प्रतीक है। सच कहें तो जब से केंद्र सरकार ने 2014 में सत्ता संभाली है, तब से एनजीओ को विदेशी फण्ड्स के नाम पर भ्रष्टाचार करने की जो छूट मिली हुई थी, वो अब लगभग बंद हो चुकी है। उदाहरण के लिए वर्ष 2016 में भी FCRA के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण लगभग 20,000 गैर-सरकारी संस्थाओं के लाइसेंस रद्द किये गए थे। वहीं,  वर्ष 2017 में अमेरिका में बसे ईसाई डोनर संस्था Compassion International के लाइसेन्स को केंद्र सरकार ने इसलिए रद्द किया था, क्योंकि वह अवैध धर्मांतरण में लिप्त पाया गया था। फिलहाल, एफसीआरए के तहत 22,457 NGOs या अन्य संगठन FCRA के तहत पंजीकृत हैं, जबकि 20,674 NGOs का FCRA लाइसेंस रद्द किया जा चुका है और 6,702 NGOs के FCRA लाइसेंस नवीनीकरण के अभाव में समाप्त किये गए हैं।

ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र सरकार ने धीरे-धीरे ही सही, पर अवैध धर्मांतरण के गोरखधंधे पर हंटर चटकाना शुरू कर दिया है, और मिशनरी संगठनों के FCRA लाइसेंसे रद्द करना इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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