बिहार को BJP का पहला मुख्यमंत्री दिलाने में चिराग पासवान बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं

चिराग पासवान

बिहार की राजनीति में बीजेपी के लिए चिराग पासवान बनाम नीतीश कुमार की लड़ाई फायदेमंद साबित हो सकती है। बीजेपी-जेडीयू वाले एनडीए गठबंधन में एलजेपी को तो जगह मिलेगी या नहीं ये फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन इन बीजेपी-जेडीयू के 50-50 वाले खेल में फायदा बीजेपी का हो सकता है, क्योंकि चिराग ने ऐलान कर दिया है कि उनके उम्मीदवार केवल जेडीयू के सामने ही होंगे और बीजेपी को उन्होंने फ्री हैंड देने की बात करके बता दिया है कि चुनाव बाद जरा-भी सीटों में ऊंच-नीच हुई तो बीजेपी के पास सीएम पद के लिए नेगोशिएशन करने का मौका मिल सकता है और बीजेपी बिहार में पहली सीएम की कुर्सी हासिल कर सकती है।

दरअसल, लगातार चली बैठकों के बाद अब जेडीयू और बीजेपी के बीच बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर सीटों का बंटवारा हो चुका है दोनों ही 50-50 के फार्मूले पर सहमत हो चुके हैं। बिहार चुनावों में सीट बंटवारे को लेकर लोजपा और जेडीयू के बीच लंबे समय से तकरार की स्थिति थी औऱ आखिकार ये लगभग तय हो गया है कि चिराग पासवान की पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी, लेकिन इस पूरे मामले में नुकसान की संभावनाएं केवल जेडीयू के लिए बढ़ गईं हैं।

गौरतलब है कि चिराग पासवान बिहार में कोरोनावायरस के प्रकोप पर नीतीश कुमार पर हमला बोलते रहे हैं। बाढ़ से लेकर मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत तक के मामले में चिराग की मुखरता नीतीश पर भारी ही पड़ी है, लेकिन अब उनका विरोध चुनावी हो चला है। वो पहले ही अपने बयानों में कह चुके हैं कि अगर एनडीए में उन्हें सम्मानित सीटें नहीं मिली तो वे अकेले चुनाव लड़ेंगे, जिसके बाद ये ही कयास लगाए जा रहे थे कि लोजपा का एनडीए में चुनाव बाद गटबंधन होगा।

एक बेहद महत्वपूर्ण बात ये भी है कि नीतीश के खिलाफ मुखर होकर बोलने वाले चिराग पासवान ने बीजेपी को लेकर हमेशा सकारात्मक बयान दिया है और अनेकों बार ये भी कहा है कि वो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों का समर्थन करते हैं इसलिए वो बिहार चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवारों के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, जिससे ये भी साबित होता है कि उनका सारा विरोध केवल नीतीश के साथ ही है और चुनावों में उन्हें सीधा नुकसान भी पहुंचाएंगे। ये भी कहा जा रहा है कि चिराग की मुखरता के पीछे अमित शाह का हाथ है और वो ही इस पूरे व्यूह की रचना कर रहे हैं।

चिराग पासवान के कहे अनुसार अगर बीजेपी के खिलाफ वो अपने उम्मीदवार नहीं उतारते हैं तो बीजेपी के लिए सीटों का गणित साधना और अधिक आसान होगा। वहीं जेडीयू के खिलाफ लोजपा नेताओं की उम्मीदवारी जेडीयू के लिए ही मुसीबतों का सबब बनेगी और इस पूरे खेल में फायदा बीजेपी को ही होगा।। ऐसे में संभावनाएं यही है कि चिराग पासवान के विद्रोह के कारण जेडीयू को नुकसान होगा तो वहीं बीजेपी की राह अधिक आसान होगी। ऐसी स्थिति में बीजेपी के पाले में गंठबंधन की सीटों का ज्यादा होना तय माना जा रहा है।

ये तो लगभग तय है कि लोजपा चुनाव बाद एनडीए में घर वापसी करेगी। गौरतलब है कि इस पूरे मामले में अगर बीजपी को जेडीयू से ज्यादा सीटें मिलेंगी तो बीजेपी सीएम पद को लेकर दावा जरूर ठोकेगी जिसकी भूमिकाएं अभी से बनने लगी हैं। चिराग पासवान की बगावत के चलते बीजेपी के लिए ऐसी स्थितियां बन रही हैं कि पहली बार बिहार की राजनीति में बीजेपी अपने सीएम के साथ सरकार का नेतृत्व करती नजर आ सकती है औऱ शायद नीतीश कहीं बैकडोर पर अपनी किस्मत को दोष दे रहे होंगे।

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