जानिए, क्या कंबोडिया भी अपने सबसे नजदीकी साथी चीन का साथ छोड़ने जा रहा है?

चीन का विस्तारवाद अब उसी के गले की फांस बनने वाला है!

कंबोडिया

विस्तारवाद को अपनी विदेश नीति का आधार मानकर चलने वाला चीन दूसरे देशों पर आर्थिक अतिक्रमण करने के लिए बदनाम हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में जाने-अनजाने में कंबोडिया भी चीन की इस आर्थिक आक्रामकता का शिकार हो चुका है। देश की अर्थव्यवस्था पर चीन ने इस हद तक कब्जा जमा लिया है कि अब देश की सुरक्षा नीति पर भी चीन का प्रभाव साफ़ झलकने लगा है। हालांकि, अपने “दिवालिया” पड़ोसी लाओस के उदाहरण से सीख लेते हुए अब कंबोडिया अपनी अर्थव्यवस्था पर से चीन के प्रभाव को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। अगर कंबोडिया ऐसा करने में सफल होता है तो यह देश चीन के आर्थिक आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दे सकता है।

आइए, सबसे पहले कंबोडिया पर चीन के खतरे को समझ लेते हैं। कंबोडिया में आने वाले कुल विदेशी निवेश का 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से आता है। कंबोडिया के चावल का सबसे बड़ा आयातक भी चीन ही है। चीन आज इस देश में करीब 140 मिलियन डॉलर के infrastructure प्रोजेक्ट्स को फंड करता है। इसी आर्थिक प्रभाव का यह असर है कि इसी हफ्ते चीन ने ऐलान किया है कि वह 405 मिलियन डॉलर के Phnom Penh Airport प्रोजेक्ट के बड़े हिस्से को एक चीनी कंपनी ही बनाएगी! यह तो कुछ भी नहीं, चीन अपने इसी आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अब देश की सुरक्षा के साथ समझौता करने का प्रयास कर रहा है। उदाहरण के लिए यह देश Ream Naval Base पर अमेरिका की सहायता से बनाए गए दो ढांचों को पहले ही गिरा चुका है और अब अमेरिका को यह शक है कि चीन इस military base पर चीनी सैन्य सामाग्री को जमा कर सकता है, जो अमेरिका और उसके साथियों के लिए बिलकुल भी अच्छी खबर नहीं है।

अब हालिया खबरों के मुताबिक कंबोडिया अपनी अर्थव्यवस्था को चाइना-फ्री करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है। SCMP की रिपोर्ट के मुताबिक यह दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अब दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका, EU, UK और भारत जैसे देशों के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए बातचीत को तेज गति प्रदान करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इतना ही नहीं, यह देश जल्द ही Eurasian Economic Union के साथ भी व्यापार समझौता कर सकता है, जिसमें रूस के साथ-साथ बेलारूस, अर्मेनिया, कज़ाकिस्तान और किर्गिस्तान जैसे देश शामिल हैं। देश को उम्मीद है कि वह इस साल के अंत तक दक्षिण कोरिया के साथ तो समझौता कर भी लेगा!

इन सब देशों के साथ अपनी वार्ता को तेज कर यह देश अब जल्द से जल्द अपने ऊपर से चीनी प्रभाव को कम करना चाहता है। उसके इस प्रयास में अमेरिका जैसे देश पहले ही उसका साथ दे रहे हैं। Voa News की एक रिपोर्ट की मानें तो अमेरिकी सरकार अब Mekong क्षेत्र को चीनी प्रभाव से मुक्त करने के लिए जल्द ही इन देशों के लिए बड़े economic package की घोषणा कर सकती है। यह economic package वियतनाम, Laos, कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड के लिए घोषित किया जाएगा। यहां अमेरिकी सरकार की कोशिश है कि इन देशों की चीन पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता को खत्म किया जा सके। बता दें कि कोरोना से निपटने के लिए अमेरिका इस वर्ष पहले ही इन देशों को 52 मिलियन डॉलर की सहायता मुहैया करा चुका है। हालांकि, आगे भी इन देशों को सूखे, पानी के बहाव संबंधी परेशानियों का मुक़ाबला करने के लिए 6 बिलियन डॉलर की सहायता मुहैया कराई जा सकती है।

अमेरिका भी जानता है कि अगर दक्षिण पूर्व एशिया पर से चीन के प्रभाव को खत्म करना है, तो उसे कंबोडिया को भी चीन के आर्थिक जाल से बाहर निकालना ही होगा और उसे अगला Laos बनने देने से रोकना होगा। अमेरिका और खुद कंबोडिया के इन प्रयासों का जल्द ही हमें एक सकारात्मक नतीजा देखने को मिल सकता है।

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