बिहारी मतदाताओं का सन्देश स्पष्ट है: यहाँ भाई-भतीजावाद के लिए अब और जगह नहीं है

बिहार इस चुनाव में कुछ अलग ही संदेश दे रहा है..

बिहार

आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि “बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपैया ” लेकिन भारत की कुछ राजनीतिक पार्टियां ऐसी हैं जहां बाप और भैया मिलकर रुपैया और गद्दी दोनों हथियाना चाहते हैं| इसी जद्दोजहद के चक्कर में एक ही परिवार के कई लोग चुनावी मैदान में बिगुल फूंकने उतर जाते हैं और जब बात परिवारवाद की हो तो ‘बिहार की राजनीति’ में इसका एक लंबा-चौड़ा इतिहास रहा है| कुछ ऐसा ही नज़ारा इस बार भी बिहार चुनाव में देखने को मिला, जहां एक ही परिवार के कई लोग चुनावी मौसम में अपनी–अपनी किस्मत आज़माने निकले |

राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव व तेज प्रताप के सुसर चंद्रिका राय सहित मामा साधु यादव चुनावी मैदान इस बार उतरे हैं।

बिहार चुनाव 2020 के परिवारवादी उम्मीदवारों की सूची यहीं खत्म नहीं होती, जनता दल-यूनाइटेड के नेता विनोद चौधरी की बेटी पुष्पम प्रिया चौधरी भी इस बार चुनाव में उतरी लेकिन एक नए नाम वाली, नई पार्टी के साथ, ‘द प्लूरल्स पार्टी’| यह 33 वर्षीय उम्मीदवार बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जो पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर लव सिन्हा भी उतरे हैं | लव शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे हैं, जो इस बार सीनियर सिन्हा के पूर्व लोकसभा क्षेत्र में अपना चुनावी पदार्पण कर रहे हैं। जूनियर सिन्हा बॉलीवुड में अपना हाथ आज़मा चुके हैं और अब राजनीति में अपना नाम चमकाने की उम्मीद से सियासी गलियारों में उतरे हैं| लव को चुनौती देने भाजपा के खेमे से बीजेपी के दिवंगत नेता नवीन किशोर सिन्हा के बेटे नितिन नवीन उतरे हैं, जो अभी तक की गणना के अनुसार अपने प्रतिद्वंधियों से आगे चल रहे है। इस चुनाव भले ही हर बार की तरह परिवारवाद के पौधे को रोपित करने के भरसर प्रयास किए गए हो, लेकिन ऐसा लगता है कि बिहार के मतदाताओं ने परिवारवाद को दर-किनार कर काम और छवि के नाम पर ज़्यादा ज़ोर दिया है और अन्य सभी भाई-भतीजावाद वाली सियासत की जड़ें काटने की कोशिश तो की ही है|

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