पीडीपी और NC दोनों के कार्यालय अवैध रूप से कब्जे वाली जमीन पर बने हैं, हो सकते हैं ध्वस्त

रोशनी एक्ट के रडार में फंसे मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार 

जम्मू-कश्मीर

जब 2014 में नरेंद्र मोदी ने कहा था – न खाऊँगा और न खाने दूंगा, तब कई लोगों ने उनका उपहास उड़ाया था। लेकिन पीएम मोदी कोई भी बात यूं ही नहीं बोलते, और इसका प्रमाण अभी हाल ही में जम्मू-कश्मीर में देखने को मिला है, जहां रोशनी एक्ट की धांधली का पर्दाफाश होते ही उन सभी लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्होंने इस एक्ट के जरिए काली कमाई की। अगर ये रिपोर्टस सच साबित होती हैं तो अब्दुल्ला और मुफ्ती के दफ्तर पर तलवार लटक रही है जिसे कोर्ट के फैसले के अनुसार ध्वस्त किया जा सकता है। 

वर्तमान रिपोर्ट्स के अनुसार ये स्पष्ट हुआ है कि रोशनी एक्ट के अंतर्गत की गई धांधली में कश्मीर के शीर्ष नेता, विशेषकर अब्दुल्ला एवं मुफ्ती खानदानों के सदस्य भी शामिल थे। इतना ही नहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के दफ्तर जिस जगह जम्मू और श्रीनगर पर बनाए गए हैं, वो भी अवैध है, क्योंकि जिस भूमि पर इन भवनों को निर्मित किया गया है, उसका रोशनी एक्ट के अंतर्गत अतिक्रमण किया गया था। 

पर ये हुआ कैसे, और कैसे महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला ने इस काले धंधे से गाढ़ी कमाई की? इसका जवाब आपको मीडिया की रिपोर्ट्स में मिल सकता है, जहां दोनों के परिवारों पर इस एक्ट का दुरुपयोग करते हुए अपने निजी स्वार्थ पूरे करने का आरोप लगाया गया है। एबीपी न्यूज की माने तो महबूबा मुफ्ती का दफ्तर भी अतिक्रमण के माध्यम से ली गई भूमि पर बने हैं। इससे पहले अब्दुल्ला घराने का नाम इसमें सामने आया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन का दावा किया है कि ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने सरकार की अवैध जमीन पर कब्जे किए और उस पर अपना आवास और दफ्तर खड़े करवाए। अब जांच के आधार पर प्रशासन ने कहा है कि रोशनी ऐक्ट के तहत अवैध तरह से फायदा पाने वालों में फारूक अब्दुल्ला की बहन सुरैया मट्टू, जम्मू-श्रीनगर में स्थित नेशनल कॉन्फ्रेंस के दफ्तर और एक समय कांग्रेस के मालिकाना हक वाला एक ट्रस्ट भी शामिल है’।

बता दें कि रोशनी एक्ट एक विवादित भूमि अधिग्रहण एक्ट था, जिसके अंतर्गत जम्मू-कश्मीर सरकार उसे भी ये जमीन सौंप सकती थी, जिसने इस पर अवैध कब्जा किया हो। इसका दुरुपयोग करते हुए न केवल घुसपैठियों को बसाया गया, बल्कि जम्मू में ‘जमीन जिहाद’ की भी नींव रखी जाने लगी। 2018 में रोशनी एक्ट को जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा निरस्त किया गया था। इसी वर्ष हाई कोर्ट ने अपने आदेश में रोशनी एक्ट को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार देते हुए इसके तहत हुए जमीन आवंटन रद करते हुए मामले की सीबीआइ जांच के आदेश दिए थे। 

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश ने ये भी निर्णय लिया है कि जो भी आवंटन इस विवादित एक्ट के अंतर्गत हुआ है, उसे न सिर्फ निषेध घोषित किया जाएगा, अपितु जो भी जमीन आवंटित की गई है, उसे वापिस भी ली जाएगा। ऐसे में यदि अब्दुल्ला परिवार का घर, नेशनल कॉन्फ्रेंस का मुख्यालय और महबूबा मुफ्ती का दफ्तर ध्वस्त हो जाए, तो हैरान मत होइएगा। 

सच कहें तो केंद्र सरकार ने इस बार एक तीर से दो निशाने साधे हैं – एक ओर उसने कश्मीर घाटी पर अलगाववादी नेताओं के वर्चस्व को तोड़ने के लिए एक घातक प्रहार किया है, तो वहीं दूसरी ओर उसने ये संदेश भी स्पष्ट दिया है – कश्मीर किसी की निजी जागीर नहीं।   

 

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