उड़ता Punjab के बाद गिरता Punjab है – Punjab का आर्थिक पतन हो रहा है, और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता

पंजाब

PC: The Indian Express

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों का सबसे ज्यादा विरोध पंजाब के किसान ही कर रहे हैं, और इससे पंजाब को ही सबसे ज्यादा नुकसान भी हो रहा है। पहले ही पंजाब में आर्थिक स्थितियां दयनीय हो चुकी है और उनमें बड़े सुधारों की आवश्यकता है। ऐसे में किसानों के अराजक आंदोलन के कारण पूरे राज्य में मच रहा उत्पात और संचार संबंधी कंपनियों के सामानों के साथ छेड़छाड़ पंजाब की छवि को धूमिल कर रहा है। ये राज्य की अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ा झटका देने वाला है, जिसके चलते एक समय नशे के कारण विवादित हुआ “उड़ता पंजाब” से अब आर्थिक मोर्चे पर “गिरते पंजाब” की राह चल पड़ा है।

राज्य में पिछले काफी वक्त से कृषि कानूनों के खिलाफ विद्रोह की स्थितियां है। शुरू में इसे वहां की कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक हितों के लिए पीछे से समर्थन दिया लेकिन अब वहां के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी राज्य की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। बात कम्युनिकेशन की हो तो विरोध के नाम पर ये किसान खेती पर ध्यान देने से इतर राज्य के रिलायंस जियो नेटवर्क टावरों को निशाना बना रहें है। अब तक ये लोग 1,400 से ज्यादा टावरों को छति पहुंचा चुके हैं। खबरों के मुताबिक पंजाब में पिछले 24 घंटे में 176 से अधिक दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाया गया। दूरसंचार टावरों को नुकसान पहुंचाने के पीछे यह कहानी है कि नये कृषि कानूनों से मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी जैसे उद्योगपतियों को लाभ होगा।

ये लोग राज्य के संचार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने में जुट गए हैं, जिससे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी परेशान हो गए हैं। यही नहीं किसानों ने पंजाब में सभी तरह की रेल सेवाएं ध्वस्त कर रखी है जिसके चलते राज्य को नवंबर तक 30,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। इनकी इस हठधर्मिता के कारण न केवल यात्री बल्कि मालगाड़ियों का संचालन ठप है जो कि आर्थिक मोर्चे पर पंजाब को पीछे ले जा रहा है। ये सभी मामले पंजाब में उद्योग लगाने की संभावनाओं को खत्म कर रहे हैं।

पंजाब की अर्थव्यवस्था की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं है। द प्रिंट के मुताबिक आरबीआई की राज्यों से संबंधित वित्तीय रिपोर्ट बताती है कि पंजाब भारत का सर्वाधिक ऋणग्रस्त राज्य है, जहां राज्य के सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले ऋण का अनुपात 40 प्रतिशत तक है। राज्य की आय का 20 प्रतिशत से अधिक ब्याज भुगतान पर ही खर्च होता है, जो देश में सबसे अधिक है। हाल के वर्षों में किसानों को दी जाने वाली रियायती बिजली के बढ़ते बोझ और कृषि ऋण माफी जैसी अन्य रियायतों के कारण पंजाब भारत के सर्वाधिक राजस्व घाटे वाले राज्यों की सूची में शीर्ष के पायदान पर पहुंच गया है।

कृषि प्रधान पंजाब में लगातार प्रतिस्पर्धा की कमी और दूसरे राज्यों में फसलों के बंपर उत्पादन समेत नई सुविधाओं ने पंजाब को आधुनिक भारत की दौड़ में पीछे धकेल दिया है। वहीं उद्योगों की दृष्टि से पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड सहित कई राज्यों ने कारोबार के माहौल को आसान बनाने वाले सुधार किए हैं तथा आयकर और उत्पाद शुल्क में शत प्रतिशत छूट, रियायती दर पर कार्यशील पूंजी ऋण जैसे विभिन्न प्रोत्साहनों के कदम उठाए है, लेकिन पंजाब सरकार का रुख राज्य को खोखलेपन की ओर ले जा रहा है।

औद्योगीकरण की कमी के चलते यहां बेरोजगारी भी बढ़ रही है जिससे एक बड़ा तबका या तो अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ने या नौकरी के लिए भेज चुका है या फिर ये लोग दूसरे राज्य की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं, युवाओं को नशे की लत ने बर्बादी की कगार पर ला दिया है। इसीलिए यहां के युवाओं में मानसिक रोगों की तादाद भी तेजी से बढ़ी है।

ऐसे वक्त में जब पंजाब को सबसे ज्यादा बड़े बदलाव करने चाहिए तो ऐसे वक्त में भी किसान आंदोलन के नाम पर अराजकता फैलाकर यहां के लोग उद्योग धंधों को दूसरे राज्यों में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर कर रहे हैं जिससे राज्य के आधारभूत ढांचे पर भी बहुत बुरा असर पड़ेगा और ये नशे में उड़ते पंजाब को आर्थिक मोर्चे पर बहुत नीचे गिरा देगा।

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