चीन के लिए एक और संकट, सुस्त हुए संगठन IORA में फ्रांस की एंट्री करा भारत ने फूंकी जान

IORA (Indian ocean Rim Association) में चीन विरोधी देशों के सक्रिय होने से चीन को लगेगा झटका

IORA

दिन-प्रतिदिन जियोपॉलिटिक्स में होता हुआ बदलाव चीन के लिए नई-नई मुश्किले पैदा करता जा रहा है। अब भारत ने QUAD की सफलता के बाद IORA (Indian ocean Rim Association) को भी पुनर्जीवित कर, इसे चीन के खिलाफ काउंटर के लिए तैयार कर रहा है। 22 देशों के इस संगठन में अब एक 23वां देश भी जुड़ गया है, तथा वह कोई और बल्कि चीन विरोधी फ्रांस है।

रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को UAE द्वारा हिंद महासागर रिम एसोसिएशन के मंत्री परिषद की 20वीं बैठक में फ्रांस 23वें सदस्य के रूप में शामिल हुआ। फ्रांस के IORA में शामिल होने के बाद भारत के विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने फ्रांस को बधाई दी।

चीन के बढ़ते कदम के कारण अब फ्रांस इंडो पैसिफिक क्षेत्र में अपनी धमक बढ़ाना चाहता है। कुछ दिनों पहले ही भारत, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस ने इंडो पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक त्रिपक्षीय बैठक की थी, जिसमें फ्रांस का ध्यान भारत और इंडो पैसिफिक की ओर अपनी सहभागिता बढ़ाने का था। फ्रांस P5 का सदस्य है और अगर वह IORA में शामिल हुआ है तो इसका परिणाम चीन के खिलाफ होगा।

हालांकि, चीन इस संगठन का डायलॉग पार्टनर है लेकिन फ्रांस के मुख्य सदस्यों में शामिल होने और अन्य 22 देशों में से अधिकतर के चीन विरोधी होने से यह चीन के लिए किसी झटके से कम नहीं है। QUAD में प्रमुख देशों के बाद इस संगठन में कई खाड़ी देश, कुछ अफ्रीकी देश तथा हिन्द महासागर में स्थित कुछ देश हैं जहां चीन अपनी आक्रामकता दिखा रहा है।

1997 में स्थापित हुए IORA के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत इस संगठन के लिए प्रतिबद्ध है। कई वर्षों तक इस संगठन के निष्क्रिय रहने के बाद अब भारत इसे अधिक से अधिक अंतर-क्षेत्रीय साझेदारी के माध्यम से इंडो-पैसिफिक में शांति स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए एक अनूठा मंच बनाने में जुट चुका है।

2019 में भारत की ओर से IORA की बैठक में भाग लेने गए विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा था, “IORA अंतर-क्षेत्रीय साझेदारी के लिए एक अद्वितीय और व्यापक-आधार वाला प्लेटफ़ॉर्म है, जो समुद्र के माध्यम से दुनिया के सबसे अधिक सांस्कृतिक विभिन्नता वाले क्षेत्रों यानी दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ओशिनिया और अफ्रीका को जोड़ता है।”

इस संगठन के साथ अब तक यह समस्या रही है कि, इस संगठन के सदस्य देशों ने आपसी सहयोग के लिए मूल मुद्दों को निर्धारित ही नहीं किया है। ब्लू इकोनॉमी, डिजास्टर मैनेजमेंट तथा सिक्योरिटी से संबंधित कुछ मामलों पर सदस्य देश आपसी सहयोग करते हैं लेकिन किसी ऐसे फ्रेमवर्क का निर्धारण नहीं किया गया है जो इस संगठन को जियोपॉलिटिकल मुद्दों में एक प्रमुख भूमिका निभाने में मदद करे।

हाल ही में इस संगठन की तीन प्रमुख शक्तियों भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों एवं रक्षा मंत्रियों की वर्चुअल बैठक हुई थी। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य था, क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता पर चर्चा करना। साथ ही मीटिंग में IORA को मजबूत करने को लेकर भी चर्चा हुई थी।

गौरतलब है कि, भारत का ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ पहले ही मजबूत रिश्ते हैं। जहां भारत इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग कर रहा है, तो वहीं ऑस्ट्रेलिया के साथ भी भारत का लॉजिस्टिक सपोर्ट को लेकर समझौता हो चुका है। हिंद महासागर में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि पारंपरिक रूप से भारत इस क्षेत्र की प्रमुख नौसैनिक शक्ति रहा है। यानि देखा जाए तो अब IORA एक ऐसा संगठन बन चुका है, जहां कई देश एक साथ मिल कर हिन्द महासागर में चीन की आक्रामकता को रोक सकते हैं।

IORA की सहायता से चीन को हिंद महासागर में रोकना ना सिर्फ भारत के हित में है बल्कि अफ्रीकी देशों के हित में भी है। हाल ही में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते चीनी आक्रामकता ने भी IORA को एक मजबूत संगठन बनाने में मदद की है।

अब IORA के पुनर्जीवित होने और इसमें फ्रांस जैसे देश के शामिल होने से न सिर्फ चीन के खिलाफ एक बहुपक्षीय संगठन तैयार होगा बल्कि चीन को हिन्द महासागर क्षेत्र में रोका भी जा सकेगा।

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