“ऑस्ट्रेलिया और जापान को ताइवान की रक्षा करनी चाहिए”, बाइडन ने ताइवान की पीठ में घोंपा छुरा

खुद कोई प्रतिबद्धता नहीं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया और जापान पर ताइवान की सुरक्षा का सारा जिम्मा

ताइवान

बाइडन प्रशासन इंडो पैसिफिक में एक चालाकी भरा खेल खेल रहा है।  ताइवान के मुद्दे पर राष्ट्रपति जो बाइडन चीन के खिलाफ लड़ाई में अपने अमेरिकी सहयोगियों को फ्रंट फुट पर खेलने का मौका दे रहे हैं। अगर चीन  ताइवान पर आक्रमण करता है तो उस स्थिति में ऑस्ट्रेलिया और जापान को हमले का प्रतिउत्तर देने के लिए बाइडन प्रशासन तैयारी कर रहा है।  इससे पहले,  TFI ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि बाइडन प्रशासन ने जापान को लोकतांत्रिक द्वीप राष्ट्र के खिलाफ चीनी आक्रामकता के लिए ’संयुक्त’ सैन्य प्रतिक्रिया सहित ताइवान से संबंधित सभी क्षेत्रों की तैयारी के लिए सहमत किया।  अब व्हाइट हाउस ऑस्ट्रेलिया को भी चीन के आक्रमण की स्थिति में प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहा है।

यहां यह समझना होगा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। अगर ड्रैगन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगियों को निश्चित रूप से चीन के खिलाफ एक संयुक्त लड़ाई शुरू करनी चाहिए।

वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में तैनात अमेरिकी दूतावास के सबसे वरिष्ठ राजनयिक, माइकल गोल्डमैन ने खुलासा किया है कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ताइवान पर सैन्य संघर्ष के मामले में आकस्मिक योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं।  गोल्डमैन ने कहा, “मुझे लगता है कि हम सहयोगी के रूप में एक साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, न केवल आतंकवादियों के खिलाफ अच्छी तरह से रणनीतिक योजना बनाने में बल्कि सभी क्षेत्रों में … और जब आप रणनीतिक योजना को देखते हैं, तो यह सभी क्षेत्र कवर करता है जिनमें से ताइवान स्पष्ट रूप से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

इसी प्रकार, जापानी और अमेरिकी रक्षा प्रमुखों ने चीन और ताइवान के बीच सैन्य टकराव की स्थिति में निकट सहयोग करने के लिए टोक्यो में अपनी हालिया बैठक में सहमति व्यक्त की थी।

सूत्रों के अनुसार, जब अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने जापानी रक्षा मंत्री नोबुओ किशी से मुलाकात की, तो उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, हालांकि इस बात पर कोई बात नहीं हुई कि उनके देश इस तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी प्रतिक्रिया का समन्वय कैसे करेंगे।

हालांकि, यह अमेरिका की ओर से एक आधी-अधूरी और बेमन से की गई पहल है।  जापान और ऑस्ट्रेलिया, ताइवान से अपनी निकटता के आधार पर तथा चीन के गुंडागर्दी के कारण ताइवान की सुरक्षा के के प्रयास में स्वयं आगे आ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, बाइडन प्रशासन CCP से सहानुभूति रखने के लिए जाना जाता है। बाइडन प्रशासन ताइवान के लिए वैश्विक समर्थन का ढोंग करने का नाटक कर रहा है। यह माना जा रहा है कि ताइवान को बचाने के लिए जो बाइडन प्रशासन ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे अमेरिकी सहयोगियों को सबसे आगे कर रहा है और खुद चीन के खिलाफ युद्ध में आगे नहीं आना चाहता है। बाइडन प्रशासन स्वयं यह घोषणा नहीं कर रहा कि वह किस प्रकार से आक्रमण की स्थिति में आगे आएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी कानून Taiwan Relations Act के तहत आज के समय ताइवान की सुरक्षा के लिए अमेरिका प्रतिबद्ध नहीं है। अगर कल चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका कानूनी तौर पर ताइवान की सहायता के लिए आगे नहीं आ सकता। बाइडन प्रशासन को अपनी घरेलू ताइवान नीति में बड़े बदलाव कर अपनी प्रतिबद्धता को ज़ाहिर करना चाहिए। जबकि ऑस्ट्रेलिया और जापान को चीन के खिलाफ मोर्चा लेने तैयार कर रहा है। यानी अमेरिका इस क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति ताइवान का बचाव करने के लिए किसी कानून या संधि से बाध्य नहीं है।

अमेरिका ने 1979 में जिमी कार्टर प्रशासन के दौरान ताइवान के साथ आपसी रक्षा संधि को रद्द कर दिया था, जिसमें चीन द्वारा द्वीप राष्ट्र पर आक्रमण करने की स्थिति में अमेरिकी हस्तक्षेप को अनिवार्य किया गया था।  यह पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के लिए किया गया था।  इस मामले में भी बलि का बकरा आधिकारिक अमेरिकी-ताइवान संबंधों को ही बनाया गया था।

वर्तमान में, अमेरिका किसी संधि या कानून द्वारा चीन के खिलाफ ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया और जापान को बाइडेन के जाल में नहीं फंसना चाहिए।  इसके बजाय, ताइवान की संप्रभुता की रक्षा करने के उद्देश्य से किसी भी संयुक्त गठबंधन के लिए, जापान और ऑस्ट्रेलिया को बाइडन प्रशासन से यह मांग करनी चाहिए कि वह एक ऐसा कानून पारित करे जो अमेरिका को हर कीमत ताइवान की रक्षा करने के लिए बाध्य करे चाहे कोई भी सत्ता में बैठा हो डेमोक्रेट्स या रिपब्लिकन ।  ताइवान के संयुक्त संरक्षण के संबंध में यही जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच किसी भी वार्ता के लिए प्रस्थान बिंदु होना चाहिए।

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