राजदीप और बरखा के बाद अब शशि थरूर बन बैठे हैं झूठी खबर के super spreader

PC: Sabrang India

आजकल सोशल मीडिया पर खुद को ज्यादा बुद्धिजीवी साबित करने की होड़ मची हुई है। ऐसे में ज्यादातर लोग आवेगशील हो रहे हैं। बिना पूरा सच जाने या बिना तथ्यों को देखें सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर देते है। उदाहरण के लिए आप शशि थरूर को ही देख लीजिए। शशि थरूर आए दिन ट्विटर पर फेक न्यूज फैलाते रहते है। हाल ही में, शशि थरूर ने पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की निधन की खबर ट्विटर पर साझा किया। जबकि, पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन अस्पताल में भर्ती है।

मामले का पूरा सच आने के बाद शशि थरूर को सोशल मीडिया पर किरकिरी झेलनी पड़ी। साथ ही में सुमित्रा महाजन के घर फोन करके उनके परिवार से माफी भी मांगनी पड़ी है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैला हो। कुछ दिनों पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के आजादी के 50 वर्ष पूरा होने के बाद बांग्लादेश गए हुए थे। वहां पीएम मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए, बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में अपना योगदान का जिक्र किया था।

और पढ़ें-शशि थरूर ने फैलाई फेक न्यूज़, अस्पताल में भर्ती सुमित्रा महाजन को दे दी श्रद्धांजलि, बाद में मांगी माफ़ी

बता दें कि, कभी भी अगर बांग्लादेश की आजादी की बात होती है, तो कांग्रेस के नेता इंदिरा गांधी का नाम जपना शुरू कर देते हैं और यहां तो बात इतिहास की थी फिर शशि थरूर कैसे चुप रहते। फिर क्या था, बिना सच जाने शशि थरूर ने ट्विटर पर लिखा कि, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश में भी झूठ बोल रहे हैं। सभी को मालूम है बांग्लादेश को किसने आजाद कराया था।“ थरूर का ट्वीट देखकर ट्विटर यूजर्स ने उनको इतिहास का असल ज्ञान दिया और बताया की पीएम मोदी का बांग्लादेश की आजादी में योगदान है। सच जानने के बाद शशि थरूर ने माफी मांगी और लिखा कि, “मैं अपनी गलती मानता हूं। मैने आवेश में आकर  हेडलाइन पढ़ने के बाद यह ट्वीट किया। अभी मुझे ज्ञात हुआ की पीएम मोदी ने बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था।“

सोशल मीडिया यूजर्स अभी कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के अद्भुत कारनामे से उभरे नहीं थे और शशि थरूर ने फेक न्यूज़ फैला कर अपने लिए आलोचकों को न्योता दे दिया है। खैर, सोशल मीडिया पर फेक न्यूज पेडलर ग्रुप में  शशि थरूर अकेले नहीं है। इससे पहले समाज को सच दिखाने वाले पत्रकार जैसे राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्त, रोहिणी सिंह, और अरफा खानुम भी शामिल है। आपको बता दें कि राजदीप सरदेसाई ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मौत की झूठी खबर फैलाई थी। इसके अलावा राजदीप को 26 जनवरी किसान दंगों के बारे में फेक न्यूज फैलाने के लिए इंडिया टुडे से सस्पेंड भी कर दिया गया था।

बता दें कि 26 जनवरी किसान दंगों के बारे में फेक न्यूज फैलाने वालों में राजदीप सरदेसाई के साथ और कांग्रेस नेता शशि थरूर भी थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद नोएडा पुलिस ने राजदीप और थरूर के ऊपर मुकदमा भी दर्ज किया था।

और पढ़ें -सुनंदा पुष्कर की मृत्यु स्वाभाविक थी या थी हत्या ? आने वाला है कोर्ट का बड़ा फैसला

गौर करने वाली बात यह है कि आखिर क्यों वामपंथी विचारधारा के पत्रकारों और नेताओं ने लगातार फेक न्यूज़ फैलाया है। इसके दो कारण हो सकते है, पहला यह कि ज्यादा बुद्धिजीवी बनने की कॉम्पिटिशन जीतना चाहते हो और दूसरा यह कि भाजपा को नीचा दिखाने की लिए बिना तथ्यों को देखे फेक न्यूज़ फैला देते हैं।

Exit mobile version