वामपंथियों को जूते की नौक पर रखके मोदी सरकार बना रही है दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट

वामपंथियों! आप कृपा करके भाड़ में जाएँ!

न्यूक्लियर

(PC: Statesman)

महाराष्ट्र के जैतापुर जिले में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पावर प्लांट बनने वाला है। इसी सिलसिले में फ्रांसीसी एनर्जी ग्रुप EDF ने शुक्रवार को भारत में दुनिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण में मदद करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बता दें कि यह न्यूक्लियर रिएक्टर प्रोजेक्ट 20 सालों से राजनीतिक मतभेद के कारण लटका हुआ था।

फ्रांस की एनर्जी कंपनी EDF ने कहा कि “उसने भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) के लिए महाराष्ट्र के जैतापुर (jaitapur nuclear power plant) में थर्ड जनरेशन वाले 6 रिएक्टर बनाने में मदद करने  के लिए वादा किया है।“ बता दें कि न्यूक्लियर पावर प्लांट बनने के बाद 10 गीगावॉट बिजली पैदा करेगा, जो 70 लाख से ज्यादा घरों को रोशन करेगा।

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EDF की माने तो पावर प्लांट को पूरे तरह से बनने में 15 साल तक लग जाएंगे। हालांकि, पावर प्लांट उससे पहले ही बिजली पैदा करने में सक्षम हो जाएगा।

EDF द्वारा दिए गए आधिकारिक बयान में कहा कि ” कॉन्ट्रैक्ट आने वाले कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा।”

EDF ग्रुप के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीन बर्नार्ड लेवी ने कहा, “यह महत्वपूर्ण मील का पत्थर हमारे भारतीय साझेदार के साथ बने विश्वास और ईडीएफ तथा एनपीसीआईएल के दलों के सहयोग और निरंतर प्रयासों के कारण हासिल हुआ है।”

फ्रांसीसी कंपनी खुद पावर प्लांट का निर्माण नहीं करेगा, लेकिन न्यूक्लियर रिएक्टरों देगा जिसमें  US पार्टनर GE स्टीम पावर शामिल है। हालांकि, कोई वित्तीय विवरण जारी नहीं  किया गया है, लेकिन अनुमान है कि दसियों अरब यूरो डॉलर तक का हो सकता है।

न्यूक्लियर पावर प्लांट के लगने से रोजगार भी उपलब्ध होगा। कंपनी के मुताबिक, इस परियोजना के जरिए निर्माण के दौरान 25,000 स्थानीय नौकरियां बनेंगी जबकि करीब 2700 लोगों को स्थायी नौकरियां मिलने के आसार है।

बता दें कि साल 2018 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिलकर दुनिया का सबसे बड़े न्यूक्लियर  पावर प्लांट का काम आगे बढ़ाने का फैसला किया था।

यह न्यूक्लियर रिएक्टर प्रोजेक्ट भारत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। इस काम में अड़चन डालने के लिए वामपंथियों और शिवसेना के गुंडों ने भूकंप और मछुआरों के दिक्कतों का हवाला देकर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को 20 सालों तक लटकाए रखा।

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केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से भारत और फ्रांस के व्यापारिक रिश्ते और ज्यादा मजबूत हो गए हैं। इसके साथ ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने निजी तौर पर मिलकर इस न्यूक्लियर रिएक्टर प्रोजेक्ट को नया बल दिया है।

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