सभी चुनावों में मुंह काला कराने के बाद सोनिया को हुआ गलती का अहसास! अब मोदी का सहयोग करेगी कांग्रेस

मोदी पर किया वार कांग्रेस के किसी काम ना आया! अब कांग्रेस ने किया रणनीति में बदलाव

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Loksatta

पांच राज्यों के एग्जिट पोल में कांग्रेस की स्थिति बहुत दयनीय दिखाई दे रही है। कांग्रेस को प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाने, निरंतर विरोध की राजनीति करने और ट्विटर पर जंग लड़ने का कोई वास्तविक फायदा चुनावों में नहीं प्राप्त हुआ है। किसी भी राज्य में कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है। ऐसे में अब कांग्रेस अपनी रणनीति बंद कर एक रचनात्मक विपक्ष की भूमिका में दिखना चाहती है।

कांग्रेस नेता और वायनाड सांसद राहुल ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि कांग्रेस कोरोना महामारी को देखते हुए एक हेल्पलाइन नम्बर शुरू कर रही है। इसके जरिये लोगों को घर बैठे चिकित्सकों का परामर्श मिल सकेगा। इस हेल्पलाइन के अतिरिक्त कांग्रेस ने चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वह इस काम के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं जिससे लोगों को उनतक पहुंचने में आसानी हो। इसके अतिरिक्त आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने निर्णय किया है कि वह अपने प्रदेश में हर जिले में कंट्रोल रूम बनाएंगे, जो लोगों को ऑक्सीजन, बेड, प्लाज्मा, एम्बुलेंस आदि सब उपलब्ध करवाएगा।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि केंद्र एक राष्ट्रीय योजना बनाए तथा राज्यों के साथ मिलकर कार्य करें। हालांकि, कांग्रेस का राष्ट्रीय योजना बनाने का सुझाव बहुत देर से आया है, जब केंद्र ने स्वयं इसकी पहल की थी तो कांग्रेस ने ही केंद्र का विरोध किया था, किन्तु अब भी कांग्रेस अगर केंद्र को सहयोग करने पर राजी हो जाती है तो यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा।

इसके अतिरिक्त कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र से फ्री वैक्सीन उपलब्ध करवाने, कालाबाजारी की जांच करवाने, गरीबों को बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे कई सुझाव दिए। एक सुझाव वैक्सीन निर्माण के लिए आवश्यक लाइसेंस की शर्त को खत्म करना था जिसे थोड़े संशोधन के साथ लागू किया जा सकता है। वैक्सीन कोई साधारण दवा नहीं जिसे बनाने की जानकारी सभी के पास हो। ऐसे में वैक्सीन निर्माताओं से बात करके इसके निर्माण की प्रक्रिया तेज करने के लिए सरकार निजी निवेश को बढ़ावा दे सकती है, जिससे टाटा, अम्बानी, अडानी जैसे अन्य बड़े उद्योगपति इस कार्य को तेजी से पूरा करवा सकें।

कांग्रेस के रवैये में आए परिवर्तन अप्रत्याशित हैं। इस बदलाव के पीछे हालिया चुनावों के परिणाम हैं। 2 मई को पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजे सामने आने वाले हैं। इन चुनावों में असम और पुडुचेरी में कांग्रेस की भाजपा से सीधी टक्कर होनी थी। केरल में कांग्रेस सरकार बनाने की उम्मीद में थी, जबकि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में वह अपनी सीट बढ़ाने की कोशिश कर रही है, किन्तु कांग्रेस अपने किसी भी उद्देश्य में सफल नहीं हुई।

इसका कारण यही है कि कांग्रेस किसी भी राज्य में जमीनी स्तर पर कोई कार्य नहीं कर रही है। उदाहरण के लिए प. बंगाल की बात करें तो भाजपा पिछले विधानसभा चुनाव में 3 सीट ही जीती थी, लेकिन उसने लगातार संघर्ष किया। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जनता के बीच जाकर काम किया, जबकि congress ने केवल ट्विटर पर ही लड़ाई लड़ी है।

हिंदुओं के साथ आए दिन होने वाली साम्प्रदायिक हिंसा को लेकर भाजपा कार्यकर्ता और नेताओं ने जमीनी स्तर पर राजनीतिक लड़ाई लड़ी। किसानों की समस्या हो या 2020 में आए भीषण तूफान, भाजपा कार्यकर्ताओं ने सभी मोर्चों पर काम किया जिसका नतीजा यह हुआ कि पांच साल में ही भाजपा TMC का विकल्प बन गई।

जबकि कांग्रेस के पास ऐसी कोई योजना नहीं थी। असम में भी congress चुनावी मौसम में जागी , जिससे वह हेमंत सरकार को टक्कर नहीं दे सकी। कांग्रेस को भाजपा की सभी नीतियों का विरोध करने के बजाए रचनात्मक कार्य करना चाहिए। ऐसा नहीं है कि भाजपा सरकार congress को वापसी का मौका ही नहीं देगी, लेकिन अपनी राजनीतिक वापसी के लिए congress को जमीन पर उतरकर कार्य करना होगा। राष्ट्रीय संकट में भी congress अगर अंधविरोध करती रही, जैसा उसने चीन मुद्दे पर किया, तो वह अपनी छवि ही खराब करेगी। congress को प्रधानमंत्री को ट्विटर पर घेरने की जगह, लोगों के बीच काम करना चाहिए।

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