जिनपिंग को बाज़ार की समझ नहीं, वित्तीय बाज़ार में हस्तक्षेप कर वह चीनी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देंगे

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग राजनीति के लिए अपने देश की बलि देने पर तुले!

जिनपिंग

कोरोना महामारी के बाद से चीन में महंगाई दर में तेजी से वृद्धि देखने को मिली थी, लेकिन अब सरकारी हस्तक्षेप के बाद इसमें कमी आती दिखाई दे रही है। जिनपिंग नहीं चाहते कि बढ़ती महंगाई के कारण उन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़े, वो भी ऐसे समय में जब अगले वर्ष यानि वर्ष 2022 में कम्युनिस्ट पार्टी की एक अहम बैठक में जिनपिंग बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में असीमित वर्षों की बढ़ोतरी करना चाहते हों।

हालांकि, अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए जिनपिंग वित्तीय बाज़ार में सरकारी हस्तक्षेप का खतरनाक जोखिम मोल ले रहे हैं, जिसके चीनी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

Academic सदस्य Gao Shanwen ने अपने हालिया बयान में इसी ओर इशारा किया है। उनके अनुसार “अगर सरकार उत्पादों के दामों पर “Cap” लगाने की कोशिश करती है या फिर वह उत्पादकों को सबसिडी प्रदान करती है, तो इसका बाज़ार के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।” यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मुक्त बाज़ार में व्यवसाय के लिए काम करना आसान होता है और इससे अनिश्चितता का माहौल नहीं बनता है। हालांकि, जिनपिंग इसके ठीक उलट सोच रखते हैं।

चीन के National Development and Reform Commission (NDRC) के मुताबिक बाज़ार में उत्पादों के दाम बाजारू रुझान देखकर ही तय किए जाएंगे लेकिन वर्ष 2025 आते-आते सरकार समय-समय पर बाज़ार में हस्तक्षेप कर कालाबाज़ारी, व्यापार, कर और अप्राकृतिक मूल्य वृद्धि को प्रभावित करने वाले कदम उठाती रहेगी।

इसके बाद बीते रविवार को ही NDRC ने देश के मुख्य धातु उत्पादकों को चेतावनी जारी कर दी कि किसी भी प्रकार की कालाबाज़ारी और बाज़ार में दामों को बढ़ाने का कारण बनने वाली अवैध गतिविधियों को लेकर ज़ीरो टोलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। यह तब किया जा रहा है जब देश में स्टील उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया है और साथ ही उसका दाम भी आसमान छू रहा है।

बता दें कि चीन ने वर्ष 2060 तक खुद को कार्बन न्यूट्रल करने का ऐलान किया है, जिसके तहत वह अपने यहाँ प्रदूषण फैला रहे उद्योगों पर नकेल कसने को मजबूर हुआ है। इसमें स्टील इंडस्ट्री सबसे टॉप पर है। स्टील उत्पादन का केंद्र माने जाने वाले चीन के Tangshan शहर में सभी स्टील उत्पादकों को बोल दिया गया है कि वे जून के अंत तक अपने उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कमी कर दें, इसके साथ ही साल के दूसरी छमाही में उत्पादन में अतिरिक्त 30 प्रतिशत की कमी करने को कहा गया है।

चीनी सरकार ऐसा कदम तब चल रही है जब ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाले Iron Ore के दाम सांतवे आसमान पर पहुँच चुके हैं, और दुनियाभर में स्टील मार्केट में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में अगर सरकार बढ़ते स्टील के दामों को रोकने के लिए भी हस्तक्षेप करेगी तो इससे देश का स्टील सेक्टर तबाह हो जाएगा।

चीनी सरकार यह समझने में असफल रही है कि उनके देश में उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी घरेलू कारणों से नहीं बल्कि वैश्विक कारणों से पैदा हो रही है, जिसे सिर्फ घरेलू स्तर पर ही काबू में नहीं किया जा सकता है। हालांकि, जिनपिंग फिर भी ऐसा कर रहे हैं ताकि वे अपनी राजनीति चमका सकें।

यह पुरानी बात नहीं है जब जिनपिंग सरकार ने बाज़ार में हस्तक्षेप करते हुए ANT समूह के IPO पर जबरन रोक लगाने का काम किया था। इसके अलावा चीन में Anti-Monopolistic कार्रवाइयों के तहत उठाए जा रहे व्यावसायिक-विरोधी कदम भी किसी से छुपे नहीं हैं। यह सब जिनपिंग को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन आगे चलकर चीन के बाज़ार पर इसके बेहद घातक परिणाम देखने को मिल सके हैं।

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