आंदोलकारियों ने पहले जाति सूचक गालियां दी फिर मुकेश को जिंदा जला दिया, अब उसकी मौत को आत्महत्या करार दे रहे हैं

किसानों के रूप में गुंडों ने डेरा जमा रखा है!

किसान आंदोलन अपराध

किसान आंदोलन अब अपराध का गढ़ बनकर रह गया है

कृषि कानून के विरोध में जारी किसान आंदोलन अब अपराध का गढ़ बनकर रह गया है। कभी बलात्कार की खबर सामने आ रही है तो कभी मर्डर की। अब एक किसान को जिन्दा जलाकर मार देने की खबर सामने आईं हैं। यही नहीं जलाने से पहले उस पर जातीय टिप्‍पणी भी की गई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपी जातीय टिप्‍पणी करता नजर आ रहा हैं। हैरानी की बात यह हैं कि हत्या के बाद इस घटना को सुसाइड करार देने की भी कोशिश की गयी।

लगातार हो रही कई घटनाओं के बाद किसान आंदोलन एक बार फिर से सवालों के घेरे में है। यह घटना बहादुरगढ़ बाईपास पर स्थित गांव कसार के पास की है। दैनिक भास्कर के अनुसार, बुधवार रात करीब 3 बजे कसार गांव के मुकेश नामक एक व्यक्ति को किसान आंदोलन में शामिल होने आए 4 लोगों ने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। आनन-फानन में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कुछ घंटों बाद उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

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फेसबुक पेज संसार क्रांति द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में ग्रामीणों को मुकेश के खिलाफ जातिवादी भाषा का इस्तेमाल करते सूना जा सकता है। विरोध करने वाले ‘किसानों’ में से कृष्ण नाम के व्यक्ति ने कहा कि मुकेश की मृत्यु होने पर क्या समस्या है, वह शहीद हो जाएगा (कृषि कानूनों के खिलाफ) और मुआवजा मिलेगा। उसे बचाने की जहमत क्यों उठाई जाये।“

ग्रामीणों का कहना है कि मुकेश को आग लगाना कृषि कानूनों के खिलाफ ‘शहीद’ दिखाने की साजिश थी। पत्रकार अमीश देवगन के अनुसार, कृषि कानूनों के विरोध में टिकरी सीमा पर सार्वजनिक सड़कों और मैदानों पर अवैध रूप से बैठने वाले प्रदर्शनकारियों ने विवाद के चलते एक व्यक्ति को आग के हवाले कर दिया।

बलात्कार, छेड़छाड़ और अब एक व्यक्ति को जिंदा जलाए जाने के लिए कड़ी आलोचना के बाद टिकरी सीमा पर हिंसक विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले संगठन किसान एकता मोर्चा ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि मुकेश ने खुद को आग लगा ली थी। उन्होंने दावा किया कि इसके विपरीत सब कुछ “भाजपा प्रोपेगेन्डा ” है।

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मुकेश के भाई द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, मुकेश पर ज्वलनशील पदार्थ छिड़कने वाले आरोपी टिकरी सीमा पर किसान आंदोलन में शामिल हुए लोगों में से थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस को दी गई शिकायत में गांव कसार निवासी मदन लाल पुत्र जगदीश ने बताया कि, “मेरा भाई मुकेश बुधवार शाम लगभग 5 बजे घर से घूमने के लिए निकला था, जो किसान आन्दोलनकारियों के पास पहुंच गया। मुझे फोन कॉल से पता चला कि भाई पर आंदोलनकारियों ने जान से मारने की नीयत से तेल छिड़ककर आग लगा दी। मैं तुरंत पूर्व सरपंच टोनी को लेकर मौके पर पहुंचा तो मेरा भाई मुकेश गंभीर रूप से झुलसा हुआ था। उसे हम तुरंत सिविल अस्पताल लेकर आए। यहां उपचार के दौरान मुकेश ने बताया कि आंदोलन में कृष्ण नामक एक व्यक्ति (सफेद कपड़े पहने हुए था) ने पहले शराब पिलाई और फिर उसे आग लगा दी। इससे वह बुरी तरह झुलस गया। सिविल अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे मुकेश को चिकित्सकों ने रेफर कर दिया, मगर परिजन उसे ब्रह्मशक्ति संजीवनी अस्पताल लेकर गए। वहां रात को ही उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।“

हरियाणा पुलिस ने मृतक के भाई के बयान के आधार पर दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आईपीसी की धारा – 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पोस्टमॉर्टम किया गया है और उपलब्ध विवरण के आधार पर आगे की जांच की जाएगी।

गांव के सरपंच, टोनी कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया कि वे विरोध कर रहे ‘किसानों’ को दूर ले जाएं, क्योंकि वे सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। यह पहली बार नहीं है कि राष्ट्रीय राजधानी के आसपास के बॉर्डर पर ‘किसान’ आंदोलन के स्थान से इस तरह की अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं। ‘किसान’ विरोध स्थल हाल ही में अपराध का केंद्र बन गया है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में साइट से बलात्कार, हत्या के कई आरोप सामने आए हैं। अब प्रशासन को तुरंत एक्शन लेते हुए बॉर्डर एरिया को खाली करा देना चाहिए।

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