फेसबुक के बैन से आक्रोशित हिंदू समर्थक NGO “सनातन संस्था” ने इस सोशल मीडिया प्लेटफार्म को सुप्रीम कोर्ट में घसीटा है

सनातन संस्था फेसबुक

PC: The Indian Express

भारत में नए आईटी कानून लागू होने के बाद बड़ी इन्टरनेट कंपनियों के कुकर्मों को वापस सही करने का दौर शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा ट्विटर के खिलाफ फेक न्यूज़ फ़ैलाने में मदद करने के लिए FIR करने के बाद अब सनातन संस्था ने फेसबुक को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। रिपोर्ट के अनुसार सनातन संस्था ने अपने तीन फेसबुक पेजों को ब्लॉक करने के फेसबुक के फैसले को चुनौती देते हुए गोवा में बॉम्बे के उच्च न्यायालय का रुख किया है। यानी अब ट्विटर के बाद फेसबुक की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।

गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान फेसबुक इंडिया के वकील ने न्यायमूर्ति एम एस सोनक और न्यायमूर्ति एम एस जावलकर की खंडपीठ से कहा कि वे एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर बहस के लिए तैयार हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई आठ जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी है।

एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा: “यह भी ध्यान रखना उचित है कि वह अपने फेसबुक अकाउंट से लेख, समाचार, हिंदू धर्म के बारे में मार्गदर्शन पोस्ट करता हैं और उसका किसी भी व्यावसायिक गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं है।”

उच्च न्यायालय में सनातन संस्था ने अपनी याचिका में बताया कि सितंबर, 2020 में इसके पेज को ब्लॉक किया जाना “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन था। NGO ने कहा कि फेसबुक केंद्र सरकार की शक्तियों को ‘हड़प’ रहा है और “कानून की किसी भी प्रक्रिया का पालन किए बिना भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगा रहा है।”

संस्था ने कहा कि “याचिकाकर्ता को कोई अवसर दिए बिना ही उनके पेज को ब्लॉक करना अन्यायपूर्ण और अनुचित है।” इसमें कहा गया है कि केवल केंद्र सरकार या अदालत के निर्देश पर ही फेसबुक अपने पेजों को ब्लॉक कर सकता है न कि एक प्राइवेट कंपनी।

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सनातन संस्था के अनुसार केंद्र भी अपने मौलिक अधिकार की रक्षा करने में विफल रहा है। याचिका में कहा गया है कि, “चूंकि यह मामला petitioner के मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है और भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है और फेसबुक petitioner संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है।”

सनातन संस्था ने बताया कि फेसबुक पेज “सामाजिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और देशभक्तिपूर्ण कार्यों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे। याचिकाकर्ता ट्रस्ट आम लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए नि: शुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित करता है कि कैसे व्यक्तित्व में आध्यात्मिक रूप से सुधार किया जा सकता है।“ यह हैरानी की बात है कि इसके बावजूद फेसबुक ने सनातन संस्था के पेज को ब्लॉक कर दिया था। अब कोर्ट नए कानून के अनुसार फेसबुक के खिलाफ एक्शन लेगा।

 

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