इज़रायल की नई सरकार या तो फिलिस्तीन-समर्थक होगी या फिर वह बिखर जाएगी

Netanyahu के जाने के बाद इज़रायल पर टूटेगा मुसीबतों का पहाड़!

RAAM इज़रायल

(PC: Anadolu agency)

Netanyahu जल्द ही इज़रायल के PM पद को गँवाने वाले हैं। इज़रायल की 8 विपक्षी पार्टियों ने Netanyahu को सरकार से बाहर करने के लिए गठबंधन का ऐलान कर दिया है, लेकिन इस गठबंधन में एक ऐसी पार्टी है जो इस नई सरकार को फिलिस्तीन के विरुद्ध कड़ा एक्शन लेने से रोकेगी। उस पार्टी का नाम है इज़रायल की कट्टरपंथी इस्लामिस्ट पार्टी RAAM!

यह इज़रायल के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि कोई इस्लामिस्ट पार्टी सरकार का हिस्सा बनने जा रही है। ऐसे में मौजूदा स्थिति के अनुसार अगर नई सरकार फिलिस्तीन के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन लेगी तो RAAM कभी भी सरकार से समर्थन वापस लेकर उसे गिरा देगी। दूसरी ओर, अगर इज़रायल के दक्षिणपंथी नेता Bennett को अपनी सरकार चलानी है, तो उन्हें RAAM को खुश रखने के लिए फिलिस्तीन पर बेहद नर्म रुख दिखाने के लिए मजबूर होना ही पड़ेगा।

बता दें कि Netanyahu के खिलाफ अभी जो गठबंधन बना है, उसने इस्लामिस्ट, वामपंथी पार्टियों से लेकर घोर दक्षिणपंथी तक कुल 8 पार्टियां शामिल हैं। Yamina पार्टी के मुखिया Naftali Bennett घोर दक्षिणपंथी नेता हैं, जो फिलिस्तीन के वजूद से ही इंकार करते हैं और जो West Bank को पूरी तरह इजरायल में शामिल करना चाहते हैं। दूसरी ओर इसी गठबंधन में RAAM जैसी इस्लामिस्ट पार्टी भी है जिसे इजरायल में फिलिस्तीन का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि RAAM सरकार का हिस्सा बनने जा रही है, लेकिन बड़ा प्रश्न यही है कि क्या ये बहु-विचारधारा संगम अपना कार्यकाल पूरा कर भी पाएगा या नहीं!

RAAM के सरकार में शामिल होने के बाद फिलिस्तीन और हमास से जुड़े लोगों ने पार्टी के नेता मंसूर अब्बास की घोर निंदा की है। Arab News की एक रिपोर्ट के मुताबिक गाज़ा के लोग मंसूर अब्बास को एक “देशद्रोही” के तौर पर देख रहे हैं। गाज़ा के एक नागरिक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है “वह एक गद्दार है। वो क्या करेगा जब नई सरकार गाज़ा पर हमले की तैयारी कर रही होगी? क्या वो यह स्वीकार करेगा, ऐसी सरकार का हिस्सा बनना जो मासूम फिलिस्तीनीयों का खून बहाती हो।”

ज़ाहिर है कि फिलिस्तीन और हमास से जुड़े लोगों द्वारा मंसूर अब्बास की आलोचना के कारण मंसूर पर बड़ा राजनीतिक खतरा मंडरा रहा है। इज़रायल में 20 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यक अरब लोगों की है, जो RAAM पार्टी को अपना समर्थन देते हैं। ऐसे में अगर मंसूर के रहते हुए इज़रायल की नई सरकार फिलिस्तीन के खिलाफ कोई अभियान चलाती है तो इसका उनकी लोकप्रियता पर बेहद नकारात्मक असर पड़ेगा। इसलिए वे यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूर हो जाएंगे कि इज़रायल की नई सरकार फिलिस्तीन को लेकर अधिक से अधिक नर्म रुख दिखाये।

दूसरी ओर Naftali Bennett को कट्टर फिलिस्तीन विरोधी नेता माना जाता है। अगर वे सरकार में आते हैं, तो उन्हें Netanyahu के समर्थकों का मुंह बंद करने के लिए फिलिस्तीन के खिलाफ बड़ा operation चलाना ही होगा। Bennett अपने कार्यकाल के दौरान West Bank को इज़रायल में मिलाने के एजेंडे को आगे बढ़ाएँगे। यहीं सारी समस्या खड़ी होगी। RAAM ऐसा कभी होने नहीं देगी और ऐसी सूरत में अगर फिर भी Bennett सरकार को आगे बढ़ाते हैं तो वे खुद लोगों के बीच लोकप्रियता खो देंगे। एक नपुंसक सरकार का नेता बन Bennett अपने ही राजनीतिक करियर पर लात मारने का काम करेंगे।

कुल मिलाकर या तो Bennett समय से पहले ही सरकार गिराने पर मजबूर हो जाएंगे या फिर उन्हें RAAM की बात मानकर अपने कार्यकाल के समय फिलिस्तीन के समर्थन में नीतियाँ बनानी होंगी!

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