‘सब कुछ सुनियोजित था’, NHRC की टीम ने बंगाल हिंसा पर ममता और उनके गुंडों की क्रूरता का किया खुलासा

कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति काटी गई, पुलों को ध्वस्त किया गया

बंगाल हिंसा रिपोर्ट NHRC

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा की घटनाओं की जांच करने का काम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपा गया है। अब NHRC की टीम ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किये हैं। इस टीम ने बताया है कि, जिन लोगों ने भाजपा को वोट देने की हिम्मत की, उन पर जानबूझ कर अत्याचार किए गए। वहीँ एक अन्य स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग कमेटी रिपोर्ट ने भी इसी तरह का खुलासा किया है कि चुनाव परिणाम के बाद हुई हिंसा सुनियोजित थी।

दरअसल, इस सप्ताह की शुरुआत में, जाधवपुर की यात्रा के दौरान NHRC की समिति पर TMC के गुंडों ने हमला किया था। यानी ममता बनर्जी चाहती ही नहीं है कि, उनकी पार्टी द्वारा किये गए हमले की जाँच भी हो। ANI ने एक NHRC अधिकारी के हवाले से बताया कि, “चुनाव के बाद हुई हिंसा की जांच के लिए जाधवपुर गई NHRC की टीम पर हमला किया गया था। जांच के दौरान, यह पाया गया कि यहां 40 से अधिक घरों को नष्ट कर दिया गया है। हम पर गुंडों द्वारा हमला किया जा रहा है।”

NHRC की टीम ने यह भी बताया कि, “बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा, स्पष्ट रूप से पूर्व नियोजित थी, कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति काट दी गई थी, पुलों को ध्वस्त कर दिया गया था, लोगों को मजबूर कर दिया गया था कि वे फिर कभी भाजपा को वोट नहीं दे।”

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वहीँ एक स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हुए हिंसा अचानक नहीं हुए बल्कि एक सुनियोजित तरीके से की गई हिंसा थी। हैरानी की बात तो यह है इस टीम का भी विरोध भी किया गया था।

फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने बताया कि, पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा की 15,000 घटनाएं हुईं, जिसमें 25 लोग मारे गए और 7,000 महिलाओं से छेड़छाड़ की गई। सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में civil society group- कॉल फॉर जस्टिस ने 63 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की है।

इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए टीम पश्चिम बंगाल के कई कई जिलों में गयी थी, जहां से 200 से ज्यादा तस्वीरें, करीब 50 से ज्यादा वीडियो एनालिसिस करके यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इतना ही नहीं, यह टीम ग्राउंड पर पीड़ितों से भी मिलने पहुंची थी।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी के अनुसार, कॉल फॉर जस्टिस – की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 मई को चुनाव परिणाम के बाद पूरे पश्चिम बंगाल के कई गांवों और कस्बों में एक साथ हिंसा शुरू हुई।

रिपोर्ट में कहा गया है, “यह एक स्पष्ट संकेत है कि ज्यादातर घटनाएं छिटपुट नहीं बल्कि पूर्व नियोजित, संगठित और रणनीति के साथ हुए हैं।” इस पांच सदस्यीय टीम ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया और वहां विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात के बाद रिपोर्ट तैयार की है। रेड्डी ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य के 16 जिले चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने कहा, “रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव के बाद हुई हिंसा के कारण कई लोगों को पश्चिम बंगाल में अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और असम, झारखंड तथा ओडिशा में शरण लेना पड़ा है।” रिपोर्ट के अनुसार, अपराधी, माफिया डॉन और आपराधिक गिरोह, जो पहले से ही पुलिस रिकॉर्ड में थे, उन्होंने ही हिंसा शुरू की और करते रहे, जो यह दर्शाता है कि उन्हें चुनाव के पहले से ही राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और उन्हीं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को चुप कराने के लिए किया जाता था।

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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि घरों और वाणिज्यिक संपत्तियों पर लक्षित हमला और तोड़फोड़ का एकमात्र उद्देश्य लोगों को उनकी आजीविका से वंचित करना था।

इस रिपोर्ट में समिति ने पाया कि “राज्य सरकार नागरिकों के मूल अधिकारों का संरक्षण करने में फेल रही। समिति ने बताया कि एक खास पार्टी के लोगों को टारगेट करके उन पर हमला किया गया। इस दौरान पुलिस ने बड़ी लापरवाही की। पुलिस ने उन लोगों को न्याय ना देने की जगह, उन्हीं पर मामला दर्ज कर दिया। इसके अलावा शिकायत के बावजूद पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। रिपोर्ट में बताया गया कि कई लोग अपना घर छोड़कर पलायन कर गए और उनके घरों को जला दिया गया। एक खास पार्टी के लोगों के आधार कार्ड और राशन कार्ड छीन लिए गए। इसके अलावा हिंसा की जगहों पर क्रूड बम और पिस्टल की अवैध फैक्ट्री भी मिलीं।“

अब यह खबर सामने आई है कि NHRC की टीम पर ही हमला कर दिया गया। यानी स्पष्ट है कि ममता बनर्जी नहीं चाहती है कि उनकी पार्टी द्वारा किये गए हिंसा का पोल खुले। बता दें कि 18 जून को, कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने NHRC के अध्यक्ष को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा की घटनाओं में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के सभी मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। समिति ने रविवार को हिंसा से प्रभावित लोगों के साथ अपनी बातचीत शुरू की।

अब इस समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ममता बनर्जी पर कलकाता हाई कोर्ट भी एक्शन ले सकेगा। अब यह देखना है कि ममता बनर्जी के खिलाफ गृह मंत्रालय और हाई कोर्ट क्या निर्णय लेता है।

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