Amethi Vs Wayanad: कैसे राहुल की पूर्व constituency वर्तमान constituency से बेहतर काम कर रही है

अमेठी के बाद अब वायनाड को भी बर्बाद कर रहे हैं राहुल गांधी

अमेठी वायनाड कोरोना

नेहरू-गांधी परिवार ने जिस भी लोकसभा या विधानसभा सीट पर अपना आधिपत्य जमाया, वो क्षेत्र बर्बादी की ओर ही चला गया। अमेठी के साथ भी वर्ष 2019 से पहले यही होता रहा है। राहुल गांधी की लोकसभा सीट होने के चलते अमेठी हाईप्रोफाइल तो बना, लेकिन विकास के मामले में पीछे ही रहा। वहीं 2019 में अमेठी में राहुल की हार और स्मृति ईरानी की जीत के बाद से यहां से केवल सकारात्मक खबरें ही सुनने को मिलती हैं। वहीं अमेठी से भागकर केरल के वायनाड गए राहुल गांधी वहां के लोगों के लिए कुछ विशेष नहीं कर सके हैं, जिसका उदाहरण कोरोनावायरस के मैनेजमेंट में भी देखने को मिला है। एक तरफ अधिक जनसंख्या होने के बावजूद अमेठी में कोरोना अंतिम सांसें गिन रहा है, तो दूसरी ओर वायनाड में यही कोरोना लोगों के लिए मुसीबतें खड़ी कर रहा है, किन्तु राहुल गांधी अपनी राजनीतिक नौटंकियों में व्यस्त हैं।

देश के लगभग सभी राज्यों में कोरोनावायरस कंट्रोल में आ चुका है, लेकिन केरल की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है। राज्य से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मामले सामने आ रहे हैं। कुछ वैसी ही स्थिति लोकसभा सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वायनाड की भी है, जहां कोरोनावायरस स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। परंतु सांसद जी दिल्ली में संसद सत्र के दौरान अपने क्षेत्र की समस्या उठाने की बजाए अराजकता मचाने में व्यस्त हैं। इसके विपरीत राहुल को त्यागने वाली अमेठी की जनता के दिन भी अच्छे आ गए हैं, क्योंकि इसका धीरे-धीरे कायाकल्प हो रहा है। आंकड़ों की बात की जाए तो अमेठी में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या मात्र 2 बची है।

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अमेठी और वायनाड के बीच तुलना करें तो अमेठी की कुल जनसंख्या करीब 18 लाख है, जबकि वायनाड की मात्र 8 लाख, इसके बावजूद वहां कोरोना को कंट्रोल करने में प्रशासन के पसीने छूट रहे है़ं। अमेठी में अब तक कुल 9,958 केस आए हैं जिनमें से फिलहाल दो केस ही एक्टिव हैं। यही नहीं पिछले 24 घंटों में यहां कोरोना का कोई नया मरीज़ नहीं मिला है जो कि अमेठी के लिए एक संतोषजनक बात है; क्योंकि राहुल ने इस क्षेत्र को इतना पिछड़ा बना दिया था कि इसके उबरने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गईं थीं। स्मृति ईरानी की जीत के बाद अमेठी के भाग्य बदल गए हैं।

 

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वही अमेठी से इतर अगर राहुल की वर्तमान संसदीय सीट यानी वायनाड की बात करें, तो अमेठी से बेहद कम जनसंख्या होने के बावजूद वायनाड में अब तक कुल 77,910 कोरोना मामले सामने आ चुके हैं, और एक्टिव केसों की संख्या 6,950 है, जो कि वायनाड की दुर्दशा को प्रतिबिंबित करता है। पिछले 24 घंटों में यहां कोरोना के 666 मामले सामने आए हैं, ये इस बात स्पष्ट संकेत है कि वायनाड कोरोना वायरस की बुरी चपेट में है, और इसके तुरंत उबरने की संभावनाएं काफी कम हैं। किन्तु राहुल गांधी हैं कहाँ?

अमेठी और वायनाड की कभी भी तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि अमेठी की जनसंख्या वायनाड से दोगुनी है, इसके बावजूद यदि कोरोनावायरस का प्रकोप बढ़ रहा है, तो आवश्यक है कि सांसद अपने क्षेत्र की जनता के प्रति अपने कर्तव्य निभाए, और संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करें। यही नहीं सांसद राज्य सरकार को भी इस मामले में विशेष ध्यान देने के अनुऱोध कर सकते हैं। इसके विपरीत शायद राहुल को अपने संसदीय क्षेत्र की कोई परवाह ही नहीं है। वो संसद में अपने साथी सांसदों के साथ मिलकर अराजकता फैला रहे हैं। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि राहुल की मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से कोरोना वायरस के मामले काफी तेजी से सामने आ रहे हैं, किन्तु सोनिया जी इससे बेखबर विपक्षी एकता स्थापित करने में व्यस्त हैं।

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कुछ ऐसा ही अमेठी से दो बार सांसद रहने के दौरान राहुल ने किया था, और परिणाम ये कि अमेठी पिछड़ता चला गया। अंत में अमेठी की जनता ने समझदारी दिखाते हुए राहुल को ही अमेठी से उखाड़ फेंका, जिसका नतीजा ये है कि राहुल वायनाड में बर्बादी मचाने चले गए‌।‌ राहुल का जाना ही अमेठी के लिए वरदान बना, जिसके परिणामस्वरूप वायनाड कोरोना से त्रस्त है, और अमेठी बिल्कुल स्वस्थ है।

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