रोहिंग्याओं को भारत से बाहर निकालने के लिए ‘अंतिम पग’ उठा लिया गया है

सरकार भले ही राष्ट्रीय स्तर पर NRC लागू करने से इंकार कर रही हो, लेकिन रोहिंग्याओं को बाहर करने की तैयारी अपने चरम पर है!

मोदी सरकार की एक विशेष नीति रही है, कि यदि किसी मुद्दे पर कल्पना से ज्यादा विरोध हो रहा हो, तो उस मुद्दे के मुख्य उद्देश्य के लिए पर्दे के पीछे से भी एक रास्ता बना लो किन्तु उद्देश्य की पूर्ति होनी ही चाहिए। सीएए के संबंध में मोदी सरकार ने कुछ ऐसा ही किया है था, कानून के नियमों को निश्चित करने के संबंध में भले ही विलंब हुआ हो, किन्तु पाकिस्तान , बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने के उद्देश्य की पूर्ति के लिए मोदी सरकार ने पुराने ही नियमों का सहारा ले एक अधिसूचना जारी कर दी। इसी भांति अब मोदी सरकार अवैध रूप से रह रहे लोगों को भारत से बाहर फेंकने की तैयारी कर रही है, जबकि हास्यासपद बिन्दु ये है कि राष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार NRC लागू करने से स्पष्ट रूप से इंकार कर रही है।

NRC का मुद्दा देश में हमेशा ही गर्म रहा है, ऐसे में विपक्ष सदा भयभीत रहता है कि कब अनुच्छेध-370 के अचानक खात्मे की तरह मोदी सरकार राष्ट्रव्यापी NRC लागू न कर दे। ऐसे में सरकार से पूछे गए सवालों में एक बार फिर NRC का मुद्दा उछाला गया है, जिसे लोकसभा सांसद रक्षा निखिल खडगे ने उठाया है। इसको लेकर मोदी सरकार की तरफ से गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने जवाब देते हुए कहा है कि मोदी सरकार की अभी राष्ट्रव्यापी नागरिकता पंजीकरण कराने की कोई मंशा नहीं है, लेकिन सरकार रोहिंग्याओं को बाहर निकालने के लिए कटिबद्ध है।

और पढ़ें- Twitter user ने राहुल गांधी की खोली पोल, कहा- ‘ब्रिटिश नागरिकता को छुपाने के लिए सरकारी वेबसाइट से हटाया कंपनी का data’

लोकसभा में जवाब देते हुए नित्यानंद राय ने कहा, “रोहिंग्‍याओं की पहचान की जा रही है और उन्‍हें वापस भेजने की तैयारी चल रही है।” उन्होंने कहा, “देश में राष्‍ट्रीय नागरिक पंजीकरण का मुद्दा पिछले काफी समय से बना हुआ है। संसद के माध्‍यम से हम बता देना चाहते हैं कि देश में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अभी इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया हैमहत्वपूर्ण बात ये है कि मोदी सरकार के मंत्री ने ये भी कहा है कि राहिंग्यांओं के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा को एक विशिष्ट खतरा है। ऐसे में मोदी सरकार रोहिंग्याओं को चिन्हित कर उन्हें देश से बाहर करने की तैयारी कर रही है।

ध्यान देने वाली बात ये भी है कि देश की सर्वोच्च अदालत में रोहिंग्याओं के प्रत्यर्पण के विरोध से जुडी एक याचिका लगाई गई है, हालांकि मामला अभी लंबित है, एवं इस संबंध में मोदी सरकार के फैसलों पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। ऐसे में NRC न लागू करने की बात पहली नजर में तो मोदी सरकार पर सवाल खड़े कर सकती है, क्योंकि मोदी सरकार के ही गृहमंत्री एवं पूर्व बीजेपी अध्यक्ष राष्ट्रव्यापी NRC का एलान कर चुके हैं, किन्तु इसके पीछे मोदी सरकार की बखेड़ा न खड़ा करते हुए राष्ट्र के स्वार्थ सिद्धि की है।

और पढ़ें- CAA के बिना ही गैर-मुस्लिमों को मिलेगी भारतीय नागरिकता, शाह ने खोला दूसरा दरवाज़ा

TFI ने कुछ दिन पहले ही रिपोर्ट में बताया था कि कैसे CAA के नियमों के बनने में देरी होने के कारण परेशान गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने के लिए मोदी सरकार ने पीछे का रास्ता चुना था। मोदी सरकार ने नागरिकता कानून 1955 की धारा 16 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अधिसूचना जारी की थी, और गैर-मुस्लिम सभी धर्म के लोगों से नागरिकता के लिए आवेदन करने की अपील की थी, जो इस बात का संकेत है कि मोदी सरकार तत्कालिक निर्णयों के लिए विशेष नियमों का प्रयोग कर सकती है।

 

ऐसे में मोदी सरकार NRC की बात तो नहीं कर रही, किन्तु रोहिंग्याओं को बाहर फेंकने के लिए अपनी कटिबद्धता दर्शा रही है, जो इस बात का संकेत है कि मोदी सरकार रोहिंग्याओं की चुन-चुन कर पहचान कर रही है, एवं उनको देश से निकालने के लिए अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग भी कर सकती है, जिसका विरोध करने के बावजूद विपक्ष कुछ ठोस कदम नहीं उठ सकेगा। ऐसे में विरोध की आग भी नहीं भड़केगी, एवं रोहिंग्याओं की स्वार्थ सिद्धी भी हो जाएगी।

Exit mobile version