उरी के 5 साल: वह आतंकी हमला जिसने भारत को हमेशा के लिए बदल दिया

अब ये "नया भारत" है...

उरी आतंकी हमले के बाद मोदी का एक्शन

तारीख थी 18 सितम्बर, 2016। पांच वर्ष पूर्व आज के ही दिन, भारतीय सेना को जम्मू कश्मीर में पिछले दो दशकों में सबसे बड़ा नुकसान हुआ था। जान, माल और सम्मान पर यह चोट कोई नई बात नहीं थी क्योंकि पाकिस्तान नफरत के आधार पर बना देश है और वह हमेशा से नफरती काम करता है लेकिन उरी में आज के दिन हुए आतंकी हमले ने सब कुछ बदलकर रख दिया। अगर सुरक्षा के लिहाज और पाकिस्तान के साथ सम्बन्धों के हिसाब से देखा जाए तो उरी हमला इतिहास के कालखंड में निर्णायक बिंदु साबित हुआ। बहुत सारी ऐसी चीजों और स्थितियों को बदल दिया गया, जिसकी आवश्यकता दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, चौथी सबसे बड़ी सैन्य ताकत और दूसरी बड़ी थलसेना को थी। आज इतिहास के उस कालखंड पर हम नज़र डालेंगे और समझेंगे कि भारत ने अपनी किन कमजोरियों को हमेशा के लिए बदल दिया।

18 सितंबर, 2016 को चार भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार किया था। वहां से लगभग वह छह किलोमीटर तक ट्रेकिंग करके जम्मू-कश्मीर के उरी शहर में आए। वहां से वह एक भारी सुरक्षा वाले भारतीय सैन्य शिविर के पास गए और एक बड़े पैमाने पर ग्रेनेड हमला किया। वह सैन्य शिविर सामान्य शिविर नहीं था। वह एक अस्थायी ईंधन डिपो था जहां सैकड़ों लीटर पेट्रोल, डीजल और मिट्टी का तेल रखा जाता है।
उरी आतंकी हमले की जांच में पता चला था कि सभी चार आतंकवादी AK47 राइफल से लैस थे, जिनके बैरल के नीचे ग्रेनेड लांचर भी था। चारों आतंकवादियों के पास 50 से अधिक आग लगाने वाले हैंड ग्रेनेड थे जिन्हें विशेष रूप से आग लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया था।

आतंकवादियों ने ईंधन डिपो में बड़े पैमाने पर विस्फोट किया और तंबू को तहस-नहस कर दिया। इस कायरतापूर्ण हमलें में लगभग 19 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। उरी आतंकी हमले का पैमाना ऐसा था कि यह हमला दो दशकों में हुआ सबसे बड़ा हमला बताया गया। सरकार के पास कड़ा जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। यह वही समय था जब यह महसूस किया गया कि भारत सुरक्षा के दृष्टि से किन पैमानों पर कमजोर है। हमारे यहां तबतक कश्मीर के आतंकवाद निरोधक प्रयासों को देश की सीमा के भीतर सीमित रखा जाता था लेकिन सबको यह बात मालूम था कि ऐसे संगठनों से लेकर ऐसी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार पाकिस्तान है।

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पाकिस्तान आतंकवादियों को वित्त पोषित करता है। उनके सीमा के भीतर ही आतंकवादी बेस बनाते हैं और उसका इस्तेमाल लांच पैड के रूप में करके भारत में आतंकवादी हमलें करते हैं। उरी आतंकी हमले के बाद सरकार ने पहली बार सेना को नियंत्रण रेखा पर और उसके आसपास आतंकी लॉन्च पैड्स के खिलाफ “सर्जिकल स्ट्राइक” करने की छूट प्रदान की थी। यह फैसला कई रूप से महत्वपूर्ण है। पहली बार भारतीय सरकार ने डिफेंसिव पोजिशन के साथ-साथ ऑफनसिव पोजिशन भी ली थी।

पाकिस्तान अपने देश में आतंकवादियों को पनाह देकर उनका इस्तेमाल भारत के विरुद्ध करता था। भारत इसलिए हमला नहीं करता था क्योंकि औपचारिक रूप से यह काम देश ने नहीं, बल्कि एक आतंकवादी संगठन ने किया है। भारत ने उस समय सर्जिकल स्ट्राइक करके पाकिस्तान को भी अचंभित कर दिया था। सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया लेकिन पाकिस्तानी सेना पर नहीं, प्रॉक्सी वॉर के लिए इस्तेमाल होने वाले आतंकी संगठन पर और हमला करने के लिए भारत ने आतंकी संगठन नहीं बल्कि फौज के विशेष टुकड़ी का इस्तेमाल किया था।

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ये एक बड़ा बदलाव था। इससे भारत ने अपनी सैन्य क्षमता के साथ-साथ अपनी नीयत पर भी स्पष्टीकरण दे दिया। उरी फ़िल्म में वह सीन याद होगा जब परेश रावल कहते हैं कि यह नया भारत है, यह देश के भीतर घुसकर मारेगा। भारत में उरी आतंकी हमले के बाद सांस्कृतिक रूप से भी बड़ा बदलाव हुआ है। भारत के बॉलीवुड को पाकिस्तान से अपार प्रेम है लेकिन उस हमले के बाद पाकिस्तान के प्रति वह प्रेम दिखाना बंद कर दिया गया है। अब उरी आतंकी हमले के बाद भूलो और माफ करो वाले सिद्धांत को भी भुला दिया गया है, देश में नेवर फॉरगेट नेवर फॉरगिव का सिद्धांत चालू हो गया है।

कूटनीतिक रूप से भी देश में कई बदलाव हुए। अब फर्जी का साझा इतिहास और बड़े भाई और छोटे भाई का झूठा प्यार करना भारत की ओर से बंद कर दिया गया है। भारत अब परोक्ष रूप से भी पाकिस्तान के प्रति अत्यधिक ध्यान नहीं देता है। जैसा व्यवहार वो करते हैं, वैसा ही भारत भी करेगा, इसी रास्ते पर कूटनीतिक प्रयासों की लम्बा श्रृंखला स्थापित की गई है। भारत जहां भी जरूरत होता है, वहां पाकिस्तान का विरोध करता है।

भले ही भारत को मंगलयान, चन्द्रयान, ओलंपिक उपलब्धि पर गर्व महसूस करता हो लेकिन पाकिस्तान के लिए गौरवान्वित होने का बस यही कारण हुआ करता था कि उनके नाम से एक अरब की आबादी वाला देश चिंतित होता है। अफसोस की बात यह है कि उरी आतंकी हमले के बाद वो भी गर्व का कारण खत्म हो गया है। अब भारत कौड़ी का भी भाव पाकिस्तान को नहीं देता है।

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